तलाक में तबाह औरतों की दुनिया 

Varanasi, Uttar Pradesh, India
तलाक में तबाह औरतों की दुनिया 

-शरियत पर अड़े मर्द तो महिलाओं ने कहा नाकुबुल, मौलानाओं के खिलाफ उठने लगी आवाज 

आवेश तिवारी 
वाराणसी .नई सड़क की नफीसा एक वक्त गाने बेहद अच्छे गाया करती थी ,अब वो गाने नहीं गाती ,उसके हर लफ्ज यूँ लगते हैं मानो मर्सिया पढ़ा जा रहा हो।अपने दुपट्टे के कोने से अपनी आँखों के आंसू पोंछ नफीसा कहती है "भाई , हम मुस्लिमों में अगर किसी औरत का तलाक हो गया और उसे अपने नैहर जाना पड़ा ,तो आप समझ लो वो उसकी  जिंदगी नरक में तब्दील हो जाएगी "। काम से लौटा नफीसा का भाई जब यह देखता है कि वो किसी खबरनवीस से बात कर रही है तो दरवाजा यूँ बंद करता है मानो उसका बस चले तो दरवाजा अपनी बहन और मेरे मुंह पर दे मारेगा। न भाई चाहता है न भाभी की अब वो  घर पर रहे। वो उसकी जिद है जो वो अर्दली बाजार की इस बेहद तंग गली में अपने पिता के द्वारा बनाये गए मकान में रह रही है।  सुबह 5 बजे से निकली नफीसा शाम 7 बजे घर लौटती है। आजकल उसने घरों में खाना बनाने का काम शुरू किया है। कुछ दिनों  तक  कास्मेटिक की दूकान में काम करती रही 4 बच्चे ,तीन बेटियां सभी की उम्र १० साल से भी कम। नफीसा बताती है कि जब उसने पहली बार तलाक कहा था तो मैंने उसे अपनी मोहब्बत का वास्ता दिया था ,बेहद मन्नते की थी ,लेकिन वो नहीं पिघला ,मेरा कुसूर केवल इतना था कि मेरा रंग सांवला था और उसे कोई दूसरी  पसंद आ गई थी। बच्चों को पिता का चेहरा नहीं याद। तलाक के बाद जो रकम मिली उनमे से कुछ बिचौलियों ने खा लिए। अपनी अँगुलियों से जमीन को कुरेदी जा रही नफीसा कहती है" मैं अब कभी निकाह नहीं करुँगी ,लेकिन मैं अभी से यह सोच कर परेशान हूँ अगर मेरी बेटियों के साथ भी ऐसा हुआ तब" ?

शरियत पर संजीदा मर्द 
अर्दली बाजार में पूर्व ओलंपियन स्वर्गीय मोहम्मद शाहिद के घर के आगे कुछ मुस्लिम पुरुष बैठे हुए हैं। मेरे साथ मौजूद कवि दानिश रजा बताते हैं यह लोग धर्म के जानकार है ,मुझे नफीसा की बात याद आती है उसने कहा था कि जिंदगियों का सवाल,मजहब से और कानून से कैसे हल  होगा?इसे तो दिलों को बड़ा करके ही हल किया जा सकता है । अब्दुल हसन रिजवी की पेंट की दूकान है।  मेरे सवालों को सुनते ही वो कहते हैं "बीजेपी और आरएसएस मुस्लिम महिलाओं को भड़का रही है ,रिजवी लगभग ललकारते हुए कहते हैं कि ढूँढ़ कर ला दो आप हमारे मोहल्ले में एक भी तलाकशुदा ,तो हम मान जाए। रिजवी आगे कहते हैं "आपको पता होना चाहिए कि शरियत ने भी तलाक को तभी ठीक  माना है जब बिलकुल साथ रहना संभव नहीं हो पा रहा हो,वो भी तीन बार तलाक कहे जाने के बीच तीन महीने का समय  होना जरुरी है।"बगल में ही बैठा आदमी कह पड़ता है "वो ही  महिलायें शरियत के खिलाफ बोल रही है जिनका मजहब में यकीन नहीं है ,जो नए जमाने की औरतें हैं वो ही ऐसा कर रही है।  "

जेबा का दर्द 
नई सड़क  की जेबा नए जमाने की नहीं है,शायद इसलिए उसके पति ने तलाक दे दिया । जेबा कहती है वो पहले से ही मुझे बुड्ढी कहकर चिढाता था,फिर बीमार क्या पड़ी पति ने तलाक दे दिया,आज सात साल हो गए परिवार वालों ने फिर जिस किसी से उनका निकाह कराने को सोचा उनमे से किसी की  पहले से पत्नी थी तो कोई दो दो औरतों को तलाक दे चुका था।  जेबा लगभग गुस्साते हुए कहती है "हम औरतें हैं ,हम गाय बकरियां नहीं है "। एक स्कूल में टीचर जेबा कहती है पुरुष को बहाने चाहिए होते हैं ऐसा कोई मुस्लिम परिवार नहीं होगा जिसमें किसी न किसी औरत ने अपनी जिंदगी में तलाक का हादसा न झेला होगा। जेबा शरियत के खिलाफ नहीं हैं वो कहती है शरियत के कानून अच्छे हैं लेकिन लोग उसका गलत इस्तेमाल कर रहे हैं।
 
शरियत पर मर्दवादी सोच 
औसानगंज की अंजुम का एक साल पहले ही तलाक हुआ है ,पति बुनकर था उसका कहना था कि हमारी कमाई में हमारा ही पेट नहीं पलता तुम्हारा क्या पालेंगे? शराबखोरी ने अंजुम की पति की कमाई  पर पहले ही डाका डाल रखा था सो उसने पहले अंजुम को दाने दाने को मोहताज कर दिया फिर एक रोज जब वो मायके से लौटी पति रफीक ने बिना सोचे समझे तलाक को अंजाम दे डाला। हैरतअंगेज यह है कि अब रफीक बार बार अंजुम के पास जाता है और करने को कहता है लेकिन अब अंजुम तैयार नहीं है।अंजुम कहती है "कोई फोन पर तलाक देता है तो कोई एसएमएस के जरिए, लेकिन हम औरतों की जिंदगी तो बर्बाद हो जाती है, अब इसे हम बर्दाश्त नहीं कर सकते।अंजुम ही नहीं बनारस की तमाम मुस्लिम महिलाओं से जब हमने बातचीत की सभी तलाक का एक साथ मुखालफत करते नजर आई वही पुरुष शरियत से पीछे हटने को तैयार नहीं था। 

मौलानाओं के खिलाफ भी उठ रही आवाज 
अर्दली बाजार के शोएब रजा कहते हैं "तलाक पढ़े लिखे लोगों में कम होता है यह जाहिलों में ज्यादा हो रहा है जो कर रहे हैं वो देश दुनिया समाज से मतलब नहीं रखते वो कहते हैं, जिस मजहब में माँ का दर्जा सबसे बड़ा बताया गया हो, भला वहां औरतों के साथ खराब सुलूक करने की इजाजत किसी को दी जाएगी? वो खुल कर कहते हैं कि यह सब मौलानाओं का फैलाया रायता है जिसका फायदा बीजेपी अपने वोट बैंक के लिए उठा रही है। रजा सीधे कहते हैं अगर मौलाना घरेलु मामलों में हस्तक्षेप करना बंद कर दे अपने आप तलाक के मामले कम हो जाएंगे।

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