तू मेरी पतंग, मैं तेरी डोर...आसमान सतरंगी, तो छतें हुई गुलजार

Ujjain, Madhya Pradesh, India
 तू मेरी पतंग, मैं तेरी डोर...आसमान सतरंगी, तो छतें हुई गुलजार

मकर संक्रांति पर आसमान सतरंगी था, तो घरों की छत गुलजार। पति-पत्नी ने इस दिन को इंजॉय किया। इन्हें देखकर सहज यह लग रहा था, मानों दोनों एक-दूसरे से कह रहे हों कि तू मेरी पतंग बन जा और मैं तेरी डोर हो जाऊं...।

उज्जैन. मकर संक्रांति पर जहां आसमान सतरंगी था, तो घरों की छत गुलजार। पति-पत्नी ने इस दिन को खूब इंजॉय किया। इन्हें देखकर सहज यह लग रहा था, मानों दोनों एक-दूसरे से कह रहे हों कि तू मेरी पतंग बन जा और मैं तेरी डोर हो जाऊं...। तेज ठंडी हवा और गुनगुनी धूप में दिनभर पतंगबाजी का दौर चलता रहा। लोगों ने सारा काम छोड़कर संक्रांति पर्व पर आसमान में पैंतरेबाजी की। 

हवा ने बिगाड़े मंसूबे
पतंगबाजों के मंसूबों पर तेज हवा ने पानी फेर दिया। सुबह से ही हवा ने जो रफ्तार पकड़ी कि शाम तक नहीं थमी। ऐसे में पतंगबाजी के शौकीनों को आसमान में अपनी कलाबाजी दिखाने के लिए अधिक मेहनत करना पड़ी। फिर भी पतंगबाज आखिर कहां रुकने वाले थे। उन्होंने भी छतों पर डेरा जमाए रखा और हवा का डटकर मुकाबला किया। 


छतों पर सुबह से ही मचा रहा धमाल
घरों की छतों पर सुबह से ही परिवार, दोस्त और सहेलियों ने धमाल मचाना शुरू कर दिया। हर तरफ काटा है... का ही शोर था। लोगों ने पतंगबाजी के साथ डीजे पर नाच-गाना भी किया। साथ ही तिल-गुड़ के विभिन्न व्यंजनों की बहार भी छायी रही। तेज हवाओं के बीच दिन की गुनगुनी धूप में लोग धूम मचाते नजर आए। 

गलियों में धमाचौकड़ी
पतंग कटी नहीं कि उसे लूटने वालों की टोली तैयार खड़ी थी। छोटे बच्चों ने डंडे और उस पर सूखी झाडिय़ां बांध रखी थीं। जैसे ही पतंग कटकर गली में गिरने को होती, वे दौड़कर उसे लूटने, झपटने में लग जाते। या तो पतंग सही सलामत लूट ली जाती या फिर वह फट जाती। इस तरह दिनभर गलियों में धमाचौकड़ी मचती रही। 




the day goes on kite flying


छुट्टी का लिया भरपूर मजा
तेज ठंड और शीतलहर के कारण शनिवार को स्कूलों में अवकाश रखा गया। शुक्रवार देर शाम कलेक्टर ने इसकी घोषणा की थी। शनिवार का सारा दिन लोगों ने इंजॉय किया। लोगों ने सारा दिन परिवारजन के साथ बिताया। संक्रांति पर्व पर एक-दूसरे के घर जाकर बधाईयां दीं।

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