कभी स्कूल न जाने के लिए बनाता था सौ बहाने, अब छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग में लहराया परचम

Varanasi, Uttar Pradesh, India
कभी स्कूल न जाने के लिए बनाता था सौ बहाने, अब छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग में लहराया परचम

गांव में मन रहा जश्न, किसान पिता की खुशी का ठिकाना नहीं. इनकी पत्नी भी हैं प्रवक्ता।

 वाराणसी/चोलापुर. क्षेत्र के इमिलिया गांव में एक खपरैल के मकान में पूरा जीवन बिताने वाले ज्ञानेंद्र  कुमार सिंह ने छत्तीसगढ़ पीसीएस सहप्राध्यापक परीक्षा में टॉप कर गांव ही नहीं पूरे जिले का नाम रोशन किया है। एक साधारण किसान परिवार में जन्में, नटखट ज्ञानेंद्र ने इमलिया गांव के प्राथमिक विद्यालय से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की। गांव वाले बताते हैं कि बचपन में वह स्कूल जाने से कतराते थे। अनेकानेक बहाने खोज लेते थे स्कूल से छुट्टी मारने के लिए। लेकिन अब वह खुद अध्यापक बन गए हैं।


नवोदय विद्यालय में शिक्षक के पद पर तैनात ज्ञानेंद्र कुमार सिंह की पत्नी भावना सिंह गाजियाबाद स्थित मोदी इंटर कॉलेज में लेक्चरर हैं। ज्ञानेंद्र दो भाई एक बहन में सबसे बड़े हैं। पिता रामाश्रय सिंह पेशे से किसान है। बचपन में ज्ञानेंद्र का घरेलू नाम टिंचू था नाम के अनुरूप इनका बचपन शरारतपूर्ण रहा। विद्यालय न जाने के नित्य नए बहाने ढूंढने के लिए यह पूरे गांव में चर्चित थे। शुरुआती दौर में पढ़ने लिखने इसे पूरी तरह से दूरी बनाने वाले ज्ञानेंद्र का आज छत्तीसगढ़ राज्य में टाप करना पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।



प्रारंभिक शिक्षा के दौरान यह अपने पिता से कहते थे कि हम खेतीबारी कर लेंगे, ट्रैक्टर चला लेंगे लेकिन विद्यालय नहीं जाएंगे। पूरा परिवार ज्ञानेंद्र की इस हरकत से परेशान था। गांव के एक ट्यूशन पढ़ाने वाले शिक्षक अजय सिंह ने उन्हें प्रोत्साहित किया। प्रारंभिक शिक्षा के दौरान उनके मन में शिक्षा की लालसा एवं अलख जगाई। अजय सिंह ने बताया कि वर्षों पहले की गई सकारात्मक पहल का नतीजा देख उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। 



gyanendra with wife Bhawna






































अध्ययन के दौरान ही ज्ञानेंद्र की मुलाकात भावना से हुई। शुरुआत से ही भावना को यह पसंद करने लगे तीन साल तक चले प्रेम प्रसंग के बाद परिवार के लोगों को उन्होंने अपने दिल की बात बताई। साथ ही किसी तरह परिवार के लोगों को शादी के लिए राजी कर लिया। परिजनों ने हंसी-खुशी इनका विवाह भावना से कर दिया। ज्ञानेंद्र की मानें तो जबसे इनके जीवन में भावना आईं तब से इनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आना शुरु हो गया। पहले इन्हें नवोदय विद्यालय में नौकरी मिली। फिर  अब उन्होंने छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के उक्त परीक्षा में टॉप किया है।


किसान पिता का सर गर्व से हुआ उंचा

आज भी खपरैल के मकान में रहने वाले किसान पिता रामाश्रय सिंह पुत्र की कामयाबी पर फूले नहीं समा रहे हैं। घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। एक समय इनके शरारत से परेशान ग्रामवासी आज अपने गांव के युवा को परचम लहराते देख गौरवान्वित महसूस कर रहें हैं।




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