इंफोसिस के संस्थापक मूर्ति बोले- अच्छे लोग भी कर जाते हैं गलतियां 

Anuj Shukla

Publish: Feb, 13 2017 01:48:00 (IST)

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इंफोसिस के संस्थापक मूर्ति बोले- अच्छे लोग भी कर जाते हैं गलतियां 

इंफोसिस के संस्थापक एनआर नारायण मूर्ति ने इस बात को खारिज कर दिया कि वो कंपनी छोड़ने पर दो पूर्व अधिकारियों को भारी-भरकम रकम दिए जाने से जुड़ी आपत्तियां वापस ले रहे हैं। 

बंगलुरू. इंफोसिस के संस्थापक एनआर नारायण मूर्ति ने इस बात को खारिज कर दिया कि वो कंपनी छोड़ने पर दो पूर्व अधिकारियों को भारी-भरकम रकम दिए जाने से जुड़ी आपत्तियां वापस ले रहे हैं। इंफोसिस बोर्ड को लेकर एनडीटीवी से एक बातचीत में उन्होंने कहा,  कभी-कभी अच्छे लोग भी गलतियां कर जाते हैं। हालांकि सोमवार को मूर्ति थोड़ा नरम दिखाई दिए। सोमवार को उन्होंने कहा, "इंफोसिस बोर्ड को लेकर मैंने अपनी चिंताएं वापस नहीं ली हैं।"

2 बड़ी बातें जो मूर्ति ने कहा 

#1. मूर्ति के मुताबिक उनके द्वारा उठाए मुद्दों और चिंताओं का बोर्ड की ओर उचित समाधान किया जाना चाहिए। पारदर्शिता बरती जानी चाहिए और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह बनना होगा। एक निदेशक के सकारात्मक ट्वीट्स उत्साहवर्धक हैं।

#2. मूर्ति ने कहा, "सभी अच्छे लोग हैं, लेकिन अच्छे लोग भी कभी-कभार गलती करते हैं। यह भी ऐसा ही है। सभी शेयरहोल्डरों की बातें सुनकर फिर सही फैसला लेना चाहिए। उम्मीद है कि वे कंपनी के बेहतर भविष्य के लिए सही फैसला लेंगे।"

सिक्का ने कहा, मूर्ति के साथ मेरे रिश्ते बेहद आत्मीय 

कंपनी सीईओ वि‍शाल सि‍क्‍का ने "ग्‍लोबल इन्‍वेस्‍टर्स" की मीटिंग में कहा, 'मूर्ति‍ के साथ मेरा बहुत नजदीकी और दि‍ल का रि‍श्‍ता है।' सिक्का ने पूरे मामले में मीडिया रिपोर्टिंग को ध्यान भटकाने वाला करार दिया। उन्होंने कहा, पिछले दो साल से कंपनी का परफोर्मेंस बेहतर हुआ है। बदलाव का असर भी नजर आ रहा है। पिछले कुछ महीनों में हुई प्रक्रियाओं ने कंपनी की आतंरिक प्रक्रिया को आसान किया है। 

इंटरव्यू में बोर्ड पर मूर्ति ने उठाया था सवाल 

पिछले हफ्ते इकोनॉमिक्स टाइम्स के साथ एक इंटरव्यू में मूर्ति ने इंफोसिस बोर्ड पर कई सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था, "सभी फैसलों के लिए बोर्ड सामूहिक रूप से जिम्मेदार होता है, पर हमें यह मत भूलना चाहिए कि सीनियर मैनेजमेंट कॉम्पेंसेशन और सेवरंस पे के लिए एक स्पेशल कमेटी नजर रखती है। इसलिए यह आरएनसी की जिम्मेदारी है कि वह गंभीर विश्लेषण करे और इसके प्रमुख की जिम्मेदारी है कि वह बोर्ड को इसकी जानकारी दें। फिर बोर्ड के प्रमुख को आरएनसी के फैसले की समीक्षा करने और खामियां पाए जाने पर सलाह देने की जिम्मेदारी है। अगर ऐसा नहीं होता है तो बोर्ड के चेयरमैन को सुनिश्चित करना चाहिए कि आरएनसी के चेयरमैन प्रजेंटेशन दें, जिसके बाद विचार-विमर्श हो। मूर्ति ने यह भी कहा था, इस तरह, प्राथमिक जिम्मेदारी सिर्फ आरएनसी प्रमुख और बोर्ड प्रमुख की है। उन्हें जिम्मेदारी स्वीकार कर प्रायश्चित करना चाहिए।"

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