यूपी में बने नंबर वन पर लालू और नीतीश से पीछे रह गए सीएम अखिलेश

11 मार्च को सभी दलों के नेताओं की मेहनत का रिजल्‍ट आ जाएगा

नोएडा/नई दिल्‍ली। इस विधानसभा चुनाव का परिणाम आने में अभी चंद दिन ही शेष बचे हैं। 11 मार्च को सभी दलों के नेताओं की मेहनत का रिजल्‍ट आ जाएगा। इसका पीएम से लेकर सीएम तक बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। आखिर ऐसा हो भी क्‍यों न क्‍योंकि पीएम मोदी से लेकर सूबे के मुख्‍यमंत्री अखिलेश यादव तक ने यूपी के चुनाव में अपनी पूरी ताकत झोंक दी।

बात अगर रैलियों की हो तो यूपी चुनाव प्रचार में सबसे ज्‍यादा रैलियां अखिलेश यादव ने की। उन्‍होंने 221 रैलियां करके पीएम मोदी को भी पीछे छोड़ दिया, लेकिन वो बिहार के सीएम नीतीश कुमार और पूर्व मुख्‍यमंत्री लालू यादव से पीछे रह गए। बिहार चुनाव के दौरान लालू प्रसाद यादव ने 242 तो नीतीश कुमार ने 220 रैलियां की थी। इस बार अखिलेश जरूर उनसे पीछ रहे गए लेकिन उनकी यह कोशिश जरूर रही कि वे हर एक सपा उम्मीदवार के चुनावी क्षेत्र में पहुंचें। हालांकि, अंतिम चरण का चुनाव प्रचार थमने तक अपने नाम सबसे ज्यादा रैली करने वाले यूपी के मुख्यमंत्री के तौर पर अपना नाम दर्ज करवा चुके थे। अखिलेश को भी इस बात की जानकारी थी कि यह लड़ाई सिर्फ उस सिद्धांत के लिए है, जिसके कारण उन्हें अपने ही पिता से बगावत करनी पड़ी थी। उन्हें हर हाल में यह साबित करना है कि उन्होंने एक सही और सोचा समझा कदम उठाया।

चुनाव में अपने पक्ष में मोड़ने की हर संभव कोशिश


कम से कम अखिलेश अपने सिर पर पार्टी को तोड़ने या उसे खत्म करने का कलंक नहीं लेना चाहेंगे। यही कारण है कि वे प्रचार में मोदी जैसी शख्सियत के सामने अकेले पड़ने के बावजूद वे कभी रुके नहीं। एक के बाद एक लगातार 221 रैलियां आयोजित कर उन्होंने इस चुनाव को अपने पक्ष में मोड़ने की हर सम्भव कोशिश की। चार जनवरी को चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद से अब तक वे बिना रुके, बिना थके लगातार चल रहे थे और अंतिम चरण के चुनाव प्रचार के सोमवार शाम थमने तक अपने नाम सबसे ज्यादा रैली करने वाले यूपी के मुख्यमंत्री के तौर पर अपना नाम दर्ज करवा चुके थे।

पिता मुलायम भी दो बार बाहर निकले


अखिलेश के लिए यह बात भी अहम रही कि इस पूरे चुनाव अभियान में वे अकेले रहे। पिता मुलायम सिंह सिर्फ दो बार बाहर निकले। एक बार शिवपाल यादव की रैली में जसवंत नगर में प्रचार करने के लिए तो दूसरी बार बहु अपर्णा यादव की लखनऊ कैंट सीट पर प्रचार करने के लिए। शिवपाल यादव तो अपने चुनाव क्षेत्र से बाहर निकले ही नहीं। इससे भी आश्चर्यजनक रहे उनके चाणक्य प्रोफेसर रामगोपाल यादव, जो इस चुनावी अभियान में हमेशा पीछे की सीट पर ही रहे। चुनाव के दौरान ज्यादातर समय वे दिल्ली में जमे रहे। अखिलेश को किसी का साथ भी मिला तो केवल उनकी पत्नी डिंपल यादव का। वे जहां भी गईं अपने पति के लिए अपील करती रहीं। उनको देखने के लिए अच्छी खासी भीड़ जुटी। अब उन्हें कितना समर्थन मिला, यह तो 11 मार्च को ही पता चल पाएगा।



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sharad asthana
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