सीएम योगी का आदेश ताक पर, अति प्राचीन देहली विनायक मंदिर व पोखरे पर भू-माफिया की नजर

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सीएम योगी का आदेश ताक पर, अति प्राचीन देहली विनायक मंदिर व पोखरे पर भू-माफिया की नजर

पुजारी लगा चुके हैं उच्चाधिकारी से गुहार, जानिए क्या है काहनी

वाराणसी/रामेश्वर. पीएम नरेन्द्र मोदी यूपी चुनाव प्रचार के समय भू-माफिया पर कार्रवाई करने का वायदा करते हैं और यूपी में सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार बनते ही एंटी भू माफिया सेल का गठन करने का निर्देश जारी करते हैं, जबकि जंसा थानाक्षेत्र के टेकरिया स्थित देहली विनायक मंदिर पर भू-माफियों की नजर पड़ गयी है। मंदिर के पुजारी का आरोप है कि भू-माफियाओं ने मंदिर व पोखरे की जमीन पर कब्जा करना शुरू कर दिया है। इसके खिलाफ जिला प्रशासन के अधिकारियों से शिकायत की गयी थी, लेकिन कुछ कार्रवाई नहीं हुई है। पुजारी अब सीएम योगी से मिल कर भू-माफियों के खिलाफ कार्रवाई व सुरक्षा की मांग करने वाले हैं।
यूपी में शासन भले ही बदल गया है, लेकिन व्यवस्था में बदलाव नहीं हो रहा है। मंदिर के पुजारी रंगनाथ दुबे का आरोप है कि भू-माफिया अब इस जगह को कब्जा करना चाहते हैं। चकबंदी बंदोबस्त से देहली मंदिर को गायब कर दिया गया है। मंदिर से सटे पश्चिम में आरजी नम्बर 130 रकबा 2 एकड़ 33 डेसिबल का पक्का जलाशय है। जिस पर कुछ दबंग कब्जा करने के प्रयास में है। पुजारी ने बताया कि ऐसी मान्यता है कि पंचक्रोशी यात्रा के दौरान भक्त इसी जलाशय में स्नान करके भगवान श्रीगणेश को जल जढ़ाते हैं और मंदिर की परिक्रमा करने के बाद रामेश्वर महादेव के दर्शन के लिए प्रस्थान करते हैं।

Dehli Vinayak Temple

ऐसे हो रहा मंदिर व तालाब की जमीन पर कब्जा
पुजारी के अनुसार तालाब की सीढ़ी ध्वस्त हो चुकी है और पास की खाली जगह पर कुछ लोगों ने मकान बना लिया है। वहां गोहरी पाथने लगे हैं। इसके अतिरिक्त भी भू-माफिया की खाली जमीन पर निगाह है यदि जल्द कार्रवाई नहीं की गयी तो मंदिर व तालाब को बचाना कठिन हो जायेगा।


मंदिर व तालाब का है धार्मिक महत्व
पुजारी रंगनाथ दुबे ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जब भगवान राम काशी की यात्रा पर आये थे तो पश्चिम गेट से प्रवेश करते समय भगवान श्रीणेश से विनय किया था और कहा था कि मैं इस गेट से प्रवेश कर रहा हूं, जिसके आप गवाह है। पुजारी ने बताया कि पूना की रानी सुंदराबाई भी यहां पर आयी थी और जलाशय की खराब व्यवस्था को देख कर उसका नवनिर्माण कराया था। यहां के जल के तर्पण व आचमन करने वाला व्यक्ति पितृ ऋण से मुक्त हो जाता है। पुजारी ने बताया कि इस भूमि पर धर्मशाला, मंदिर व कुंड को बनवाने व अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए जिला प्रशासन से गुहार लगायी गयी थी, लेकिन अभी तक कार्रवाई नहीं हुई है।

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