मुलायम सिंह ने फिर खेला बड़ा दांव, इस कारण से दे सकते बीजेपी को समर्थन

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मुलायम सिंह ने फिर खेला बड़ा दांव, इस कारण से दे सकते बीजेपी को समर्थन

राष्ट्रपति पद चुनाव में एनडीए को मिल सकता बड़ा लाभ, जानिए क्या है कहानी

वाराणसी. पूर्व सीएम अखिलेश यादव के परिवार में चल रही कलह आये दिन सतह पर आ जाती है। कभी शिवपाल यादव नये मोर्चे के गठन की बात कहते हैं तो कभी रामगोपाल यादव बयान देते हैं। मुलायम सिंह यादव भी कभी भाई तो कभी बेटे के पक्ष में खड़े दिखते हैं। इसी बीच मुलायम सिंह यादव ने राष्ट्रपति पद चुनाव के लिए बीजेपी को सशर्त समर्थन देने का ऐलान करके सबको चौंका दिया है। 
मुलायम सिंह यादव को जमीनी नेता माना जाता है। एक तरफ अखिलेश यादव यूपी में अपनी खोयी जमीन पाने के लिए महागठबंधन में शामिल होने की तैयारी में है तो दूसरी तरफ मुलायम सिंह यादव लगातार कांग्रेस से गठबंधन का विरोध करते हैं। फिलहाल सपा में मुलायम सिंह यादव की अधिक नहीं चलती है, ऐसे में उनका बयान बीजेपी को कितना लाभ पहुंचा पायेगा। यह तो समय ही बतायेगा।


इस कारण तो मुलायम सिंह यादव ने नहीं दिया समर्थन देने का ऐलान
यूपी में अब सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार है। बीजेपी सरकार ने रिवर फ्रंट वाराणसी के वरुणा कॉरीडोर, कब्रिस्तान के चहारदीवारी निर्माण, एआरटीओ आरएस यादव आदि मामलों की जांच का आदेश दिया है। इन सभी मामलों में सपा नेताओं को दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। यदि आंच की जांच सपा के वरिष्ठ नेताओं तक पहुंची तो फिर पार्टी को राजानीतिक रुप से भी नुकसान उठाना पड़ सकता है। ऐसे में मुलायम सिंह यादव ने बीजेपी को राष्ट्रपति चुनाव में राहत देने का ऐलान करके यूपी में पार्टी को बचाने की कवायद की है।

शिवपाल, मुलायम व नीतीश कुमार ने उठायी है सहयोगी दलों की नींद
पहले शिवपाल यादव फिर मुलायम सिंह यादव और अब नीतीश कुमार ने सहयोगी दलों क नींद उड़ायी है। बीजेपी के विरोधी दल वर्ष 2019 में होने वाले संसदीय चुनाव में महागठबंधन करना चाहते हैं। महागठबंधन की सपा और बसपा को कितनी आवश्यकता है यह अखिलेश यादव व बसपा सुप्रीमो मायावती के एक साथ मंच साझा करने की तैयारी से पता चलता है। ऐसे में मुलायम सिंह यादव का बयान महागठबंधन के लिए परेशानी बन सकता है।




बीजेपी को होगा सबसे अधिक फायदा
मुलायम सिंह यादव के बयान से बीजेपी को सबसे अधिक फायदा मिलता दिख रहा है। राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष की एकजुटता को झटका लगेगा। साथ ही महागठबंधन बनने से पहले ही उसकी कलह भी सतह पर आने लगी है, जिसके चलते जनता में यह संदेश जा रहा है कि बीजेपी को रोकने के लिए बनने वाला महागठबंधन अधिक दिन नहीं चलने वाला है।

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