सफल हुआ बीजेपी का यह कार्ड तो कांग्रेस की तरह वर्षों कर सकती राज

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सफल हुआ बीजेपी का यह कार्ड तो कांग्रेस की तरह वर्षों कर सकती राज

इसी तरकीब से बीजेपी को देश व यूपी की सत्ता मिली है, जानिए क्या है कहानी

Devesh Singh


वाराणसी. बीजेपी ने एक सफल कार्ड खेल कर देश व यूपी की सत्ता पर कब्जा जमाया हुआ है। बीजेपी इसी कार्ड को मजबूत करने में लगी है यदि पार्टी ऐसा करने में सफल हो जाती है तो देश की सत्ता पर कांग्रेस की तरह वर्षों राज करने लगेगी।


बीजेपी को हमेशा से ही शहर की पार्टी माना जाता था। शहर में होने वाले नगर निगम चुनाव में बीजेपी जीत तो जाती थी, लेकिन गांव में होने वाले ग्राम प्रधान के चुनाव में बीजेपी का जीतना कठिन होता था। इसकी मुख्य वजह जातिगत वोटर आंकड़ा था। बीजेपी के पास पिछड़े व दलित वर्ग का ऐसा बड़ा नेता नहीं था जो इस वर्ग के वोटरों को अपनी तरफ कर सके। आमतौर पर बीजेपी को सवर्णों की पार्टी माना जाता था इसलिए बीजेपी पहले संसदीय चुनाव में पूर्ण बहुमत नहीं पायी थी, लेकिन वर्ष 2014 के संसदीय चुनाव ने बीजेपी की राजनीति ही बदल दी। गुजरात के तत्कालीन सीएम व पिछड़ा वर्ग के नरेन्द्र मोदी को बीजेपी ने पीएम प्रत्याशी बनाया। नरेन्द्र मोदी का जादू चला और पिछड़ों के साथ दलित वर्ग के वोटरों ने भी बीजेपी का साथ दिया। इसके चलते पहली बार बीजेपी ने गांव में भी जीत दर्ज करते हुए संसदीय चुनाव में पहली बार पूर्ण बहुमत प्राप्त किया। इसके बाद से ही बीजेपी की रणनीति बदल गयी है। उज्जवला योजना के जरिए बीजेपी ने सबसे अधिक पिछड़ा व दलित वर्ग की महिलाओं में अपनी पैठ बनायी। इसके बाद अपना दल व सुभासपा जैसे स्थानीय दलों के साथ गठबंधन करके यूपी चुनाव लड़ा। बीजेपी को सवर्ण, पिछड़ा व दलित वर्ग का अच्छा वोट मिला और यूपी में प्रचंड बहुमत के साथ सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार बनी।


बीजेपी ने भविष्य के लिए बनायी यह रणनीति
बीजेपी ने अब दलित वर्ग के रामनाथ कोविंद को प्रत्याशी बना कर अपना दलित बैंक मजबूत करने का प्रयास किया है। बीजेपी ने सभी को संदेश दे दिया है कि पीएम पिछड़ा वर्ग से व राष्ट्रपति दलित वर्ग से बनेगा। ऐसे में पिछड़े व दलित वर्ग में बीजेपी की पकड़ और मजबूत हो सकती है। यूपी की बात की जाये तो यहां पर पिछड़े वर्ग के वोटर सपा व दलित वर्ग बसपा से जुड़ता था। अखिलेश यादव पर जातिवाद करने का ऐसा आरोप लगा कि यादव छोड़ कर पिछड़ा वर्ग की अन्य जातियां अब बीजेपी से जुड़ गयी। यही कहानी बसपा सुप्रीमो मायावती के साथ हुई। दलित वर्ग में जाटव वोटरों को छोड़ कर अन्य वर्ग के लोग बीजेपी से जुड़ते गये। बीजेपी की निगाहे अभी से संसदीय चुनाव 2019 पर टिकी है और पार्टी ने इसकी तैयारी भी शुरू कर दी है। बीजेपी को मुस्लिम वोटरों का साथ नहीं मिलता था, लेकिन पार्टी ने तीन तलाक का ऐसा दांव खेल दिया है कि अब भविष्य में महिला मुस्लिम वोटरों का साथ बीजेपी को मिलने की संभावना हो गयी है। बीजेपी मुस्लिम महिलाओं के साथ पिछड़े व दलित वर्ग के वोटरों को सहेज कर रखने में कामयाब हो जाती है तो आने वाले वर्षों में उसे सत्ता से बाहर करना कठिन हो जायेगा।

कांग्रेस ने इसी मंत्र से वर्षों किया था राज
कांग्रेस इसी मंत्री के सहारे वर्षों तक केन्द्रीय सत्ता पर काबिज रही। कांग्रेस को सवर्ण, मुस्लिम, पिछड़े व दलित वर्ग का वोट मिलता था इसलिए कांग्रेस को हराना संभव नहीं हुआ। देश के पूर्व पीएम स्वर्गीय विश्वनाथ प्रताप सिंह ने 90 के दशक में आरक्षण का दांव खेला था इसके बाद देश में अगड़े, पिछड़े व दलित वर्ग की खाई चौड़ी हुई है। इसी खाई ने लालू यादव, नीतीश कुमार, मायावती जैसे स्थानीय नेताओं का जन्म हुआ है। कांग्रेस से वोटरों का बड़ा तबका निकल गया और यहीं से कांग्रेस के कमजोर होने का सिलसिला शुरू हुआ था जो आज तक जारी है। बीजेपी ने कांग्रेस व क्षेत्रीय दल से दूर हुए वोटरों का साध कर खुद को सबसे स्वर्णिम युग में पहुंचा दिया है।

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