यूपी विधानसभा चुनाव 2017 में सिंबल वाले मतदाताओं की भी होगी परीक्षा

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यूपी विधानसभा चुनाव 2017 में सिंबल वाले मतदाताओं की भी होगी परीक्षा

सपा, कांग्रेस व बसपा ने किया है गठबंधन, जानिए क्या है कहानी

वाराणसी. यूपी विधानसभा चुनाव 2017 में विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों के साथ सिंबल वाले मतदाताओं की भी परीक्षा होगी। आमतौर पर सिंबल वाले मतदाता ग्रामीण क्षेत्र में रहते हैं और सिंबल के आधार पर ही किसी राजनीतिक दल को वोट देते हैं।
प्रत्याशियों के लिए राजनीतिक दलों का सिंबल मायने रखता है। यूपी विधानसभा 2017 में सपा ने कांग्रेस से गठबंधन किया है, जबकि बीजेपी का सुभासपा व अपना दल (सोनेलाल) से गठबंधन है। गठबंधन के तहत राजनीतिक दलों ने सीटों का बंटवारा भी किया है और गुरुवार को अंतिम चरण के चुनाव के लिए नामांकन भी पूरा हो चुका है। प्रत्याशियों को चुनाव प्रचार करने के साथ मतदाताओं को सिंबल की कहानी भी बतानी पड़ रही है।



सिंबल पर ही देते हैं वोट
ग्रामीण क्षेत्रों के बहुत से मतदाता ऐसे हैं, जो राजनीतिक दलों के सिंबल के पहचानते हैं और उसी आधार पर वोट डालते हैं। ऐसे में गठबंधन हो जाने के बाद मतदाताओं के सामने भी संकट खड़ा हो गया है। वाराणसी जिले की बात की जाये तो यहां पर सपा, कांग्रेस व बसपा सभी आठ सीटों पर चुनाव नहीं लड़ रही है। इस मामले में बसपा को कुछ राहत मिली है क्योंकि गठबंधन नहीं होने से सभी आठों सीटों पर उसके प्रत्याशी ही चुनाव लड़ रहे हैं। सपा, कांग्रेस व बीजेपी के समर्थकों को उस समय दिक्कत होगी, जब उनकी विधानसभा में संबंधित पार्टी का सिंबल नहीं मिलेगा। क्योंकि प्रमुख राजनीतिक दलों ने गठबंधन के तहत वह सीट दूसरे दल को दी होगी।



नहीं मिली जानकारी तो हो सकता है नुकसान
मतदाताओं को सही जानकारी नहीं मिलेगी तो संबंधित दलों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। सिंबल देख कर वोट देने वाले लोगों को प्रत्याशी यही समझा रहे हैं कि उनके पसंद के दल से गठबंधन है इसलिए उन्हें ही वोट दिया जाये।


विरोधियों को भी मिला मौका
विरोधी दलों के लोगों को भी मौका मिल गया है। वह मतदाताओं में सिंबल को लेकर भ्रम भी फैला रहे हैं, जिससे उनके विरोधी दल का वोट उन्हें मिल जाये। इस बार गठबंधन के चलते सिंबल को लेकर समस्या हो गयी है। यदि वोटर सिंबल की सही जानकारी मतदाताओं को नहीं दे पायेंगे तो उन्हें नुकसान उठाना भी पड़ सकता है।

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