नगर निगम के महापौर धर्मेन्द्र गहलोत ने साफ किया है कि स्मार्ट सिटी योजना में केवल अजमेर शहर शामिल है। पुष्कर और किशनगढ़ को स्मार्ट सिटी योजना में शामिल नहीं किया गया है।
स्मार्ट सिटी चैलेंज प्रतियोगिता में अजमेर प्रथम 20 स्थानों में शामिल होता है तो केवल अजमेर नगर निगम सीमा में ही स्मार्ट सिटी के तहत विकास कार्य कराए जाएंगे। यदि अजमेर स्मार्ट सिटी में शामिल नहीं भी होता है तो इंडो-यूएस बिजनेस काउंसिल सहित अन्य संस्थाओं ने अजमेर को सहयोग का आश्वासन दिया है।
गहलोत ने बताया कि स्मार्ट सिटी को लेकर भ्रांतियां फैलने से लोगों की आशाएं बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि बिना जानकारी के पहले स्मार्ट सिटी में किशनगढ़ और पुष्कर को शामिल कर और अजमेर विकास प्राधिकरण को नोडल एजेंसी मानते हुए कमेटियां गठन करने का काम शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी की गाइडलाइन में साफ है कि नगर निगम की सीमा से बाहर नहीं जाना है।
उन्होंने बताया कि स्मार्ट सिटी में पटेल मैदान से जेएलएन अस्पताल, सिविल लाइंस, सुभाष उद्यान, गौरव पथ से पुष्कर रोड़ क्षेत्र को शामिल किया है। उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी के लिए अजमेर की मजबूत पैरवी की गई है।
ठेलेवालों को हटाएंगेगहलोत ने कहा कि अजमेर में नो-वेंडर जोन से ठेले वालों को हटाने के लिए अभियान चलेगा। शहर की सफाई व्यवस्था के प्रति निगम प्रशासन गंभीरता से काम कर रहा है। गंदगी की समस्या के समाधान के लिए ही एप 311 को लॉन्च किया है।
तालमेल का अभाव
गहलोत ने माना कि सरकारी महकमों के बीच समन्वय का अभाव है। अभी जो सड़कों की खुदाई की जा रही है वह अंडरग्राउंड विद्युत केबल बिछाने के लिए हो रही है। डिस्कॉम के काम के बाद सड़क की मरम्मत भी तुरंत कराने का प्रयास किया जाएगा।
वैकल्पिक स्टेशन जरूरीगलोत ने कहा कि मदार या दौराई में वैकल्पिक रेलवे स्टेशन बेहद आवश्यक है। इसके अलावा स्टेशन की दूसरी निकासी तोपदड़ा की ओर से किए बिना स्टेशन रोड की यातायात समस्या का समाधान नहीं होगा। राज्य सरकार से इस संबंध में आग्रह किया है कि केन्द्र और राज्य सरकार मिलकर इस समस्या का समाधान करें। उन्होंने बताया कि स्टेशन के अंदर स्थित फुट ओवर ब्रिज को स्टेशन के बाहर के एफओबी से जोडऩे का कार्य जल्द होगा।
250 मीटर की परिधि तय करेंगेमहापौर गहलोत ने कहा कि आनासागर में नो-कंस्ट्रक्शन जोन को एफटीएल तय किया गया है। उन्होंने कहा कि झील से 250 मीटर की परिधि तय करने के लिए राजस्थान उच्च न्यायालय के 2013 और 2015 के निर्णय के आधार पर काम करेंगे। झील की परिधि से ज्यादा क्षेत्र बाधित न हो इसका प्रयास किया जाएगा।