अफगानिस्तान मुद्दे पर एक साथ चीन, रूस और पाकिस्तान, जानिए भारत पर इसका असर

lalit fulara

Publish: Apr, 03 2017 04:53:00 (IST)

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अफगानिस्तान मुद्दे पर एक साथ चीन, रूस और पाकिस्तान, जानिए भारत पर इसका असर

इस खबर के बाद ये कहना गलत नहीं होगा कि पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय जगत में अलग-थलग करने की भारत की कूटनीति कोशिशें विफल हो जाएगी। 

नई दिल्ली: इस खबर के बाद ये कहना गलत नहीं होगा कि पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय जगत में अलग-थलग करने की भारत की कूटनीति कोशिशें विफल हो जाएगी। क्योंकि बरसों से भारत के साथ बेहतर संबंध अपनाने वाला रूस अब पाकिस्तान की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ा रहा है। युद्धग्रस्त अफगानिस्तान में स्थिरता लाने के उद्देश्य से चीन, पाकिस्तान और रूस एक गठबंधन बनाने के लिए करीब आ रहे हैं जहां तीनों देश आतंकी समूह इस्लामिक स्टेट को एक साझा खतरे के रूप में देखते हैं ।
पाकिस्तान को सावधानी से आगे बढ़ना है
रूसी प्रतिनिधिमंडल के उत्तरी वजीरिस्तान दौरे पर उम्मत अखबार कहता है कि इसका मकसद आतंकवादियों के खिलाफ ऑपरेशन, पाकिस्तान की सैन्य ताकत और रणनीति का जायजा लेना है जो रूस पाकिस्तान रिश्तों में किसी से कम नहीं है। अखबार की नसीहत है कि पाकिस्तान को बेहद सावधानी से आगे बढ़ना है। क्योंकि रूस के साथ उसके रिश्तों में रोड़े अटकाने वालों की कोई कमी नहीं है। च्उम्मतज् ने संपादकीय शीर्षक में लिखा है कि पाकिस्तान को अलग थलग करने की भारत की कोशिशें नाकाम हो जाएगी।
अफगान मुद्दे के लिए गठबंधन
एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार इन आशंकाओं ने अब एक अभूतपूर्व घटनाक्रम में पाकिस्तान, रूस और चीन के बीच एक गठबंधन की संभावना का द्वार खोल दिया है। इसने सेना और विदेश कार्यालय के सूत्रों के हवाले से कहा कि तीनों देश क्षेत्रीय स्थिरता लाने, खासकर अफगान युद्ध का राजनीतिक समाधान ढूंढ़ने के उद्देश्य से गठबंधन बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय दोस्तों ने पाक को अहमियत दी
अखबार ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा के इस बयान पर यह संपादकीय लिखा है कि पाकिस्तान को अलग-थलग करने का प्रोपेगेंडा करने वाले देख लें कि अंतरराष्ट्रीय दोस्तों ने किस तरह पाकिस्तान को इज्जत और अहमियत दी है। अखबार लिखता है कि कुछ समय पहले भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दावा किया था कि वह पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग थलग करके छोड़ेंगे। लेकिन, दुनिया देख रही है कि अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस, चीन और अन्य देशों के सैन्य और राजनीतिक प्रतिनिधिमंडल लगातार पाकिस्तान का दौरा कर रहे हैं।

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