223 किसानों को ही मिला धान समर्थन मूल्य योजना का लाभ 

Siddharthnagar, Uttar Pradesh, India
223 किसानों को ही मिला धान समर्थन मूल्य योजना का लाभ 

बन्द रहे कई एजेन्सियों के क्रय केन्द्र, किसानों को नहीं मिला लाभ, ऑनलाइन जानकारी अपडेट करने में फिसड्डी रहे जिम्मेदार

सिद्धार्थनगर.जिले के किसानों को इस बार धान समर्थन मूल्य योजना का लाभ नहीं मिल सका। सरकार की तमाम तैयारियों पर जिम्मेदारों ने पानी फेर दिया। रही सही कसर नोटबंदी ने पूरी कर दी। जिसके चलते दो वर्ष से मौसम की मार झेल रहे किसानों को इस बार व्यवस्था की मार झेलनी पड़ी। अभी तक जिले के महज 223 किसानों को ही धान समर्थन मूल्य योजना का लाभ मिल सका है। व्यवस्था की खामियों व धान क्रय केन्द्रों के नहीं खुलने के कारण किसानों को अपनी उपज को औने पौने दाम में बेचने को मजबूर होना पड़ा। 


किसानों को धान समर्थन मूल्य योजना का लाभ देने की पूरी तैयारी की गई थी। लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही व उदासीनता के कारण किसानों को योजना का लाभ नहीं मिल सका। जिसके चलते अभी तक मौसम की मार झेलने वाले किसानों को जिम्मेदारों द्वारा की गई व्यवस्था की मार झेलनी पड़ी। आलम यह रहा कि जिम्मेदारों की उदासीनता के कारण जिले में धान क्रय केन्द्र नहीं खुले तो जिम्मेदारों ने भी धान क्रय केन्द्रों को खोलने में तनिक भी रूचि नहीं दिखाई। 


जिसके चलते तीन एजेन्सियों को छोड़ किसी भी एजेन्सी के धान क्रय केन्द्र नहीं खुल सके। जिससे किसानों को धान समर्थन मूल्य योजना का लाभ नहीं मिल सका। जिले में पीसीएफ के सर्वाधिक 25 क्रय केन्द्र स्थापित किए गए थे जिसमें से एक भी क्रय केन्द नहीं खुल सके। यहीं हाल अन्य एजेन्सियों के क्रय केन्द्रों का भी रहा। लेकिन विभागीय आंकड़ों में कई एजेन्सियों के सभी क्रय केन्द्र खुले रहे। लेकिन किसानों को लाभ नहीं मिल सका। जिससे किसान चाहकर भी अपनी उपज की बिक्री क्रय केन्द्रों पर नहीं कर सके। 

जिले में बनाए गए थे 59 क्रय केन्द्र 
धान की खरीद करने व किसानों को धान समर्थन मूल्य योजना का लाभ देने के लिए जिले में विभिन्न एजेन्सियों के 59 क्रय केन्द्र बनाए गए थे। जिसे विभागीय रिकार्ड के अनुसार 44 क्रय केन्द्र खुले जबकि हकीकत से यह कोसों दूर है। जिले में बमुश्किल चार क्रय केन्द्र ही खुले थे। लेकिन वहां पर भी व्यवस्थागत खामियों, कर्मचारियो की अनुपस्थिति, बोरों की कमी आदि के कारण खरीददारी नहीं की जा सकी। जिसके चलते किसानों को धान समर्थन मूल्य योजना का लाभ नहीं मिल सका। 
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तीन दिनों में बढ़ गई किसानों की संख्या व खरीद का आंकड़ा
विभाग द्वारा शासन को प्रेषित रिपोर्ट में पांच जनवरी को तैयार रिपोर्ट में धान समर्थन मूल्य योजना का लाभ पाने वाले किसानों की संख्या 193 थी जिनसे 14 हजार एमटी धान की खरीद की गई थी। लेकिन आठ जनवरी को किसानों की संख्या बढ़कर 223 पहुंच गई, जिनसे 17 हजार एमटी धान की खरीद की गई। साथ ही किसानों को 264.482 लाख रूपए का भुगतान भी कर दिया गया। विभाग का यह आंकड़ा जानकारों की समझ से परे है। सवाल यह है कि जब जिले में क्रय केन्द्र खुले ही नहीं नोटबंदी के कारण किसानों  को परेशान होना पड़ा तो एजेन्सियों ने किसानों से खरीददारी कब और कैसे की ।


इन एजेन्सियों के बनाए गए थे क्रय केन्द्र
धान की खरीद के लिए जिले में खाद्य विभाग के नौ, एक आढत, सहकारी समितियों के छह, पीसीएफ के 25, यूपी एग्रो के दो, कर्मचारी कल्याण निगम के दो, फर्टिलाइजर प्राइवेट लिमिटेड के 14 क्रय केन्द्र बनाए गए थे। जिनके माध्यम से 58,400 एमटी धान की खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। लेकिन खरीद का समय खत्म होने तक विभाग द्वारा महज 17 हजार एमटी ही धान की खरीद की जा सकी है। जिसमें से 12 हजार एमटी धान मिलों को भेजा जा चुका है। 


किसानों ने 800-900 रूपया क्विंटल बेचा धान 
क्रय केन्द्रों के नहीं खुलने के कारण जिले के किसान अपनी उपज को बिचौलियों के हाथों आठ व नौ सौ रूपए प्रति क्विंटल की दर से बेचने को मजबूर हुए। जबकि शासन द्वारा धान खरीद समर्थन मूल्य योजना के तहत 1470 रूपया प्रति क्विंटल दर का निर्धारण किया गया था। लेकिन जिले के किसानों को धान समर्थन मूल्य योजना का लाभ नहीं मिल सका। अभी तक मौसम की मार झेलने वाले किसान अब व्यवस्था की मार झेल कर परेशान है। इस बीच नोटबंदी ने भी किसानों के हित को काफी हद तक प्रभावित किया। 

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