नोटबंदी: रात भर लइान में लग कर भी नहीं मिल रहा कैश

नोटबंदी: रात भर लइान में लग कर भी नहीं मिल रहा कैश
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sandeep tomar | Publish: Dec, 09 2016 05:49:00 PM (IST) Noida, Uttar Pradesh, India

लोगों ने कहा कि नोटबंदी के बाद नए नोटों की समस्या पैदा हो गई है

नोएडा। बैंक में सैलरी आने के बाद भी लोगों के घरों में कैश नहीं है। यहीं कारण है की नोटबंदी के 30 दिन पूरे होने पर भी एटीएम से लोगों की लाइन खत्म नहीं हुर्इ है। शाम से लेकर देर रात आैर तड़के तक लोग रुपये निकालने के लिए लोग लाइनों में खड़े है। रुपये निकालने को आने वाली इस समस्या को देखते हुए, नोटबंदी को सपोर्ट करने वाले लोगों की सोच बदल गर्इ। पत्रिका के रियेल्टी चेक में रिपोर्ट ने देर रात से लेकर तड़के तक एटीएम का लिया जायजा। एटीएम मशीनों के बाहर लाइनों में खड़े लोगों की जानी राय।

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30 दिन बाद भी कम नहीं हुर्इ एटीएम के बाहर की कतार

नोटबंदी के 30 दिन पूरे होने के बाद पत्रिका ने देर रात नोएडा के सेक्टर-18 स्थित मार्केट में लगे एटीएम मशीनों का जायजा लिया। यहां करीब 20 बैंक आैर 35 से ज्यादा एटीएम मशीने लगी है। रात 12 बजे पत्रिका की टीम सेक्टर-18 पहुंची। यहां देखने पर मिला की ज्यादातर बैंकों के एटीएम बंद पड़े थे। जो एटीएम खुले थे उन पर लोगों की लंबी कतार लगी हुर्इ थी। जेब में रुपये न होने की वजह से ठिठुरती ठंड में खुले आसमान के नीचे लोग खड़े होने के मजबूर दिखार्इ दिये।

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मार्केट में खुले थे पांच एटीएम, लोगों की संख्या करीब 2000

एशिया की सबसे महंगी सेक्टर-18 मार्केटों में 35 में से भी कुल 5 एटीएम मशीने ही खुली मिली। इन पर भी करीब 1500 से 2000 लोग रुपये निकालने के लिए लाइनों में खड़े दिखे। लोग घंटों से लाइन में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे है। यहीं कारण है कि समय के साथ अब लोगों की राय बदलने लगी है। नोटबंदी को सही ठहराने वाले लोग लगातार चल रही। रुपयों की किल्लत आैर घंटो एटीएम की लाइन में खड़े होकर भी रुपया न मिलने पर नोटबंदी को गलत बता रहे हैं।

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डिपॉजिट में मिली राहत, कैश न मिलने के बने हैं आसार

एटीएम के बाहर लाइन में खड़े सेक्टर-४४ निवासी नाजिर अनवर बताते हैं कि आॅफिस की छुट्टी के बाद से ही एटीएम की लाइन में खड़ा हूं। एक महीना हो गया है। इस दौरान डिपॉजिट में राहत मिली है, लेकिन कैश को लेकर समस्या आैर बढ़ गर्इ है। जेब में रुपया नहीं है। कमरे का किराया समेत अन्य कर्इ खर्च हैं। उन्हें पूरा करने के लिए मजबूरन लाइन में खड़ा होना पड़ रहा है। इससे पहले एक दिन रात से खड़े होने पर सुबह चार बजे नंबर आया था। अब भी ठंड के बीच खड़े हुए दो घंटे हो गये है। अभी भी नंबर आने में डेढ़ से दो घंटे का समय लग सकता है। एेसे में डर लगा रहा है कि कहीं नंबर आने से पहले ही रुपया खत्म न हो जाये।

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ड्यूटी खत्म कर घर जाने की जगह एटीएम की लाइन में खड़े हैं लोग

सेक्टर-18 स्थित जम्मू एंड कश्मीर बैंक के एटीएम के बाहर लंबी कतार में खड़े सुभाष चंद्र ने बताया कि वह सिक्योरिटी गार्ड हैं। दस बजे उनकी ड्यूटी खत्म हुर्इ। रुपये न होने की वजह से ड्यूटी खत्म कर घर जाने की जगह वह एटीएम पहुंचे। सुभाष कहते हैं कि घर में रुपये नहीं है। एेसे में खाते से रुपये निकालने के लिए तीन घंटे से लाइन में खड़ा हूं। न जाने कब तक नंबर आ सकेगा।

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नोटबंदी सही लेकिन यह तरीका सही नहीं, भूखे मर रहे हैं लोग

एटीएम की लाइन में खड़े टैक्सी ड्राइवर राजकुमार ने बताया कि वह दिन में ड्यूटी खत्म कर लाइन में खड़े हैं। जेब में खाने तक के रुपये नहीं है। आराम करने की जगह पर लाइन में खड़ा हूं। इसके बाद दोबारा रात दो बजे ड्यूटी है। 30 दिन होने के बाद भी कोर्इ राहत नहीं है। नोटबंदी सही है, लेकिन जब व्यवस्था ही सहीं नहीं है। तो यह गलत है। बैंक में रुपये होने के बावजूद भूखे मरने की नौबत आ गर्इ है।

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नहीं है कोर्इ राहत, गलत है नोटबंदी

सेक्टर-10 निवासी राहुल ने बताया कि 30 दिन बाद भी कोर्इ राहत नहीं है। देर रात ठंड के बीच तीन घंटे खड़े होने के बाद नंबर आया है। मोदी ने अपने हिसाब से सही किया है, लेकिन मेरे हिसाब से यह गलत है। अगर इतनी परेशानियों में लोगों काे डालने के बाद कुछ होता है, तो वह गलत है।

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चार घंटे में आया नंबर, कर्इ दिन बाद मिले रुपए


सेक्टर-15 से सेक्टर-18 में एचडीएफसी के एटीएम से रुपये निकालने पहुंचे। सदगुण ने बताया कि वह रात साढ़े नौ बजे लाइन में लगे थे। तब जाकर साढ़ चार घंटे बाद उनका नंबर आया। सदगुण ने बताया कि इससे पहले भी वह कर्इ बार लाइनों में खड़े होकर वापस जा चुके हैं। नोटबंदी सही है इसका तो पता नहीं है, लेकिन एेसी परेशानियां खड़ी कर नोटबंदी का फैसला किया गया था तो बहुत ही गलत है।
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