2016: बिसाहड़ा का दोषी कौन?

2016: बिसाहड़ा का दोषी कौन?
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sandeep tomar | Publish: Dec, 28 2016 03:16:00 PM (IST) Noida, Uttar Pradesh, India

2015 में हुआ अखलाक हत्याकांड 2016 में खबरों में बना रहा

नोएडा। 28 सितंबर 2015 को दादरी का एक छोटे सा गांव बिसाहड़ा उबल उठा था। घर में गौ हत्या होने की सूचना पर गांव के युवाआें ने एक परिवार पर हमला कर दिया। इसमें परिवार के मुखिया अखलाक की मौत हो गर्इ थी। वहीं, उनका एक बेटा गंभीर रूप से घायल हो गया था। दो समुदायों के बीच का मामला होने के चलते नेताआें ने भी इस पर खूब रोटियां सेकीं। महीनों बाद यहां शांति तो हुर्इ। प्रथमिक रिपोर्ट में कहा गया कि मांस गौवंश का नहीं मटन था। लेकिन 2016 में मांस की रिपोर्ट आई और साबित हो गया कि वह बीफ ही था।

मामले में मृतक अखलाक के भार्इ की गिरफ्तारी आैर जेल में बंद हत्यारोपी रविन की मौत के बाद बिसाहड़ा में फिर गरमाहट पैदा हो गर्इ। नेताआें का आना जाना शुरू हो गया। गांव में तब से अब तक एक त्यौहार तक नहीं मना। गांव के ज्यादातर परिवार अपने बच्चों को छुड़ाने के लिए कोर्ट के चक्कर काट रहे हैं।

यहां से शुरू हुर्इ थी बिसाहड़ा की रार

दादरी के छोटे से गांव बिसाहड़ा में 28 सितंबर 2015 की शाम को मंदिर से अखलाक के घर में गौवंश कटने का अलाउंसमेंट हुआ। यह सुनते ही गांव के युवाआें ने अखलाक के घर पर हमला बोल दिया। घर में पहुंची भारी भीड़ ने तोड़फोड़ आैर मारपीट की। इसमें अखलाक की मौत हो गर्इ और बेटा दानिश गंभीर रूप से घायल हो गया। कर्इ दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहने के बाद उसे छुट्टी मिली। इस घटना के खुलते ही सभी जगह उबाल सा आ गया। पुलिस ने दो दिन बाद अखलाक की बेटी आैर पत्नी की शिकायत पर गांव के १९ लोगाें को गिरफतार कर लिया।

नेताआें ने भी खूब सेकीं थी रोटियां

बिसाहड़ा कांड के बाद नेताआें ने हिंदू आैर मुस्लिम के नाम पर खूब रोटियां सेकीं। बीजेपी के संगीत सोम से लेकर, कागे्रस उपाध्यक्ष राहुल गांधी, बसपा नेता आैर असदुद्दीन ओवैसी समेत कर्इ बड़े नेता गांव में पहुंचे। सभी ने इसे चुनावी मुद्दा बनाकर एक दूसरे को शिकस्त देने का भी खूब प्रयास किया। आए दिन गांव में पीड़ित परिवार से लेकर आरोपी बनाये गए परिवार के बच्चों से मुलाकात कर उन्हें जल्द छुड़वाने के आश्वासन दिये गये। अंत में गांव वालों ने ही नेताआें का विरोध कर उनका रास्ता रोका।

सीबीआर्इ जांच की मांग

18 फरवरी 2016 को बिसाहड़ा में आरोपी पक्ष के परिजनों ने कोर्ट में याचिका दायर कर मामले में सीबीआर्इ जांच की भी मांग की। इसके साथ ही फाॅरेंसिंक रिपोर्ट को सार्वजानिक करने के अपील की। इसके लेकर महीनों तक चली सुनवार्इ के बाद कोर्ट ने पुलिस को रिपोर्ट जमा करने के आदेश दिये।

रिपोर्ट के बाद फिर बढ़ा बवाल

कोर्ट ने करीब एक माह की सुनवार्इ के बाद ३१ मर्इ २०१६ को फाॅरेंसिक रिपोर्ट सार्वजानिक करने आदेश दिया। इसमें अखलाक के घर से बीफ होने की बात सामने आते ही एक बार फिर बिसाहड़ा मामला तेज गया। गांव वालों ने अखलाक के परिवार के दोषी ठहराते हुए, सरकार पर हमला बोला। इसके साथ ही अन्य राजनीतिक दलों आैर नेताआें ने भी जमकर बयानबाजी की।

अखलाक के परिवार पर दर्ज हुआ मुकदमा

फाॅरेंसिक रिपोर्ट में बीफ का खुलासा होते ही गांव वाले थाने पहुंचे। यहां अखलाक के पड़ोस में रहने वाले सूरजपाल ने अखलाक, उसके भार्इ समेत सात लोगों के खिलाफ गौकशी की शिकायत दी, पुलिस के शिकायत दर्ज न करने पर उन्होंने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। डेढ़ माह तक चली सुनवार्इ के बाद १५ जुलार्इ को कोर्ट के आदेश पर अखलाक के परिवार के छह लोगाें के खिलाफ गोकशी का मुकदमा दर्ज किया गया।

