विकास की दौड़ में काफी पीछे छूट गया पूर्व पीएम का विधानसभा क्षेत्र

विकास की दौड़ में काफी पीछे छूट गया पूर्व पीएम का विधानसभा क्षेत्र
chaudhary charan singh

चौधरी चरण सिंह के जन्मदिन पर विशेषः चौधरी चरण सिंह आजादी से पहले और बाद में छह बार जीत चुके हैं छपरौली विधानसभा के चुनाव

नोएडा: चौधरी चरण सिंह ने अपने पॉलिटिकल करियर की शुरूआत छपरौली विधानसभा से की थी। आजादी से पहले इस विधानसभा क्षेत्र का नाम संयुक्त प्रांत की धारा सभा का मेरठ (दक्षिण-पश्चिम) था। सन 1967 में ये विधानसभा बना। यहीं से वो चुनाव जीतकर दो बार मुख्य मंत्री बने। उसके बाद संसद तक पहुंचे और गृह मंत्री और प्रधानमंत्री तक बने। लेकिन छपरौली कस्बे का विकास धरा का धरा रह गया। विकास की दौड़ में ये इलाका उन इलाकों से भी काफी पीछे रह गया जो हाल ही में अस्तित्व में आए थे।

बागपत जिले के छपरौली कस्बे का इतिहास बहुत पुराना है। इतिहास के पन्नों में इसका नाम मोटे अक्षरों में अंकित है। जिसका श्रेय काफी हद तक चौधरी चरण सिंह को भी जाता है। लेकिन जब बात विकास की आती है तो ये कस्बा कहीं नहीं ठहरता। अगर तुलना करें तो कैराना, सिंभालका, सरधना आदि कई कस्बों से काफी पीछे है। ताज्जुब की बात तो ये है कि शामली जैसे कस्बे आज जिले का रूप धारण कर चुके हैं। लेकिन जिस कस्बे ने देश का पांचवां प्रधानमंत्री दिया वो कहीं नहीं दिखाई देता है।

सामूहिक काम पर करते थे विश्वास

इस बारे में गांव के बुजुर्ग और चौधरी चरण सिंह को करीब से जानने वाले प्रीतम सिंह का कहना है वो यूपी सरकार में सीएम के अलावा तमाम पदों पर रहे। लेकिन उन्होंने कभी सिर्फ अपने विधानसभा क्षेत्र पर ही ध्यान नहीं दिया। वो सामूहिकता पर ध्यान दिया। सभी जगहों पर काम बराबर कराया। वो ही इकलौते ऐसे सीएम रहें हैं जिनकी सरकार में एक भी भ्रष्टाचार का मामला सामने नहीं आया था। आज तो कोई भी सरकार नहीं जो भ्रष्टाचार में लिप्त ना हों।

विपक्षी पार्टियों ने नहीं दिया ध्यान

चौधरी चरण सिंह छपरौली के लिए किसी महात्मा से कम नहीं थे। लेकिन इस क्षेत्र को इसी बात का काफी घाटा भी हुआ है। गांव वालों के अनुसार उन्हें चौधरी चरण सिंह का समर्थन करने का आज तक नुकसान उठाना पड़ रहा है। यहां से सभी वोट राष्ट्रीय लोकदल के पास वोट जाते हैं। प्रदेश में सरकार किसी और पार्टी की रहती है। ऐसे में यहां का विकास कम ही हो सका है। सड़क तो छोड़ो नाले खड़ंजों के लिए भी लोग यहां पर तरसे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जो विकास नोएडा और गाजियाबाद का हुआ वो यहां पर होना चाहिए था।

अखिलेश ने दी सड़कें

स्थानीय निवासी और पंप ऑपरेटर का करने वाले सुभाष चंद का कहना है कि भले ही छपरौली समाजवादी पार्टी के अगेंस्ट हो। अखिलेश का विरोध करते हों। फिर भी यहां पर सड़कें दिखाई देती हैं वो सभी अखिलेश यादव की ही देन है। उन्होंने यहां थोड़ा बहुत काम कराया है। सिर्फ छपरौली ही नहीं पूरा बागपत चाहता है कि वो एक बार जरूर यहां आएं और आकर देखें कि वेस्ट यूपी का ये जिला कितना पिछड़ा हुआ है।
खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned