आखिर जनता से क्यों डरते हैं नेता और क्यों लेता है सुरक्षा? दर्जनों की सुरक्षा हुई वापस

Abhishek Gupta

Publish: Jan, 13 2017 09:49:00 (IST)

Lucknow, Uttar Pradesh, India
आखिर जनता से क्यों डरते हैं नेता और क्यों लेता है सुरक्षा? दर्जनों की सुरक्षा हुई वापस

'नेता को किसका डर, वो तो खुद ही भय का कारण हैं', जी हाँ इन पंक्तियों पर गौर फरमाएं तो सवाल यही खड़ा होता है कि आखिर अपनी ही जनता से नेता क्यों डरते हैं?

सीतापुर. 'नेता को किसका डर, वो तो खुद ही भय का कारण हैं', जी हाँ इन पंक्तियों पर गौर फरमाएं तो सवाल यही खड़ा होता है कि आखिर अपनी ही जनता से नेता क्यों डरते हैं? क्यों अपनी सुरक्षा के लिए पुलिस कार्यालय से गारद लेते हैं? जबकि बहुत से नेता ही अपराध में लिप्त होते हैं या उनपर आपराधिक मुकदमा दर्ज रहता है। तो सवाल यह कि उनको ही क्यों भय रहता है? बावजूद इन सबके राजनीति के अपराधिकरण होने से वो खुद भय का पर्याय बने रहते हैं।
 
दरअसल 2017 चुनाव से पहले एक बार फिर सवाल यह उठता है कि आखिर नेताओं की सुरक्षा में पुलिसकर्मियों को क्यों लगाया जाता है ? खासकर सत्ता पक्ष के नेता इस तरह से जलवे का खुलकर और जमकर प्रयोग क्यों करते हैं? फिलवक्त आचार संहिता के शुरू होते ही माहौल बदला है और अब तक सर आँखों पर बैठे नेताओं से उनकी सुरक्षा में लगी पुलिस की गारद को पुलिस मुखिया ने वापस जो बुला लिया है। 

बात सीतापुर जिले की करें तो यहाँ समाजवादियों का बोल बाला है और फ़िलहाल 14 लोगों की सुरक्षा को वापस ले लिया गया है जिनमें 12 समाजवादी से जुड़े हैं। खास बात यह है कि न इनमें कोई मौजूदा विधायक और न ही मौजूदा सांसद और तो और न ही मौजूदा एमएलसी है। तो फिर यह कौन महानुभाव हैं जो पुलिस विभाग की नजर में जान के खतरे से घिरे हुए थे? जी हाँ, हम बता दें इनमें वही लोग शामिल हैं जो सरकार के जिम्मेदार ओहदों पर बैठे लोगों के कृपा पात्र रहे हैं। 

हम सूची भी पढ़ाएंगे लेकिन इससे पहले बता दें कि इन सभी की सुरक्षा में एक-एक गार्ड लगा था जो इनकी जान की रक्षा कर रहा था। ऐसे में राजनीति के सिस्टम को सुधारने की बात करने वाले जिम्मेदार लोग इस प्रथा को क्यों नहीं बदल रहे हैं? अगर इन नेताओं को किसी से खतरा है तो वह जनता ही है। तो सवाल जनता से कि इसके लिए जिम्मेदारों को क्यों चुना जाता है? यदि इनको खतरा नहीं तो क्या सिर्फ रौब झाड़ने के लिए पुलिसकर्मी का प्रयोग किया जाता है, जबकि हर पुलिसकर्मी तकरीबन 10 नागरिकों की सुरक्षा का दायित्व रखता है। 

मसलन सवाल सिर्फ नेताओं से नहीं बल्कि पुलिस के उस सिस्टम से भी कि जो नागरिकों की सुरक्षा के लिए उत्तरदायी है और उच्च पदों पर बैठे नेताओं के आदेश के आगे नतमस्तक है ? क्या पुलिसकर्मी को नेताओं की सुरक्षा में लगाकर तंत्र को खुश कर देना ही सही फैसला है जबकि हर एक कर्मी के जाने से कम से कम 10 नागरिक असुरक्षा के घेरे में आ रहे हैं?

सीतापुर में इनकी इनकी सुरक्षा हुई वापस
1 रामेन्द्र यादव पुत्र विधायक रामपाल यादव
2 शमीम कौसर सिद्दीकी जिलाध्यक्ष सपा
3 मधु गुप्ता पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष (आचार संहिता से पहले ही इनकी सुरक्षा वापस हो गयी थी)
4 रश्मि जायसवाल अध्यक्ष नगरपालिका सीतापुर
5 कैसरजहां पूर्व सांसद बसपा सीतापुर
6 गीता सिंह महिला नेता समाजवादी पार्टी
7 प्रदीप राजवंशी पुत्र मंत्री रामपाल राजवंशी
8 विपिन कुमार पाण्डेय बेहद खास मंत्री रामपाल राजवंशी
9 दिग्विजय सिंह देव युवा नेता सपा
10 छत्रपाल यादव पूर्व जिलाध्यक्ष सपा
11 मिथिलेश यादव सपा नेता
12 कमलेश यादव सपा नेता

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