गिरफ्तारी को लेकर दिया धरना

अखलाक के परिवार पर मुकदमा दर्ज होने के बाद भी उसके भार्इ जान मोहम्मद समेत अन्य की गिरफ्तारी न होने पर गांव में दोबारा पंचायत का दौर शुरू हुआ। पुलिस को वाॅर्निंग दी गर्इ। इसके बाद भी गिरफ्तारी न हाेने पर गांव की महिलाआें ने धरना शुरू किया।

रविन की मौत के बाद फिर गरमाया बिसाहड़ा

गोकशी के बवाल में हुई अखलाक की हत्या के एक आरोपी रविन की जेल में तबियत खराब होने से 4 अक्टूबर को उसकी अस्पताल में मौत हो गई थी। रविन के परिजनों ने जेलर एस. के. पांडेय की पिटाई से मौत का आरोप लगाया था। इसके साथ ही परिजनों ने जेलर पर कार्रवार्इ समेत 6 मांगे पूरी न होने तक शव का दाहसंस्कार करने से इंकार कर दिया। चार दिनों तक गांव में दिन आैर रात धरना चला। गांव वालों ने रविन का शव तिरंगे में लपेटकर रखा। साथ ही उसको शहीद का दर्जा देने की अपील की। इस दौरान शासन प्रशासन के वार्ता विफल होने पर दोबारा से नेताआें ने गांव में आना जाना शुरू किया। आठ अक्टूबर को भाजपा मंत्री महेश शर्मा, विधायक संगीत सोम जिले के डीएम आैर एसएसपी पहुंचे। जिसके बाद बीजेपी नेताआें समेत प्रशासन के अधिकारियों के समझाने जेलर पर जांच बिठाने व २० लाख मुआवजा देने पर लोग शव के दाह संस्कार को तैयार हुए थे।

बिसाहड़ा गांव में साल भर से नहीं मनी दिवाली आैर र्इद

बिसाहडा गांव में हुए गौवंश की अफवाह के बाद आए भूचाल से यहां रहने वाले लोगों की खुशी के साथ ही त्योहारों की रौनक ही गायब हो गर्इ है। गांव में पिछले एक साल कोर्इ भी त्यौहार नहीं मना है। चाहे वो दिवाली, होली हो या र्इद। गांव में आरोपियों के परिजन कर्ज में डूब चुके हैं। वहीं मुस्लिम समुदाय के कर्इ लोग घर छोडकर बाहर जाकर बस गये है।

जानिए कब क्या हुआ—

28 सितंबर 2015

मंदिर में हुए अलाउसमेंट के बाद गोकशी के शक में भारी भीड़ ने अखलाक के घर मेें घुसकर उसकी हत्या कर दी। वहीं उनका बेटा गंभीर रूप से घायल हो गया।

29 सितंबर 2015

गांव में भारी तादाद में पुलिस फोर्स तैनात की गर्इ। साथ ही गांव के १९ युवकों को हिरासत में लिया गया।

30 सितंबर 2015

राज्य सरकार ने मजिस्टे्रट को पूरे मामले की जांच के आदेश दिये।

2 अक्टूबर 2015

एआर्इएमआर्इएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी, बीजेपी के केंद्रीय मंत्री डाॅ. महेश शर्मा समेत अन्य नेता पहुंचे।

3 अक्टूबर 2015

गांव की महिलाआें ने राहुल गांधी आैर दिल्ली सीएम केजरीवाल समेत मीडिया को गांव में घुसने से रोका।

16 अक्टूबर 2015

अखलाक के परिवार ने गांव छोड़ा। दूसरी जगह हुए शिफ्ट।

23 दिसंबर 2015

पुलिस ने 19 लोगों को आरोपी बनाकर कोर्ट में दाखिल की चार्जशीट।

18 फरवरी 2016

बिसाहड़ा में आरोपी पक्ष के परिजनों ने की सीबीआर्इ जांच की मांग।

1 अप्रैल 2016

आरोपी पक्ष की याचिका पर जिला जज ने मांगी फाॅरेंसिक रिपोर्ट की काॅपी।

31 मर्इ 2016

फाॅरेंसिक रिपोर्ट में हुआ गौवंश का मांस होने का खुलासा।

2 जून 2016

बिसाहड़ा के सूरजपाल ने अखलाक के परिवार के सात लोगों पर जारचा कोतवाली में दी गोकशी की शिकायत।

15 जुलार्इ 2016

कोर्ट के आदेश पर जारचा थाने में अखलाक के परिवार के खिलाफ दर्ज की गर्इ शिकायत।

26 अगस्त 2016

हार्इकोर्ट ने अखलाक के परिवार पर दर्ज मुकदमे में जान मोहम्मद को छोड़कर अन्य लोगों की गिरफ्तारी पर लगार्इ रोक।

6 सितंबर 2016

छह सितंबर को मिली तीसरे नाबालिग आरोपी को बेल।

29 सितंबर 2016

गांव की महिलाआें ने जान मोहम्मद की गिरफ्तारी की मांग को लेकर शुरू किया धरना।

4 अक्टूबर 2016

अखलाक की हत्या के मुख्य आरोपी जेल में बंद रविन की अस्पताल में मौत।

5 अक्टूबर 2016

गांव में पहुंचा रविन का शव, नहीं किया गया दाहसंस्कार, धरने पर बैठे गांववासी।

8 अक्टूबर 2016

जेलर का तबादला करने के साथ ही परिवार को २० लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा के बाद किया गया दाहसंस्कार।
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