आओ चलें बचपन की वो गली, जहां कॉमिक्स मिला करती थीं

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आओ चलें बचपन की वो गली, जहां कॉमिक्स मिला करती थीं

हम सभी अपने बचपन को याद कर बहुत सी यादों में वापस जाकर उन्हीं लम्हों में जीना चाहते थे. वो भी क्या दिन हुआ करते थे, जब हम तितलियाँ पकड़ते थे, दादी नानी से पुरानी कहानियां सुना करते थे और जब वो सो जाया करतीं थीं तब किताबों में कॉमिक छुपा कर पढ़ा करते थे..

हम सभी अपने बचपन को याद कर बहुत सी यादों में वापस जाकर उन्हीं लम्हों में जीना चाहते थे. वो भी क्या दिन हुआ करते थे, जब हम तितलियाँ पकड़ते थे, दादी नानी से पुरानी कहानियां सुना करते थे और जब वो सो जाया करतीं थीं तब किताबों में कॉमिक छुपा कर पढ़ा करते थे। जब ऐसे ही कॉमिक किरदारों के सीरियल टीवी पर आया करते थे तब हम कहना पीना भी भूल जाते थे। तकनीकी के इस ज़माने में आज हम उन दिनों को शायद भूल चुके हैं वह कॉमिक किरदार अब हमें नजर ही नहीं आते नजर आते हैं तो बस उनकी कहानियों में पिरोये गए वो संवाद जिन्हें हम रह-रह कर याद करते रहते हैं

इन कहानियों के सभी पात्र हमें आज भी बखूबी याद हैं। आज भी जब इंटरनेट पर इनके बारे में कुछ मिलता है तो हम उसे देखना ज़रूर पसंद करते हैं।

नागराज-

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नागराज किसी समय पर बच्चों के लिए एक प्रसिद्द कॉमिक किरदार था। जिसे यक़ीनन लंबे समय से जीवित भारतीय एक्शन कॉमिक सुपर हीरो कहा जा सकता है। 1980 दशक के अंत में संजय गुप्ता द्वारा सृजित, नागराज अपने 25 वर्ष के जीवन काल में रूप-रंग और साथ ही कहानी, दोनों तरह से बहुत बदल गया है। इस तथ्य के बावजूद कि किसी समय भारत में कॉमिक संस्कृति लगभग ग़ायब हो गई थी, फिर भी उसके प्रशंसक आधार में वृद्धि हुई और उसकी पहली एनिमेटेड फ़िल्म के जारी होने के बाद इसमें ज़बरदस्त बढ़ोतरी की उम्मीद है।

डोगा-

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डोगा भी हमारे लिए एक ऐसा किरदार हुआ करता था, जिसे हम बहुत ही दिलचस्पी के साथ पढ़ा करते थे। कहानी का किरदार एक ऐसे हीरो का था जो दोस्तों का दोस्त और दुश्मनों का दुश्मन था। डॉग के हर मिशन में डॉग (कुत्ते) भी उसकी मदद किया करते थे।

चाचा चौधरी-

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चाचा चौधरी और साबू की जोड़ी को हम कैसे भुला सकते हैं। छोटी सी कद काठी में बड़ा सा किरदार निभाने वाले और इस कहानी के पात्रों को गढ़ने वाले प्राण कुमार शर्मा को भी शायद इस बात का अंदाजा नहीं था, कि उनके ये पात्र इतने लोकप्रिय हो जाएंगे कि उन पर एक टीवी शो भी बन जाएगा।

बांकेलाल-

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बांकेलाल को ‘कॉमेडी किंग’ कहा जाता था क्योंकि कॉमिक के पाठक इस किरदार की शरारतों को पढ़कर लोटपोट हो जाय करते थे. आप भी बांकेलाल की कहानियों को पढ़कर काफ़ी लोटपोट हुए होंगे।

पिंकी-

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पांच साल की पिंकी एक ऐसा कॉमिक करेक्टर था, जिसे हर लड़की पसंद करती थी। उसकी कुट-कुट नाम की पालतू गिलहरी और उसके भीखू व चम्पू दोस्त हमें आज भी याद हैं। कई बार पिंकी के किस्से इतने मज़ेदार होते थे कि लड़कियां उन्हें अपने दोस्तों के बीच चर्चा का विषय बना लेती थीं। इस कॉमिक के अगले संस्करण का इंतज़ार लड़कियों को बड़ी बेसब्री से रहता था!

बिल्लू-
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लड़कों को बिल्लू का अंदाज बेहद भाता था! उसके बालों के चलते किसी ने बिल्लू की आखों को नहीं देखा लेकिन बिल्लू की टोली जो मौज-मस्ती करती थी, उसे पढ़कर लड़के बेहद खुश होते थे. बिल्लू को क्रिकेट खेलना बेहद पसंद था। बिल्लू के मज़ेदार करनामों को पढ़ने के लिए बच्चे अपनी स्कूल की किताबों में बिल्लू की कॉमिक्स छुपा कर पढ़ा करते थे. कहीं आप भी उनमें से तो नहीं?

श्रीमती जी-

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प्राण ने ‘श्रीमती जी’ जैसी शानदार किरदार को भी गढ़ा है. इसे पढ़ने के लिए लोग बेहद बेताब रहा करते थे. इस पात्र की श्रीमती तंबोला, आलू का भाव, बरखुद्दार, ब्रेकफ़ास्ट, केल्शियम और चैनल सात जैसे शीषर्क वाली कई कहानियां लोगों को बेहद पसंद आईं थी।

चाचा चौधरी, बिल्लू और पिंकी-

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90 के दशक में प्राण द्वारा रचे गए कॉमिक्स के पात्र सबसे ज़्यादा लोकप्रिय थे. ये सभी किरदार हम सभी के बचपन का एक अभिन्न हिस्सा थे! अगर आपने इन सभी कॉमिक्स को पढ़ा है तो आपके पास इन कॉमिक्स पर बने वीडियो का कलेकशन तो होना ही चाहिए।

चंपक-

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देश में इस कॉमिक को सबसे ज़्यादा बच्चे पढ़ते हैं, चंपक दिल्ली से 8 भाषाओं में प्रकाशित होती है। इसमें मज़ेदार कहानियों के साथ-साथ चुटकले, पज़ल्स और कई मनोरजंन की चीज़ें होती है, जो बच्चों को अपनी ओर आकर्षित करती है। चंपक का पहला संस्करण 1968 में प्रकाशित हुआ था।

जंगल बुक-

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मोगली एक ऐसा किरदार है, जिसे हर उम्र के लोग जानते हैं. इसी जंगल बुक में “Rikki-Tikki-Tavi” और “Toomai of the Elephants” जैसी कई शानदार कहानियां है. जिन्होंने बच्चों का मनोरंजन करने के साथ-साथ उन्हें नैतिकता की शिक्षा भी दी है।

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