बिहार में सूर्योपासना का महापर्व चैती छठ शुरू, लाखों श्रद्धालुओं ने किया स्नान

Sunil Sharma

Publish: Apr, 01 2017 01:01:00 (IST)

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बिहार में सूर्योपासना का महापर्व चैती छठ शुरू, लाखों श्रद्धालुओं ने किया स्नान

सूर्योपासना के महापर्व का पहला दिन आज नहाय खाय व्रत से शुरू हुआ

बिहार में लोकआस्था के चार दिवसीय महापर्व चैती छठ के शुरू होने पर राजधानी पटना समेत राज्य के विभिन्न इलाकों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पवित्र गंगा नदी समेत अन्य नदियों और तालाबों में स्नान किया। सूर्योपासना के महापर्व का पहला दिन आज नहाय खाय व्रत से शुरू हुआ और श्रद्धालुओं ने नदियों और तालाबों में स्नान करने के बाद शुद्ध घी में बना अरवा भोजन ग्रहण किया।

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गंगा नदी में आज सुबह स्नान करने के बाद बड़ी संख्या में लोग गंगाजल लेकर अपने घर लौटे और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर पूजा की तैयारी में जुट गए। महापर्व के दूसरे दिन कल श्रद्धालु दिन भर बिना जलग्रहण किए उपवास रखने के बाद सूर्यास्त होने पर पूजा करेगें और उसके बाद दूध और गुड़ से खीर का प्रसाद बनाकर उसे सिर्फ एक बार खाएंगे तथा जब तक चांद नजर आएगा तब तक ही जल ग्रहण कर सकेंगे। उसके बाद से उनका करीब 36 घंटे का निराहार व्रत शुरू हो जायेगा।

तीसरे दिन व्रतधारी अस्ताचलगामी सूर्य को नदी और तालाब में खड़ा होकर फल एवं कंद मूल से प्रथम अर्ध्य अर्पित करते हैं। पर्व के चौथे और अंतिम दिन फिर नदियों और तालाबों में व्रतधारी उदीयमान सूर्य को दूसरा अर्ध्य देते हैं। दूसरा अर्ध्य अर्पित करने के बाद ही श्रद्धालुओं का 36 घंटे का निराहार व्रत समाप्त होता है और वे अन्न ग्रहण करते हैं।

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इस बीच बिहार के औरंगाबाद जिले के ऐतिहासिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और पौराणिक स्थल देव में लोकपर्व चैती छठ के अवसर पर लगने वाला प्राचीन छठ मेला भी शुरू हो गया है। लोक मान्यता है कि भगवान भास्कर की नगरी देव में पवित्र छठ व्रत करने एवं इस अवसर पर त्रेतायुगीन सूर्य मंदिर में आराधना करने से सूर्य भगवान के साक्षात दर्शन की रोमांचक अनुभूति होती है और किसी भी मनोकामना की पूर्ति होती है।

इस छठ मेला में अन्य प्रांतों तथा बिहार के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं तथा व्रतधारियों के यहां पहुंचने का सिलसिला शुक्रवार से ही शुरू हो गया है। साम्प्रदायिक सद्भाव की अद्भुत मिसाल चार दिनों के छठ मेले को सभी धर्मों के लोग मिल-जुल कर सफल बनाते हैं और भगवान भास्कर की आराधना करते हैं।

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