आखिरकार भारी पड़ गये राज्यमंत्री, सपा जिलाध्यक्ष को गंवानी पड़ी कुर्सी

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आखिरकार भारी पड़ गये राज्यमंत्री, सपा जिलाध्यक्ष को गंवानी पड़ी कुर्सी

नये जिलाध्यक्ष के सामने संगठन की बगावत को रोकने की चुनौती, जानिए क्या है मामला

वाराणसी. सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के कुनबे में मची कलह के बीच अब  पार्टी में परिवर्तन का दौर शुरू हो गया है। सपा में सबसे पहले बगावत पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र काशी से हुई थी। यहां पर सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष सतीश फौजी व राज्यमंत्री सुरेन्द्र सिंह पटेल के बीच की लड़ाई सतह पर आयी थी और दोनों नेताओं के समर्थकों ने सड़क पर एक-दूसरे के खिलाफ प्रदर्शन किया था। सपा के दोनों नेताओं की लड़ाई अब खत्म हो चुकी है और राज्यमंत्री ने अपनी ताकत दिखाते हुए जिलाध्यक्ष को कुर्सी से हटा दिया है।  उनकी जगह सपा के नये जिलाध्यक्ष डा.पीयूष यादव ने कुर्सी संभाल ली है।
काशी में सपा में जबरदस्त मतभेद हैं। यहां पर शिवपुर विधानभा से पार्टी के दो प्रत्याशी अपना चुनाव प्रचार कर रहे हैं। सपा को एक गुट सतीश फौजी को समर्थन देता है तो दूसरा गुट सुरेन्द्र सिंह पटेल के साथ है ऐसे में सतीश फौजी को हटाये जाने से नाराज लोग अब नये जिलाध्यक्ष के लिए मुसीबत का सबब बन सकते हैं। फिलहाल काशी में सपा आपसी खींचातान के चलते कमजोर हो चुकी है और नये जिलाध्यक्ष अपनी पार्टी में कितना जान फूंक सकते हैं यह समय ही बतायेगा।


संसदीय चुनाव में हार के बाद मिली थी कुर्सी
सपा को वर्ष 2014 में हुए संसदीय चुनाव में जबरदस्त हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद सपा के कई नेताओं पर गाज गिरी थी और मुलायम सिंह यादव ने पुराने सपाईयों को महत्व देते हुए सतीश फौजी को जिलाध्यक्ष की कुर्सी सौंपी थी। इसके बाद सीएम अखिलेश यादव व शिवपाल यादव के मतभेद के चलते यूपी चुनाव 2017 के पहले ही सपा की स्थिति खराब होती जा रही है और अब पार्टी में चल रही कलह के बीच सपा के नये जिलाध्यक्ष के सामने चुनौतियों का पहाड़ है।


सपा को सत्ता में फिर से काबित होने के लिए पूर्वांचल जीतना जरूरी
लखनऊ में उसी पार्टी की सरकार बनेगी, जो पूर्वांचल की 127 सीटों पर अच्छा प्रदर्शन करेगी। सपा ने 70 से अधिक सीटों पर चुनाव जीता था इसलिए पहली बार यूपी में सपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी है। पूर्वांचल पर सबसे अधिक पीएम नरेन्द्र मोदी दे रहे हैं और पूर्वांचल के महत्वपूर्ण जिलों में रैली करके अपनी ताकत दिखा रहे है। वाराणसी संसदीय सीट की आठ विधानसभा सीट भी कांग्रेस, सपा, बसपा और बीजेपी के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। चारों दलों के नेता यहां की विधानसभा सीटों से चुनाव जीते हैं, ऐसे में सपा के नये जिलाध्यक्ष को पुरानी सीटों पर फिर से जीत के साथ नयी सीटों पर सपा का परचम फरहाना होगा।

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