डॉक्टर बनने के सपने में सालवेंसी बॉड का रोड़ा

Lalit Saxena

Publish: Oct, 19 2016 05:29:00 (IST)

Ujjain, Madhya Pradesh, India
डॉक्टर बनने के सपने में सालवेंसी बॉड का रोड़ा

बच्चे को डॉक्टर बनाना है तो सालवेंसी बांड भरो, आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की मनमानी पॉलिसी, 6 लाख से कम वार्षिक आय वाले अभिभावकों से प्रवेश के दौरान अजीब डिमांड। 

उज्जैन. आगर रोड स्थित आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज में दाखिले की अजीब शर्त अभिभावकों के लिए सिरदर्द बन गई है। आवंटित सीट पर प्रवेश लेने जा रहे 6 लाख से कम वार्षिक आय वाले विद्यार्थियों से प्रॉप्रर्टी सालवेंसी बांड मंगाया जा रहा है। यानी बच्चे को डॉक्टर बनाने के लिए आप फीस कैसे चुकाएंगे, इसके लिए प्रॉपर्टी गिरवी रखें। यदि किसी अभिभावक के पास मकान, दुकान या भूमि नहीं है तो वे बच्चे को एमबीबीएस कैसे कराएं। कॉलेज में रोजाना दर्जनों पालकों की इस बात पर नोकझोंक हो रही है, लेकिन प्रबंधन अपनी बात पर अड़ा है, जबकि मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के प्रावधानों में ऐसा कहीं नहीं है। 

एडमिशन प्रक्रिया में प्रबंधन की मनमानी
नीट के जरिए एमबीबीएस में प्रवेशित बच्चों की एडमिशन प्रक्रिया में प्रबंधन की मनमानी कई दिनों से जारी है। बुधवार को भी दर्जनों अभिभावक व विद्यार्थी इस समस्या को लेकर पहुंचे, लेकिन बात नहीं बनी। प्रबंधन अड़ा हुआ है कि किसी भी संपत्ति को रहन कर बांड देना होगा तभी क्लास में बैठने की अनुमति मिलेगी। नवप्रवेशित करीब 50 विद्यार्थी बांड की अनिवार्यता को लेकर परेशान हैं।




3 साल केे पोस्ट डेटेड चेक भी लिए
एमबीबीएस में प्रत्येक साल की फीस 5.72 लाख रुपए तय है। पहले साल की एडवांस फीस जमा कराने के साथ अभिभावकों से इतनी राशि के 3 सालों के पोस्ट डेटेड चैक भी प्रबंधन ने रखवा लिए। बावजूद सालवेंसी बॉन्ड भरने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। मध्यमवर्गीय पालक इसी मनमानी से आहत है। उनका कहना है कि जब चैक दे दिए तो फिर प्रॉपर्टी रहन क्यों रखें। 

फीस विनियामक कमेटी को शिकायत 
कुछ पालकों ने मामले में प्रवेश एवं फीस विनियामक कमेटी भोपाल के चेयरमैन डॉ. टीआर थापक से इसकी शिकायत की, जिसमें बताया कि एमसीआई या चिकित्सा शिक्षा विभाग के किसी भी नियम में सालवेंसी बांड देने का प्रावधान नहीं है, लेकिन आरडी गार्डी प्रबंधन मनमानी पर उतारू है। मामले में अब कॉलेज प्रबंधन से जवाब तलब होगा। 

ऐसे समझें सालवेंसी बांड, ऋण का भरोसा  
सालवेंसी बांड तहसीलदार कार्यालय के जरिए बनता है। जिसमें शपथ ग्रहिता किसी दूसरे पक्ष के फेवर में यह बांड देता है कि यदि मैं निर्धारित शुल्क नहीं चुका सका तो मेरी द्वारा रहन की जा रही प्रॉप्रर्टी को सीज कर उसे चुका दिया जाए। कॉलेज प्रबंधन का मानना है कि मीडिल क्लास वाले अभिभावक फीस नहीं चुका पाएं तो क्या होगा। इधर कई अभिभावकों ने आवेदन पत्र देकर कहा कि वे बैंक से ऋण लेकर कॉलेज की फीस समय पर चुका देंगे, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही। 

" फीस के एवज में सालवेंसी बांड लेने का कोई प्रावधान नहीं है। पोर्टल पर शिकायत आई है। परीक्षण कर संबंधित कॉलेज प्रबंधन से जवाब तलब करेंगे।" 
- डॉ. टीआर थापक, चेयरमैन, प्रवेश एवं फीस विनियामक कमेटी, भोपाल

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