Earth Day Special:  उल्टा छाता बना पर्यावरण के लिए वरदान, जानिए कैसे करता है काम

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Earth Day Special:  उल्टा छाता बना पर्यावरण के लिए वरदान, जानिए कैसे करता है काम

अब तक आपने छाते का उपयोग सिर्फ बरसात और तेज धूप से बचने के लिए ही किया होगा, लेकिन ग्रीन टेक्नोलॉजी स्टार्टअप के को फाउंडर समित चौकसे और उनकी पत्नी प्रिया ने उल्टे छाते का निर्माण किया है। अपने इस इनोवेटिव आइडिया के दम पर इन दोनों न सिर्फ पर्यावरण को फायदा पहुंचा रहे हैं, बल्कि उन्होंने इसको लेकर खुद का स्टार्टअप भी शुरू किया है। 

मो. इफ्तेखार अहमद,
नई दिल्ली. अब तक आपने छाते का उपयोग सिर्फ बरसात और तेज धूप से बचने के लिए ही किया होगा, लेकिन ग्रीन टेक्नोलॉजी स्टार्टअप के को फाउंडर समित चौकसे और उनकी पत्नी प्रिया ने उल्टे छाते का निर्माण किया है। अपने इस इनोवेटिव आइडिया के दम पर इन दोनों न सिर्फ पर्यावरण को फायदा पहुंचा रहे हैं, बल्कि उन्होंने इसको लेकर खुद का स्टार्टअप भी शुरू किया है। दरअसल, उनका यह उल्टा छाता एस साथ तीम काम करता है। यह पार्क व ओपन रेस्टोरेंट आदि में एक ओर छांव प्रदान करता है। वहीं, यह बरसात के पानी को संजो कर उसे पीने के पानी में बदल देता है। इसके साथ ही यह बिजली भी पैदा करता है। उनका यह आविष्कार पर्यावरण को बचाने के साथ ही उनके आजिविका का साधन भी बन गया है। इस इनोवेशन को लोगों ने खूब सराहा है, क्योंकि इस इनोवेशन ने पर्यावरण को साफ रखने में काफी मदद की है।

एक यूनिट 1.5 किलोवॉट तक बनाता है बिजली
समित के अनुसार उल्टा छाता की एक यूनिट आठ से दस लाख क्विंटल पानी को कैप्चर करता है। वहीं, 1.5 किलोवॉट तक एनर्जी उत्पन्न करता है। उल्टा छाता की यूनिट देश भर में 50 से ज्दा स्थानों पर है। इसे लगवाने में मात्र 4 से 5 लाख का खर्च आता है। साथ ही इसकी दस साल की वारंटी भी होती है, लेकिन इसे लगवाने के एक साल के अंदर ही इसकी कीमत वसूल हो जाती हैं। बताया जाता है कि उल्टा छाता को लगवाने के लिए इंडियन रेल्वे की टीम भी समित से मिली थी। इंडियन रेल्वे ने भी इसकी सराहना की थी।

उल्टा छाता ऐसे करता है काम
उल्टा छाता में पानी फिल्टर करने के लिए एक्टिव कार्बन फिल्टर टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है। यह तकनीक पानी में उपस्थिति अशुद्धियों को निकालकर उसे पीने योग्य बनाता है। बारिश के दिनों में इससे पानी को स्टोर और फिल्टर करने के उपयोग किया जाता है। वहीं, गर्मियों के दिनों में इसमें लगे सोलर पैनल की मदद से इससे बिजली बनाई जाती है। 

उल्टा छाता की ये हैं खूबियां
1.  उल्टा छाता की प्रत्येक युनिट में बरसात के मौसम में एक लाख लिटर तक पानी जमा करने की छमता है। 
2.  इस में लाइटिंग सिस्टम भी लगा हुआ है, जो सौर्य ऊर्जा से जलता है। यह कई तरह की पार्टियों और रेस्टोरेंट व पार्क के लिए लाइटिंग के काम में आती है। इस में मोबाइल चार्जर भी लगा हुआ है। 
3.  इस में लगे सोलर सिस्टम से एक दिन चार्ज होने के बाद इस में लगए लाइट को 5 दिनों तक जलाया जा सकता है।  
4.  इस में लगे एक्टिवेटेड कार्बन फिल्टर पीने योग्य पानी भी मुहैया कराता है।
5. उल्टा छाता को स्थापित करना भी आसान है। इसके प्रत्येक युनिट को स्थापित करने में मात्र एक वर्ग मिटर जगह की जरूरत होती है। इसके 10 या इससे ज्यादा युनिट को एक साथ लगाया जा सकता है। 
6.  यह प्रोजेक्ट पार्क, ओपन रेस्टोरेंट, स्कूल-कॉलेज या उद्योगों के ग्राउंड में भी स्थापित किया जा सकता है। इसे स्मार्ट शहरों के लिए आइडियल माना जा रहा है। 

पावर कपल के बारे में महत्व पूर्ण जानकारी
1-थिंकफी स्टार्टअप के को-फाउंडर एक पावर कपल हैं। पत्नी प्रिया चौकसे और पति समित चौकसे मिलकर इस कंपनी को स्थापित किया है।
2-प्रिया चौकसे व्यवसायिक रूप से एक आर्किटेक्ट हैं। उन्होंने अटलांटा के एक बड़े आर्किटेक्ट कंपनी में काम भी किया था।
3-समित चौकसे व्यवसायिक रूप से एक सॉफ्टवेयर आर्क्टिक्ट हैं। उन्होंने भी भारत और सिलिकॉन वैली में  सॉफ्टवेयर      डेवलपर व आर्क्टिक्ट के रूप में कई प्रोजेक्ट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। 
4-दोनों पति पत्नी ने अपना स्टार्टअप शुरू करने के लिए नौकरी छोड़ दी। इसके बाद दोनों ने मिलकर अपना स्टार्टअप शुरू थिंकफी की शुरुआत की। 
5- इस ग्रीन टेक्नोलॉजी स्टार्टअप की स्थापना 2015 में की गई थी। 
6.  कंपनी ने अपने इस अनोखे वाटरहार्वेस्टिंग और अक्षय ऊर्जा यत्र के डिजाइन के लिए कई पेटेंट भी हासिल किए हैं। 
7.  इस स्टार्टअप की शुरुआत कमाई  के साथ ही पर्यावरण को दूषित होने से बचाने और वाटर मैनेजमेंट के लिए किया गया है। 

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