खाट पंचायत: भीड़ तो जुटी, वोट पर सवाल बाकी

खाट पंचायत: भीड़ तो जुटी, वोट पर सवाल बाकी
Rahul gandhi

साल 2016 में पीके की सलाह पर ही कांग्रेस ने यूपी में शुरू की थी किसान पंचायत 

नई दिल्ली/नोएडा. 27 साल बाद यूपी में वापसी को बेताब कांग्रेस पार्टी अपनी पूरी कोशिश कर रही है कि एक बार फिर उसे जनता में पैठ बनाने का अवसर मिले. इसके लिए वह लगातार वो ज़मीनी मुद्दे उठाने की कोशिश कर रही है जो सीधे जनता के दिल में उतर सकें. यही कारण है कि अपने चुनावी रणनीतिज्ञ प्रशांत किशोर (पीके) की सलाह पर उन्होंने यूपी में किसान पंचायत की शुरुआत की. 27 दिन की इस किसान यात्रा में कांग्रेस को मिलीजुली उपलब्धि हासिल हुई. खाट पंचायतों में जनता तो खूब उमड़ी, लेकिन अंत तक यह सवाल बरकरार रहा कि भीड़ के रूप में खाट सभाओं में आ रही जनता कांग्रेस को कितने वोट देगी. ये ऐसा सवाल है जिसका जवाब शायद आज की तारीख में कांग्रेस के पास भी नहीं है. 

27 दिन में चले 2500 किलोमीटर  

राहुल गांधी की किसान यात्रा 27 दिनों में पूरी हुई. पूर्वी उत्तर प्रदेश के देवरिया से 6 सितम्बर से शुरू हुई यात्रा दिल्ली में एक जनसभा के रूप में अक्टूबर माह के पहले हफ्ते में खत्म हुई. इस बीच राहुल ने लगातार किसानों से सम्पर्क किया और उनकी समस्याएं जानने-समझने की कोशिश की. 

किसानों से मांग पत्र भराकर मोदी को सौंपा 

कांग्रेस उपाध्यक्ष ने खाट यात्राओं में किसानों से एक फॉर्म भी भरवाया. इस फॉर्म को किसान मांग पत्र कहा गया. कांग्रेस के अनुसार उसने लगभग ढाई करोड़ किसान मांग पत्र भरवाए. कांग्रेस ने किसानों से उनकी कुल कर्ज़ की राशि की जानकारी ली और यह वायदा किया कि अगर यूपी में कांग्रेस सत्ता में आती है तो वह उनके कुल कर्ज़ का आधा हिस्सा माफ़ कर देगी. इसके साथ ही कांग्रेस ने किसानों से उनके बिजली के बिल आधा करने और उनकी उपज को उचित मूल्य दिलवाने का भी वादा किया.

बाद में एक समारोह के दौरान कांग्रेस ने ये मांग पत्र कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को सौंपा. संसद सत्र के अंतिम दिन राहुल गांधी ने अपनी पार्टी के गुलाम नबी आज़ाद, राजबब्बर और अन्य कई वरिष्ठ नेताओं के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और उन्हें किसानों की समस्याओं के लिए कुछ सकारात्मक कदम उठाने के लिए कहा. 

खाट लेकर भागी जनता 

राहुल की पूरी किसान यात्रा में एक अजीब सी स्थिति पैदा हुई. खाट पंचायतों में इकट्ठी हुई जनता ने पंचायत में आयी खाटों को भी लूट लिया. पंचायत से जाते समय वे उस खाट को भी लेते गए जिसपर बैठकर उन्होंने राहुल की बात सुनी थी.विपक्ष ने खाट लूटने को मजाक का विषय बनाया था. इस पर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए इसका जवाब भी दिया था. इसमें उन्होंने कहा कि जो लोग माल्या के हजारों करोड़ लूटकर देश से भाग जाने के बाद भी परेशान नहीं हुए, आज वे किसानों के द्वारा खाट लूटे जाने से परेशान हो रहे हैं.
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