आज इन कार्यों के लिए बन रहा है अच्छा मुहूर्त, आप भी लाभ उठाएं

Sunil Sharma

Publish: May, 19 2017 08:45:00 (IST)

Worship
आज इन कार्यों के लिए बन रहा है अच्छा मुहूर्त, आप भी लाभ उठाएं

अष्टमी जया संज्ञक तिथि सायं 6.11 तक, तदन्तर नवमी रिक्ता संज्ञक तिथि रहेगी

अष्टमी जया संज्ञक तिथि सायं 6.11 तक, तदन्तर नवमी रिक्ता संज्ञक तिथि रहेगी। अष्टमी तिथि में नाचना-गाना, मनोरंजन के अन्य कार्य, रत्नालंकार, विवाह, वधू-प्रवेश, प्रतिष्ठा, वास्तु कर्म, गृहारम्भ, प्रवेश व शस्त्र धारण आदि कार्य सिद्ध होते हैं। नवमी रिक्ता संज्ञक तिथि में शुभ व मांगलिक कार्य वर्जित कहे गए हैं। अभिघातादिक कार्य सिद्ध होते हैं।

नक्षत्र: धनिष्ठा नक्षत्र प्रात: 10.48 तक, इसके बाद शतभिषा नक्षत्र रहेगा। दोनों ही 'चर व ऊध्र्वमुख' संज्ञक नक्षत्र हैं। जिनमें देवप्रतिष्ठा, वास्तु, गृहारम्भ व गृह प्रवेश, यात्रा, सवारी, वाहन क्रय, मशीनरी, कृषि तथा अन्य घरेलू उत्सवादि शुभ कहे गए हैं। धनिष्ठा में कात्यायनोक्त विवाह भी शुभ होता है।

योग: ऐन्द्र नामक नैसर्गिक अशुभ योग रात्रि 8.38 तक, इसके बाद वैधृति नामक अत्यंत दुधर्ष व उपद्रवकारी योग है। वैधृति योग में समस्त शुभ व मांगलिक कार्य सर्वथा वर्जित है। करण: बालव नामकरण प्रात: 5.57 तक, इसके बाद कौलव व तैतिलादि करण हैं।

शुभ विक्रम संवत् : 2074
संवत्सर का नाम : साधारण
शाके संवत् : 1939
हिजरी संवत् : 1438
अयन : उत्तरायण
ऋतु : ग्रीष्म
मास : ज्येष्ठ। पक्ष - कृष्ण।

शुभ मुहूर्त : आज विवाह केतुयुति दोषयुक्त, अशुद्ध, गृहप्रवेश (केतुयुति दोष), हलप्रवहण, वाहन क्रय करना, मशीनरी प्रारंभ, वधू-प्रवेश के धनिष्ठा में, इसके अतिरिक्त शतभिषा में गृहप्रवेश का शुद्ध, गृहारंभ (तिथि त्याज्य), देव प्रतिष्ठा व कूपारम्भ आदि के शुभ मुहूर्त हैं।

श्रेष्ठ चौघडि़ए: आज सूर्योदय से पूर्वाह्न 10.43 तक क्रमश: चर, लाभ व अमृत, दोपहर 12.23 से दोपहर बाद 2.04 तक शुभ तथा सायं 5.25 से सूर्यास्त तक चर के श्रेष्ठ चौघडि़ए हैं एवं दोपहर 11.56 से दोपहर 12.50 तक अभिजित नामक श्रेष्ठ मुहूर्त है, जो शुभकार्यारम्भ के लिए अत्युत्तम हैं।

व्रतोत्सव: आज दादूदयाल पुण्य दिवस, मेला चनानी माताजी, पंचक व त्रिलोकनाथ अष्टमी (बंगाल में) है। दिशाशूल: शुक्रवार को पश्चिम दिशा की यात्रा में दिशाशूल रहता है। चंद्र स्थिति के अनुसार आज पश्चिम दिशा की यात्रा में चंद्रमा सम्मुख होने से यात्रा लाभदायक व शुभप्रद ही रहेगी। चन्द्रमा: चन्द्रमा सम्पूर्ण दिवारात्रि कुम्भ राशि में रहेगा। राहुकाल: प्रात: 10.30 से दोपहर 12.00 तक राहुकाल वेला में शुभकार्यारंभ यथासम्भव वर्जित रखना हितकर है।

आज जन्म लेने वाले बच्चे
आज जन्म लेने वाले बच्चों के नाम (गे, गो, सा, सी, सू, से) आदि अक्षरों पर रखे जा सकते हैं। इन जातकों की जन्म राशि कुम्भ है। अंतरात्रि 5.19 तक जन्मे जातकों का ताम्रपाद से जन्म है। सामान्यत: ये जातक धर्मपरायण, दानी, सत्यप्रिय, धनवान, गुणवान, कामलोलुप, कीर्तिवान, बुद्धिमान, होशियार, शत्रुजित, परंतु व्यसनप्रिय, वाचाल, निडर और ज्योतिषप्रेमी होते हैं। क्रूर ग्रह की महादशा में शनि, केतु व सूर्य का अंतर कष्टप्रद रहता है। कुम्भ राशि वाले जातकों को कुछ शारीरिक कष्ट अचानक आ सकता है। वाहन, अग्नि आदि का प्रयोग सावधानी से करे।

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