एक पिता की पीड़ा - कोई औलाद ऐसी न हो...

sunil vanderwar

Publish: Jun, 19 2017 06:02:00 (IST)

Seoni, Madhya Pradesh, India
एक पिता की पीड़ा - कोई औलाद ऐसी न हो...

वृद्धाश्रम में रह रहे बुजुर्ग पिता की आपबीती


सिवनी
. औलाद की जिंदगी में कोई कमी न रहे, इसलिए इस पिता ने कड़ी धूप में भी खुद की परवाह किए बिना खूब पसीना बहाया, एक-एक रुपया इकट्ठा किया। औलाद की खुशी के लिए अपनी जमीन-जायदाद का बंटवारा भी कर दिया और जब उसी पिता को बुढ़ापे में सहारा चाहिए था, तो सबने उसे दुत्कार दिया। 6 महीने से वो बुजुर्ग वृद्धाश्रम में इसी इंतजार में है, कि उसका कोई बेटा यहां आएगा और घर लेकर जाएगा। रविवार को पितृ दिवस (फादर्स डे) पर भी किसी बेटे ने वृद्धाश्रम में रह रहे अपने पिता को याद नहीं किया। वहीं पहुंचे लोगों ने बुजुर्ग की भरी आंखें और बीती दास्तान सुनकर कहा हे राम, कोई औलाद ऐसी न हो।
वृद्धाश्रम में मिला सहारा -
जिन बेटों को उंगली पकड़कर चलना सिखाया, उन्हीं ने बड़े होकर बुढ़ापे में पिता का साथ छोड़ उन्हें बेघर कर दिया। लाचारी की उम्र में माता-पिता को कोई सहारा न मिला तो दर-दर की ठोकरें खाने लगे, जिन्हें राह चलते लोगों की मदद मिली और आज वे वृद्धाश्रम में अपनी ही तरह के लोगों के बीच जिंदगी गुजार रहे हैं।
बंटवारा के बाद आए बुरे दिन -
जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के समीप बारापत्थर में संचालित स्नेह सदन वृद्धाश्रम में 25 बुजुर्ग निवासरत हैं। इन्हीं के बीच रह रहे 71 वर्षीय शिवचरण चंद्रवंशी ने आपबीती सुनाई कि वे नगझर-जमुनिया के रहने वाले हैं, वहां उनकी 32 एकड़ खेती,मकान और अन्य संपत्ति थी, पत्नी की मृत्यु के बाद 2 बेटे और एक बेटी की शादी की, जमीन-जायदाद का बंटवारा भी कर दिया। बंटवारे के बाद से ही सबने साथ छोड़ दिया। पोता-पोती की शादी में तक नहीं बुलाया। फिर भी उम्मीद है कि कभी तो कोई वापस घर लेकर जाएगा।
इसी तरह वृद्धाश्रम में बीते तीन साल से रह रहे 65 साल के शिवराम साहू और उन्हीं की तरह यहां रह रहे अन्य दूसरे बुजुर्गों की ऐसी ही कुछ आपबीती है। शिवराम बताते हैं आमागढ़ टिकारी में उनका घर है, उनके 2 बेटे, 3 बेटी हैं। घर में आए दिन विवाद होता, बेटे अभद्रता करते, प्रताडि़त करते थे, एक दिन सब बेटों ने मिलकर बाहर का रास्ता दिखा दिया। तीन साल से वृद्धाश्रम में हैं, लेकिन देखने भी परिवार से कोई नहीं आता। अब बुजुर्ग शिवराम ने भी अपनी तरह के दूसरे बुजुर्गों के बीच खुश रहना सीख लिया है, वे कहते हैं बेटों को हमारी जरूरत नहीं है, तो हम कब तक उनका इंतजार करें। हालांकि आपबीती सुनाते बुजुर्ग की आंखें भर आईं, जो दिल के दर्द बयां कर रहे थे।
परायों से अपनों सा प्यार -
स्नेह सदन वृद्धाश्रम में वर्तमान में 25 बुजुर्ग निवासरत हैं। जिनका अपना-अपना अतीत है, लेकिन ये सभी अतीत के दिनों का दर्द दिल में लिए जीने को मजबूर हैं। बुजुर्ग महिला लीला बाई भोंगाखेड़ा से आई हैं, वे बताती हैं घर, परिवार, औलाद सब हैं, लेकिन कोई याद नहीं करता। अब इन्हीं हमउम्र लोगों के बीच अपनों सा माहौल पाकर बाकी की जिंदगी गुजार रहे हैं।  स्नेह सदन में  अपनों से बेफिक्र बुढ़ापे की जिंदगी बचपन के खेल चीटा, कैरम खेलकर, टीवी देखकर, किताब पढ़कर, बागवानी करके गुजार रहे हैं।

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