गणपति स्रोत के स्मरण मात्र से दूर होती है शनि, राहू, केतु की बाधा, पूरी होती है हर इच्छा भी

Sunil Sharma

Publish: Apr, 05 2017 09:33:00 (IST)

Worship
गणपति स्रोत के स्मरण मात्र से दूर होती है शनि, राहू, केतु की बाधा, पूरी होती है हर इच्छा भी

भगवान गणपति स्रोत की आराधना से बड़े से बड़े कष्ट भी सहजता से दूर हो जाते हैं

भगवान गणपति की आराधना से बड़े से बड़े कष्ट भी सहजता से दूर हो जाते हैं। गणपति स्रोत भी ऐसा ही एक जागृत मंत्र है। इसके जप मात्र से ही सारे बिगड़े काम बन जाते हैं और सभी इच्छाएं पूरी होती हैं।



गणपति स्रोत
सरागिलोकदुर्लभं विरागिलोकपूजितं सुरासुरैर्नमस्कृतं जरापमृत्युनाशकम्।
गिरा गुरुं श्रिया हरिं जयन्ति यत्पदार्चकाः नमामि तं गणाधिपं कृपापयः पयोनिधिम् ॥1॥

गिरीन्द्रजामुखाम्बुज प्रमोददान भास्करं रीन्द्रवक्त्रमानताघसङ्घवारणोद्यतम्।
सरीसृपेश बद्धकुक्षिमाश्रयामि सन्ततं शरीरकान्ति निर्जिताब्जबन्धुबालसन्ततिम् ॥2॥

शुकादिमौनिवन्दितं गकारवाच्यमक्षरं प्रकाममिष्टदायिनं सकामनम्रपङ्क्तये।
चकासतं चतुर्भुजैः विकासिपद्मपूजितं प्रकाशितात्मतत्वकं नमाम्यहं गणाधिपम् ॥3॥

नराधिपत्वदायकं स्वरादिलोकनायकं ज्वरादिरोगवारकं निराकृतासुरव्रजम्।
कराम्बुजोल्लसत्सृणिं विकारशून्यमानसैः हृदासदाविभावितं मुदा नमामि विघ्नपम् ॥4॥

श्रमापनोदनक्षमं समाहितान्तरात्मनां सुमादिभिः सदार्चितं क्षमानिधिं गणाधिपम्।
रमाधवादिपूजितं यमान्तकात्मसम्भवं शमादिषड्गुणप्रदं नमामि तं विभूतये ॥5॥

गणाधिपस्य पञ्चकं नृणामभीष्टदायकं प्रणामपूर्वकं जनाः पठन्ति ये मुदायुताः।
भवन्ति ते विदां पुरः प्रगीतवैभवाजवात् चिरायुषोऽधिकः श्रियस्सुसूनवो न संशयः ॥6॥

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ऐसे करें प्रयोग

सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर भगवान गणेशजी की आराधना करें। तत्पश्चात एकाग्रचित्त होकर उनका ध्यान करते हुए इस मंत्र का 7 या 11 बार जप करें। इस मंत्र के जाप से सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है और दुर्भाग्य का नाश होकर सौभाग्य, यश, धन की प्राप्ति होती है।

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