Facebook की हेकड़ीः जिन्हें गोपनीयता नीति से है आपत्ति, वे छोड़ दें Whatsapp

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Facebook की हेकड़ीः जिन्हें गोपनीयता नीति से है आपत्ति, वे छोड़ दें Whatsapp

सुप्रीम कोर्ट में मैसेंजिंग ऐप व्हाट्सऐप की नई गोपनीयता नीति पर सुनवाई के दौरान व्हाट्सऐप की मालिकाना हक वाली कंपनी फेसबुक ने शुक्रवार को कोर्ट में कहा कि जिन्हें कंपनी की गोपनीयता नीति से कोई दिक्कत है, वे व्हाट्सऐप से नाता तोडने के लिए स्वतंत्र हैं। 

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट में मैसेंजिंग ऐप व्हाट्सऐप की नई गोपनीयता नीति पर सुनवाई के दौरान व्हाट्सऐप की मालिकाना हक वाली कंपनी फेसबुक ने शुक्रवार को कोर्ट में कहा कि जिन्हें कंपनी की गोपनीयता नीति से कोई दिक्कत है, वे व्हाट्सऐप से नाता तोडने के लिए स्वतंत्र हैं। दरअसल, वर्ष 2016 में लागू नई गोपनीयता नीति के तहत व्हाट्सऐप, फेसबुक के साथ उपभोक्ताओं का डाटा साझा करता है। इसके खिलाफ याचिकाकर्ता का दावा है कि इससे न सिर्फ उपभोक्ता का ब्योरा, बल्कि उसकी निजी बातचीत भी गलत हाथों में जा सकती है। शीर्ष अदालत ने गत पांच अप्रैल को व्हाट्सऐप प्राइवेसी मामले में सुनवाई के लिए पांच-सदस्यीय संविधान पीठ बनाने का फैसला किया था। अब जम मामले की सुनवाई हुई तो फेसबुक ने अपना अड़ियल रुख दिखाते हुए अपने फैसेल से पीछे हटने से ही इनकार कर दिया है। कंपनी उल्टे उपभाक्ता को ही एक तरह से धमका रही है, कि अगर उसे कंपनी की गोपनीयता नीति से दिक्कत है, वह व्हाट्सऐप छोड़ दें।

कोर्ट में यह कहा कंपनी के वकील ने
व्हाट्सऐप की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता केके वेणुगोपाल ने कहा कि जिस उपभोक्ता को फेसबुक-व्हाट्सऐप की गोपनीयता नीति से दिक्कत है, वह किसी भी वक्त व्हाट्सऐप से अलग होने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं। वेणुगोपाल ने कहा कि हमने अपने उपभोक्ताओं को पूरी आजादी दी है कि वे किसी भी समय व्हाट्सऐप और फेसबुक दोनों ही प्लेटफॉर्म छोड़ सकते हैं। गौरतलब है कि फेसबुक ने साल 2014 में व्हाट्सऐप को खरीदा था। 

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