28 साल बाद दुर्लभ संयोग लेकर आई संक्रांति

Prashant Sahare

Publish: Jan, 14 2017 11:22:00 (IST)

Seoni, Madhya Pradesh, India
28 साल बाद दुर्लभ संयोग लेकर आई संक्रांति

गज हाथी पर सवार होकर आ रही संक्रांति


सिवनी. मकर संक्रांति पर इस बार 28 साल बाद दुर्लभ संयोग बन रहा है। मकर संक्रांन्ति के दिन 14 जनवरी को सूर्यदेव अपने पुत्र शनि के घर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। पिता-पुत्र का मिलन होगा जो दो माह तक रहेगा। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करते ही सूर्य दक्षिणायण से उत्तरायण हो जाएंगे। इसके चलते मलमास की समाप्ति हो जाएगी। इससे विवाह जैसे शुभ मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे। मकर संक्रांन्ति 14 जनवरी आज मनाई जाएगी।
पंडित ज्ञानचंद तिवारी के अनुसार, मकर संक्रांन्ति पर पूरे दिन पुण्य काल रहेगा। इस दिन दान-पुण्य, गंगा व तीर्थ स्नान का विशेष महत्व है। तिवारी ने बताया कि इस बार मकर संक्रांति का वाहन गज, हाथी और उपवाहन गदर्भ (गधा) पर सवार होकर आ रही है। 14 जनवरी को दोपहर 1.55 बजे सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। करीब 28 साल के बाद मकर संक्रान्ति पर सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग के साथ चंद्रमा कर्क राशि में और अश्लेषा नक्षत्र व प्रीति तथा मानस योग रहेगा।
अन्न दान देना होता है शुभ-
संक्रांति के दिन दान करने का महत्व बढ़ जाता है। व्यक्ति को यथासंभव किसी गरीब को अन्नदान, तिल व गुड़ का दान करना चाहिए। तिल या फिर तिल से बने लड्डू या तिल के अन्य खाद्य पदार्थ भी दान करना शुभ रहता है। धर्म शास्त्रों के अनुसार कोई भी धर्म कार्य तभी फल देता है। जब वह पूर्ण आस्था व विश्वास के साथ किया जाता है। जितना सहजता से दान कर सकते है। उतना दान अवश्य करना चाहिए। इधर संक्रांति के आगमन के साथ ही मलमास की विदाई भी हो जाएगी। संक्रांति के दूसरे दिन से विवाह की शहनाईयां गूंजने लगेंगी। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार संक्रांति के दिन सूर्योदय से पूर्व स्नान कर जरूरतमंदों को अन्न एवं वस्त्र दान करने से भी व्यक्ति सामथ्र्यवान होता है।
बैनगंगा तट पर लगेंगे मेले-
जिले की जीवन रेखा कही जाने वाली बैनगंगा नदी के उदगम स्थल मुण्डारा सहित लखनवाड़ा, मुंगवानी, दिघौरी, छपारा, मझगवां, कोठीघाट, सिद्धघाट, पंचधारा, उगली, हिर्री बैनगंगा संगम सरेखाकला सहित अन्य स्थानों में मेला लगेगा। इसके अलावा अन्य सहायक नदियों में तट पर भी मेले का आयोजन मकर संक्रांति पर्व के अवसर पर लगेगा। मेले की तैयार अंतिम दौर पर चल रही है।
सुबह से डूबकी लगाने पहुंचेंगे श्रद्धालु-
मकर संक्रांति पर्व के अवसर पर नदी में डूबकी लगाकर नहाना एवं सूर्य देवता को अर्ज करने का विशेष महत्व है। मकर संक्रांति के दिन साबुन, सेम्पू के स्थान पर तिल का प्रयोग करना अत्यंत ही लाभकारी माना जाता है।
लाई-गुड़ का चखेंगे स्वाद-
मकर संक्रांति पर्व पर तिल से बने पकवान के साथ-साथ लाई गुड़ खाने का विशेष महत्व है क्योंकि तिल और गुड़ सर्दी के मौसम में बहुत ही फायदेमंद होती है । तो वहीं ज्वार से बनी लाई भी स्वास्थ्य के लिए लाभदायक मानी जाती है। मकर संक्रांति पर हर किसी को गुड़, लाई और तिल से बने पकवान का भोजन में इस्तेमाल करना चाहिए। साथ ही मकर संक्रांति पर खिचड़ी बनाकर खाने एवं वितरण करने का भी महत्व है।

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