मानवरहित विमान से अवैध खनन रोकेगी योगी सरकार 

Awesh Tiwary

Publish: Apr, 21 2017 12:44:00 (IST)

Varanasi, Uttar Pradesh, India
मानवरहित विमान से अवैध खनन रोकेगी योगी सरकार 

मानवरहित विमान से अवैध खनन रोकेगी योगी सरकार 

आवेश तिवारी 
वाराणसी।   
उत्तर प्रदेश में अवैध खनन रोकने के लिए योगी सरकार ने मानव रहित विमान का इस्तेमाल किये जाने का निर्णय लिया है।  फिलहाल फौरी तौर पर सोनभद्र के बिल्ली मारकुंडी खनन क्षेत्र में ड्रोन लगाकर समूचे खनन क्षेत्र का सर्वे किया जा रहा है।  ऐसी ही कवायद महोबा ,झांसी और प्रदेश के अन्य जिलों में की जाएगी।  
 सोनभद्र के खनन क्षेत्र में ड्रोन के इस्तेमाल पर जिलाधिकारी सोनभद्र ने कहा है कि ड्रोन की मदद से अवैध खनन रोकने में काफी मदद मिलेगी इसके अलावा समूचे खनन क्षेत्र का भौतिक सत्यापन हो सकेगा।   गौरतलब है कि पूर्व सरकार में अवैध खनन एक बड़ी समस्या रही है,खासतौर से यूपी के सोनभद्र में गिट्टी बालू के अवैध खनन से प्रतिवर्ष करोड़ों के राजस्व की तो क्षति होती ही थी खनन क्षेत्र में आये दिनों बड़ी दुर्घटनाएं घटती रहती थी।   सोनभद्र में गुरूवार को पूरे दिन खनन क्षेत्र में मानव रहित विमान का इस्तेमाल कर वीडियो रिकार्डिंग की गई।   

100 से ज्यादा क्रशरों की बंदी 
 उत्तर प्रदेश में नई सरकार के आने के बाद  खनन माफियाओं पर चौतरफा गाज गिरनी शुरू हो गई है।   ऐसा पहली बार हो रहा है खनन सुरक्षा निदेशालय और प्रशासनिक अधिकारी मिलकर प्रदेश भर के खनन क्षेत्रों में छापेमारी कर रहे हैं।  हांलाकि इस कवायद की वजह से अवैध खनन तो कम हुआ है लेकिन खनन मजदूरों के लिए रोजगार का भयावह संकट पैदा हो गया है।   अकेले सोनभद्र में तक़रीबन पत्थरतोड़वा मजदूर बेकार हुए हैं अकेले सोनभद्र में 50 हजार से ज्यादा मजदूरों पर इसका असर पड़ा है ।  गत एक पखवारे के अंदर प्रदूषण सहित कई मानकों के पालन में दिख रही अनियमितता को लेकर खनन विभाग, क्षेत्रीय प्रदूषण विभाग,राजस्व विभाग,बिजली विभाग,वन विभाग एवं पुलिस विभाग की कार्रवाई में 100 से ज्यादा क्रशर प्लांट बंद हो चुके हैं।प्रशासन द्वारा अवैध खनन कार्य को लेकर केवल व्यवसाइयों पर ही गाज गिराई जा रही है जबकि अवैध खनन का यह ताना बाना प्रशासनिक अधिकारियों और नेताओं की मिलीभगत से ही परवान चढ़ा है।  

 सीबीआई भी कर रही जांच 
उत्तर प्रदेश में खनन घोटाले की जड़ें इतनी गहरी है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कि लगभग 2,500 हेक्टेयर में फैले बिल्ली -मारकुंडी खनन क्षेत्र में जिन खदानों को मंजूरी दी गई उन सभी जगहों पर वन विभाग द्वारा धारा -20 का प्रकाशन नहीं किया गया। भारतीय वन अधिनियम की धारा -20 का मतलब उस भूमि की प्रकृति को निर्धारित करना है कि वो भूमि वन भूमि है या राजस्व की भूमि।यानि कि प्रदेश सरकार के दबाव में वन विभाग ने भी नियम कायदों को ताक पर रखकर बकायदे अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी कर दिए। गौरतलब है कि  सीबीआई ने उत्तर प्रदेश में अवैध खनन के खिलाफ मामला दर्ज़ कर जांच शुरू कर दी है। जिसकी आंच पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति पर भी आ सकती है।सीबीआई ने उत्तर प्रदेश में हुए अवैध खनन के खिलाफ 5 मामले दर्ज कर इसकी प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है। सीबीआई ने  पांच जिलों के अधिकारियों के साथ ही खनन विभाग के कुछ अधिकारियों समेत नेताओं को भी अवैध खनन के मामले में नामजद किया गया है। 

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