कलेक्टर मैडम बोलीं, दोबारा आऊं तो चलते मिले कूलर

Shajapur Desk

Publish: Apr, 22 2017 12:34:00 (IST)

Shajapur, Madhya Pradesh, India
कलेक्टर मैडम बोलीं, दोबारा आऊं तो चलते मिले कूलर

अब तक वार्डों के कूलर चालू नहीं किए गए हैं। कूलर्स की दशा भी खराब है। खस (कूलर की घास) भी नहीं बदली। पानी भी नहीं है। ऐसे में मरीज परेशान हो रहे हैं।

शाजापुर.अब तक वार्डों के कूलर चालू नहीं किए गए हैं। कूलर्स की दशा भी खराब है। खस (कूलर की घास) भी नहीं बदली। पानी भी नहीं है। ऐसे में मरीज परेशान हो रहे हैं। यह बात कलेक्टर अलका श्रीवास्तव ने जिला अस्पताल में शुक्रवार सुबह निरीक्षण के दौरान सिविल सर्जन से कही।
उन्होंने अस्पताल में कूलर व्यवस्थित नहीं होने पर नाराजगी जाहिर की। साथ ही इलेक्टिशियन को बंद कूलरों को आज ठीक कर चालू करने के निर्देश दिए। मरीजों को ठंडी हवा मिलना चाहिए। घास बदलने के बाद कूलरों में पानी खत्म नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा मैं दोबारा अस्पताल का निरीक्षण करूंगी, तब सभी वार्डों में कूलर चालू होना चाहिए। पत्रिका ने लगातार समाचार प्रकाशित कर मामले को उठाया। उसके बाद कलेक्टर ने शुक्रवार सुबह अस्पताल का निरीक्षण किया
सफाई ठेकेदार को किया ब्लैक लिस्टेड
कलेक्टर अलका श्रीवास्वत के साथ एडीएम मिनाश्री सिंह, एसडीएम राजेशकुमार यादव ने जिला अस्पताल का निरीक्षण किया। इस दौरान अस्पताल परिसर में पसरी गंदगी पर भी कलेक्टर ने ठेकेदार पर नाराजगी जाहिर की। लापरवाही के कारण ठेकेदार को ब्लैक लिस्टेड किया गया है। उक्त ठेगा आगामी 30 अपै्रल को समाप्त हो रहा है। इसके बाद नए ठेकेदार को अस्पताल की सफाई व्यवस्था सौंपी जाएगी। निरीक्षण के दौरान अस्पताल में बिछेचादरे भी गंदे नजर आए, जिस पर कलेक्टर ने नाराजगी जताई, जिम्मेदारों का था कि चादरे धोने वाला ठेकेदार शादी में अवकाश पर है।  मरीजों से मेडिसिन मिलने व डॉक्टरों उपस्थित सहित अन्य प्रश्न किए। जिनके जवाब मरीजों ने दिए।
जल्द करें नई टंकी से पानी सप्लाई
शाजापुर जिला अस्पताल में वर्षों पुरानी बनी पानी की टंकी जर्जर हो चुकी है। इसके लिए अस्पताल के पीछे नई पानी की टंकी पीएचई द्वारा बनाई गई है, जो बनकर तैयार है। जिसको लेकर अस्पताल में पाइप लाइन डालना है, जिसकी लागत 2 लाख 77 हजार रुपए है, जो रोगी कल्याण समिति के माध्यम से डलेगी। कलेक्टर श्रीवास्तव ने पीएचई विभाग से पाइप लाइन डालने को कहा।
बंदरों के उत्पात से मुक्ति दिलवाएं : जिला अस्पतला में आने वाले अटेंडर खाना खाने के बाद बची हुई रोटियां बंदरों को डालते हैं। ऐसे में अस्पताल में बंदरों की संख्या बढ़ रही है। जिस पर कलेक्टर ने अस्पताल प्रशासन से कहा कि यहां आने वाले अटेंडरों को समझाएं की बंदरों को यहां रोटी न खिलाएं। साथ ही डीएफओ को भी बंदरों को अस्पताल से हटाने के निर्देश दिए। जिला अस्पताल में बंदरों से लोग काफी परेशान हैं।
नए कूलर को लेकर दिए जांच के निर्देश
 पिछले वर्ष जून माह में अस्पताल में मरीजों की सुविधा के लिए प्लास्टिक बाडी के 6 नए कूलर खरीदे गए थे। लेकिन इस वर्ष इन कूलरों का कुछ अता-पता नहीं हैं। पत्रिका में खबर प्रकाशन के बाद कलेक्टर ने उक्त 6 कूलरों की जांच के आदेश दिए हैं। मामले में सिविल सर्जन एचसी सिसौदिया का कहना है कि कूलर मेरे कार्यकाल में नहीं खरीदे गए। मैंने कूलरों की जानकारी स्टॉफ से ली है, जिसमें पता चला है कि कूलर खरीदने के बाद उन्हें वापस कर दिया था।

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