किसानों के मसीहा चरण सिंह के गुस्से का मतलब था काम पक्का

किसानों के मसीहा चरण सिंह के गुस्से का मतलब था काम पक्का
charan singh

चौधरी चरण सिंह के जन्मदिन पर विशेषः गांववासियों के अनुसार उनके गुस्से में छिपा था प्यार, कभी नहीं रोका किसानों का काम

नोएडा: किसानों के मसीहा कहे जाने वाले देश के पांचवें प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को देश का किसान कभी भी नहीं भूल सकता है। खासकर वो किसान और मजदूर तबका जो उनके पीछे चलकर चुनावों के दौरान उनके लिए कैंपेनिंग करता था। फिर चाहें वो सीएम रहे या पीएम या फिर किसी विभाग में मंत्री किसानों के कामों को पूरी तरह से प्राथमिकता देते थे। किसान भी उनके पास बेधड़क अपने काम लेकर जाते थे और अपनी समस्याओं को सामने रखते। चौधरी चरण सिंह के बारे में कहा जाता है कि जिस भी किसान पर वो गुस्सा हो जाते थे उसका काम जरूर होता था। आखिर क्या है इस बात का राज आइये आपको भी बताते हैं।

आखिर क्यों आता था चौधरी साहब को गुस्सा?

चौधरी चरण सिंह ने छपरौली विधानसभा सीट से हर चुनाव जीता। उन्हें वहां से हराने वाला कोई नहीं था। छपरौली गांव से उनका खास लगाव भी था। ऐसे गांव के लोग उनके परिवार की तरह थे। चौधरी साहब के साथ चलने वाले करीब 85 वर्ष के दौलत राम बताते हैं कि जब भी कोई किसान और मजदूर काम लेकर उनके पास जाता था तो पहले वो उसे खूब डांट लगाते थे। इसके पीछे दौलत राम कारण बताते हैं कि कई बार किसान अपने निजी हित के लिए काम लेकर जाते थे। उनके प्यार और विश्वास का नाजायज फायदा भी उठाने की कोशिश करते थे। इसलिए चौधरी साहब पहले ही डांटकर इशारा कर दिया करते थे कि वो किसी का कोई काम गलत तरीके से नहीं करेंगे। इस कारण कोई उन्हें गलत काम के लिए नहीं कहता था और सही काम को वह जरूर पूरा करते थे।

ऐसे सुलझाते थे मामले

रठौरा गांव के रहने वाले 87 वर्षीय रामपाल सिंह कहते हैं कि वो साफ और कड़े शब्दों में कहा करते थे कि वो ईमानदारी से कभी पीछे नहीं हटेंगे। किसी का भी गलत काम नहीं करेंगे। अगर दो पक्षों का मामला सामने आता था तो वहीं बैठकर दोनों को डांट लगाकर मामले सुलझा दिया करते थे। उनकी डांट में भी ऐसा प्यार था जैसा एक पिता का अपने बच्चों के लिए होता है। उनके सामने हम बच्चे ही थे। जब तक वो रहे तब तक किसी किसान को कोई कष्ट नहीं हुआ। किसानों की लड़ाई में अभी पीछे नहीं हटे। किसानों के लिए जिये और जब तक रहे किसानों के बारे में सोचते हुए दुनिया से विदा हो गए।

सामूहिक काम करते थे

दौलत सिंह ने बताया कि जब भी छपरौली या आसपास के गांव में आते थे तो हम सभी लोग उनके साथ होते थे। उनका न्याय और काम करने का तरीका काफी अलग था। उनमें ऐसा बिल्कुल नहीं था कि अगर वो छपरौली से ज्यादा लगाव था वो उन्होंने यहां पर कुछ स्पेशल किया। वो अपने क्षेत्र का सामूहिक विकास पार जोर देते थे। उनका मानना था कि सभी जगह समान विकास होना चाहिए। सभी दर्द एक जैसा है। सभी परेशानी एक जैसी है। इसलिए भेदभाव नहीं होना चाहिए। जैसा छपरौली है वैसा ही रठौरा और बाकी गांव है। दौलत सिंह के अनुसार ऐसा ही व्यवहार उनका लोगों के साथ भी था। सभी लोगों के साथ समान व्यवहार करते थे। ताकि किसी के अंदर हीन भावना पैदा ना हो।
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