2016 में सबसे विवादित रहा कैराना प्रकरण, एक क्लिक में जानिए पूरा सच

2016 में सबसे विवादित रहा कैराना प्रकरण, एक क्लिक में जानिए पूरा सच
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हुकुम सिंह के खुलासे के बाद महीनों तक कैराना प्रकरण खबरों में बना रहा

नोएडा। साल 2016 में देश में सबसे ज्यादा विवादित खबर यही रही। कैराना के सांसद हुकुम सिंह ने जून की शुरुआत में ही जुबानी बम फोड़ा। उन्होंने कहा कि कैराना से करीब 300—400 हिंदू परिवारों का पलायन हो चुका है। इसके एक हफ्ते बाद 8 जून को उन्होंने 346 लोगों की सूची जारी की जोकि विभिन्न वजहों से कैराना से पलायन कर गए। हुकुम सिंह ने मामले को कश्मीर से जोड़ा। उन्होंने कहा कि जिस तरह से कश्मीर से ​कश्मीरी पंडितों को भगाया गया उसी तरह कैराना से हिंदुओं को भगाया जा रहा है। ये खबर देश भर में आग की तरह फैली और समुदायों में मनमुटाव बढ़ा।

जब हुआ लिस्ट का पोस्टमार्टम

इसके बाद देश भर में पलायन को रोकने के लिए आवाज उठने लगी। सोशल मीडिया पर कुछ भड़काऊ तस्वीरें भी जारी की गई जिसमें मुस्लिम समुदाय के लोगों में हथियार भी दिखे। बताया ​गया कि यह कैराना के लोग हैं जोकि हिंदुओं को धमकाते हैं। इन तस्वीरों की सत्यता पर अभी भी संश्य है। इसके बाद देश भर की मीडिया कैराना पहुंची। मीडिया ने हुकुम सिंह की लिस्ट का पूरी तरह से पोस्टमॉर्टम किया। पत्रिका की टीम ने भी कैराना जाकर पलायन का सच जाना।

मृतकों के नाम भी लिस्ट में

कैराना में पता चला कि पलायन संप्रदाय खास के लोगों के डर की वजह से नहीं बल्कि रोजगार, शिक्षा, स्वस्थ्य सवाओं के अभाव में किया गया। वहीं हुकुम सिंह की लिस्ट में कई नाम ऐसे लोगों के भी थे जो अब इस दुनिया में ही नहीं थे। इतना ही नहीं पौने दो लाख की आबादी में से 20 सालों के अंतराल में हुए पलायन को गलत तरीके से पेश किया गया। इसके बाद हुकुम सिंह ने दूसरी लिस्ट जारी की जिसमें करीब 63 लोगों का नाम शामिल था। इस लिस्ट में भी उतने ही झोल मिले।

जिंदा का मार डाला

मामले में सबसे रोचक मोड़ तब आया जब प्रशासन ने भी लिस्ट को वेरीफाई किया लेकिन एक जीवित व्यक्ति को हुकुम सिंह की सूची के आधार पर मृत घोषित कर दिया गया। इसके बाद वह व्यक्ति कैराना में प्रशासनिक अधिकारियों के सामने पहुंचा और खुद के जीवित होने का सबूत दिया। इतना ही नहीं कुछ ही दिनों के बाद अन्य दलों की तरफ से कैराना से पलायन करने वाले मुस्लिमों की लिस्ट जारी कर दी।
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