लंदन यूनिवर्सिटी में किसी ग्रंथ से कम नहीं थी चौधरी चरण सिंह की यह रचना

लंदन यूनिवर्सिटी में किसी ग्रंथ से कम नहीं थी चौधरी चरण सिंह की यह रचना
charan singh

चौधरी चरण सिंह के जन्मदिन पर विशेषः इकोनॉमिक नाइटमेयर ऑफ इंडिया इट्स कॉज एंड क्योर नाम की किताब को इंडिया में नहीं मिली कभी मान्यता

नोएडा: किसानों के नेता कहे जाने वाले चौधरी चरण सिंह महज नेता ही नहीं थे बल्कि बुद्धिजीवी लेखक भी थे। उन्होंने इंडियन इकोनॉमी से लेकर यूपी में भूमि सुधार और अपनी गांधीवादी सोच के साथ दैनिक व्यवहार में लाने वाली शिष्टाचारिक बातों पर भी पुस्तकें लिखी हैं। जिन्हें भले ही भारत में मान्यता ना मिली हो। लेकिन विदेशों में उनकी पुस्तकों को काफी सराहा गया है। यहां तक की एक पुस्तक को लंदन यूनिवर्सिटी में भी पढ़ाया गया है। जानकारों के अनुसार वो पुस्तक अब लंदन में पढ़ाई जा रही है या नहीं इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है। आइये आपको भी बताते हैं कि आखिर कौन सी पुस्तक लंदन में कंसीडर करने के साथ पढ़ाई जाती रही है।

फॉलोअर्स को नहीं है ज्यादा जानकारी

छपरौली के चौधरी चरण सिंह राजकीय महाविद्यालय के असिसटेंट प्रोफेसर डॉ. प्रतीत कुमार ने बताया कि चौधरी चरण सिंह की पुस्ताकों के बारे में काफी कम लोग जानते हैं। खासकर उनके फॉलोअर्स की बात करें तो 99 फीसदी लोग नहीं उनकी विश्व प्रसिद्ध पुस्तकों के बारे में जानकारी नहीं रखते हैं। इसका रीजन है वो तमाम किताबें अंग्रेजी में हैं। अब उनके हिंदी अनुवाद हुए हैं। लेकिन मार्केट में उनकी संख्या ज्यादा नहीं है। जो लोग इन किताबों के बारे में जानते हैं उन्होंने पब्लिशर्स से गुजारिश की है कि उनकी हिंदी संस्करण किताबों को ज्यादा से ज्यादास मार्केट में लाया जाए।

लंदन ने कंसीडर चौधरी साहब की ये बुक

डॉ. प्रतीत शर्मा बताते हैं कि उनकी एक किताब है जिसका नाम है इकोनॉमिक नाइटमेयर ऑफ इंडिया इट्स कॉज एंड क्योर (भारत की भयावह आर्थिक स्थिति, कारण और निदान)। इस किताब को इंडिया की किसी भी यूनिवर्सिटी में कंसीडर नहीं की गई। जबकि लंदन यूनिवर्सिटी में इस किताब को कंसीडर ही नहीं किया गया बल्कि उसे पढ़ाया भी गया है। इस बात का उल्लेख लंदन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर टेरेंस जे वायर्स अपनी बुक चरण सिंह: एन एसेसमेंट में जिक्र करते हुए कहा है कि 'मुझे याद है, चरण सिंह की पुस्तक इकोनॉमिक नाइटमेयर ऑफ इंडिया इट्स कॉज एंड क्योर 1982 में लंदन में जब मेरी मेज पर पड़ी हुई थी तो संपन्न शहरी परिवार के बीए लास्ट ईयर के इंडियन स्टूडेंट ने इस किताब को देखा और कहा कि ये किताब चौधरी चरण सिंह ने लिखी है'। उस वक्त ये ताज्जुब की बात थी उनकी लिखी और पढ़ाई जा रही बुक के बारे में इंडियन स्टूडेंट को भी जानकारी नहीं थी। डॉ. प्रतीत कहते हैं कि अब इस बारे में कोई जानकारी नहीं है कि वो किताब अब भी पढ़ाई जा रही है या नहीं।

कई किताबों का किया है लेखन

ऐसा नहीं है कि सिर्फ उन्होंने एक ही किताब का लेखन किया है। जबकि उन्होंने उत्तर प्रदेश में भूमि सुधार और कुलक वर्ग नाम की किताब लिखी थी। जोकि काफी प्रचलित भी हुई थी। चौधरी चरण सिंह गांधीवादी थे। उन्हीं के आंदोलन से प्रेरित होकर किसानों की ओर से रुख किया। जिसके बाद उन्होंने भारत की अर्थनीति, गांधीवादी रूपरेखा की रचना की। डॉ. प्रतीत कुमार कहते हैं कि उनकी एक किताब जिसका नाम शिष्टाचार है वो आज के समाज के लिए काफी प्रसांगिक है। उसमें सामान्य व्यवहार से लेकर आजकल की जीवनशैली को देखते हुए युवाओं को खानपान किस तरह से करना चाहिए। इस बारे में जानकारी दी गई है।
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