आस्था के आगे ठंड हारी, लाखों ने लगायी गंगा में डुबकी

Patrika Varanasi
आस्था के आगे ठंड हारी, लाखों ने लगायी गंगा में डुबकी

काशी के घाटों पर उमड़ा अस्थावानों का हुजूम, जानिए क्या है कहानी

वाराणसी. मकर संक्राति पर आस्था के आगे ठंड भी हार गयी। भीषण ठंड भी लोगों की आस्था नहीं डिगा पायी। शनिवार को काशी के प्रमुख घाट पर भोर से ही भक्तों के आने का तंाता लगा रहा और गंगा में डुबकी लगायी।
काशी में इस समय न्यूनतम तापमान पांच डिग्री सेल्सियस के आस-पास है। बर्फीली हवाओं और गलन ने लोगों का जीन मुश्किल कर दिया है। ठंड से लोगों का जीना बेहाल हो गया है लेकिन जब आस्था की बात आती है तो मौसम की ताकत भी कम हो जाती है। काशी के दशाश्वमेध, अस्सी, शीतला आदि घाटों पर सूर्य के उदय होने से पहले ही भक्तों का हुजूम उमड़ पड़ा था और लोगों ने गंगा में डुबकी लगाने के साथ ही दान भी किया। नहाने का सिलसिला भोर से शुरू हुआ था जो दोपहर बाद तक चलता रहा।
Makar Sankranti 2017





नहाने के बाद लगाया ध्यान फिर किया दान
नहाने के बाद भक्तों ने प्रभु को याद करने के लिए ध्यान लगाया। इसके बाद घाट के पास बैठे जरूरतमंद लोगों को दान भी दिया। पुराने वस्त्र, अनाज आदि चीजों को दान देकर मकर संक्राति का पर्व मनाया गया। 
मकर संक्राति के स्नान की है पौराणिक मान्यता
मकर संक्राति के स्नान की पौराणिक मान्यता है। शास्त्रों के अनुसार मकर संक्राति के दिन गंगा में स्नान करने के बाद दान करने से लोगों को पापों से मुक्ति मिल जाती है। मानव जीवन में आने वाले कष्टों का नाश होता है और जीवन में सुख व समृद्धि मिलती है।



धनु से मकर राशि में पहुंचे सूर्यदेव
सूर्यदेव के धनु राशि से निकल कर मकर में आने पर ही मकर संक्राति मनायी जाती है। इलाहाबाद की तरह काशी में इस त्यौहार का बहुत महत्व होता है। काशी में गंगा स्नान करने के लिए देश व विदेश से भक्त आते हैं।


अब बजेगी शहनाई होंगे शुभ कार्य
मकर संक्राति से खरवास खत्म हो जाता है और 15 जनवरी से शुभ काम होने लगेंगे। 15 से ही वैवाहिक कार्यक्रम भी शुरू हो जायेंगे। खरवास खत्म होने से और भी शुभ कार्य जो नहीं हो सकते थे, ऐसे सभी कार्य अब पूर्ण किये जा सकेंगे।

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