पीएससी रिजल्ट: सक्सेस हुए हैं, मंजिलें अभी दूर...

Lalit Saxena

Publish: Apr, 21 2017 11:51:00 (IST)

Ujjain, Madhya Pradesh, India
पीएससी रिजल्ट: सक्सेस हुए हैं, मंजिलें अभी दूर...

निजी क्षेत्र की नौकरी से असंतुष्टि के चलते युवा शासकीय सेवा की तरफ आकर्षित हो रहे हैं, लेकिन अत्यधिक प्रतिस्पर्धा के चलते हर किसी का सपना पूरा होना संभव नहीं है।

उज्जैन. निजी क्षेत्र की नौकरी से असंतुष्टि के चलते युवा शासकीय सेवा की तरफ आकर्षित हो रहे हैं, लेकिन अत्यधिक प्रतिस्पर्धा के चलते हर किसी का सपना पूरा होना संभव नहीं है। अपने लक्ष्य को पाने के लिए एकाग्रता के साथ निरंतर प्रयास की जरूरी है। कुछ एेसा ही किया है उज्जैन के दो विद्यार्थी ओजस्वी काले और कुनाल खेरडि़या ने। 

नौकरी से असंतुष्ट
दोनों ने निजी सेक्टर की नौकरी से असंतुष्ट होने के बाद प्रशासनिक सेवा का रास्ता चुना और तीसरे प्रयास में सफलता हासिल की। एमपी पीएससी की परीक्षा के बाद ओजस्वी नायब तहसीलदार और कुनाल सहायक संचालक लेखा विभाग में पहुंचे हैं। हालांकि यह दोनों अपनी सफलता से अभी खुश नहीं है, क्योंकि इनका लक्ष्य अभी पूरा नहीं हुआ है।

job in possible but competition for success

नकारात्मकता को पास नहीं आने दिया
फ्रीगंज निवासी कुनाल पिता किरिट भाई खेरडि़या (कपड़ा व्यापारी) बीकॉम करने के बाद बिजली विभाग में नौकरी करते थे। विभाग के अधिकारी के काम ने इन्हें प्रभावित किया। इसके बाद इन्होंने पीएससी की तैयारी शुरू की। पहली बार में इंटरव्यू तक पहुंचे, लेकिन चूक गए, लेकिन कुनाल ने नकारात्मकता को पास नहीं आने दिया। फिर से पढ़ाई शुरू की। हालांकि नतीजा पुराना ही रहा। इसके बाद कुनाल ने खामियों को पाइंट कर नए सिरे से तैयारी शुरू की। इसके बाद वे लेखा विभाग में चयनित हो गए। कुनाल 2016 पीएससी में फिर इंटरव्यू के लिए आमंत्रित हैं। 
अगली बार वे अपने लक्ष्य को पाना चाहते हैं।




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स्पीड और यूनिक कंटेट के साथ तैयारी
महानंदानगर निवासी ओजस्वी पिता अजय काले (रेलवे स्टेशन मास्टर) ने बीई इलेक्ट्रॉनिक्स कम्युनिकेशन किया। नौकरी के लिए मुंबई गई, लेकिन निजी सेक्टर की नौकरी से उन्हें संतुष्टि नहीं मिली। उज्जैन लौटकर प्रशासनिक सेवा का रास्ता चुना। पहली बार में इंटरव्यू तक पहुंचीं। हार नहीं मानी। दूसरी बार प्रयास किया, लेकिन फिर निराशा मिली। इसके बाद राइटिंग स्पीड और यूनिक कंटेट जैसी  विशेषता पर काम किया। लगातार प्रसास से मैन के परिणाम में काफी सुधार किया। 2015 में उन्हें नायब तहसीलदार का पद मिला है। अब वह उपजिलाधीश बनाना चाहती हैं।

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