नोटबंदीः 2 साल की बेटी के लिए दूध भी नहीं ला सका बाप, लगाई फांसी

नोटबंदीः 2 साल की बेटी के लिए दूध भी नहीं ला सका बाप, लगाई फांसी
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नोटबंदी के कारण काफी परेशान था रिक्शाचालक, अब लगा ली फांसी

बुलंदशहर। 500-1000 रुपए के नोटबंदी के कारण गरीब तबके के लोग अब मौत को गले लगाने लगे हैं। ऐसा ही एक मामला बुलंदशहर के खुर्जा सिटी में सामने आया है। यहां एक गरीब रिक्शावाला नोटबंदी के चलते मौत का शिकार बना है। रिक्शाचालक ने बीती रात फांसी से लटक कर अपने घर में आत्महत्या कर ली। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। अकबर के पास से कुछ 5 सौ के नोट भी बरामद हुए हैं।

मामला खुर्जा सिटी इलाके का है। यहां का निवासी रिक्शाचालक अकबर के पास 5-6 पांच सौ के नोट थे। बता दें कि अकबर पिछले कई दिनों से नोट बदलने के लिए घंटों बैक के बाहर लाइन में खड़ा रहा। लेकिन बैंक में करेंसी खत्म होने की वजह से उसके नोट नहीं बदले जा सके। वहीं घर में खर्चे के लिए रुपये न होने की वजह से रोज पत्नी से झगड़ा हो रहा था।

गुरुवार को अकबर अपनी दो साल की बच्ची के लिए दूध लेने दुकान पर गया था। लेकिन 500 रुपए का नोट होने की वजह से दुकानदार ने दूध देने से मना कर दिया। अकबर खुले पैसे न होने की वजह से अपनी 2 साल की बच्ची के लिए दूध भी ना ला सका। इस बात को लेकर पत्नी से कहासुनी हुई और फिर अकबर ने थोड़ी देर बाद घर के कमरे में जाकर छत के हुक से लटके कपड़े में फांसी लगा ली।

करीब घंटे भर बाद पत्नी ने जब अकबर को छत से लटका देखा तो उसके होश उड़ गए। अकबर की सांसें रूक चुकी थी। अकबर की पत्नी की चीख पुकार सुनकर मौके पर पहुंचे पड़ोसियों ने पुलिस को सूचना दी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। अकबर के पास से कुछ 5 सौ के नोट भी बरामद हुए हैं।

अकबर की पड़ोसी शाजिया की माने तो अकबर के पास घर के खर्चों के लिए पैसे नहीं थे। जिस वजह से अकबर काफी दिनों से परेशान चल रहा था। शाजिया ने बताया कि अकबर रिक्शा चालक था और रिक्शा चलाकर अपने परिवार का पालन पोषण करता था। अकबर पिछले कई दिनों से बैंक की लाइन में लग कर अपने 500 रुपए के नोट बदलना चाहता था। लेकिन बैंक में करेंसी खत्म होने की वजह से उसके नोट नहीं बदले जा सके।
 
अकबर के पड़ोसी रफीक कुरैशी ने बताया कि अकबर का बैंक में खाता नहीं था और नोट बंदी की खबर सुनकर वह रोज बैंक की लाइन में नोट बदलने के लिए चक्कर काट रहा था। गुरुवार को 500-1000 रुपए के नोट बैंक द्वारा चेंज न किए जाने की बात सुनकर सदमें में आ गया था। सदमें के कारण ही आत्महत्या जैसा कदम अकबर ने उठाया है।

चार लोगों को पीछे छोड़ गया अकबर

अकबर मूलरूप से गाजियाबाद का रहने वाला है। खुर्जा सिटी में अकबर अपनी ससुराल में आकर पिछले काफी समय से रहा रहा था। अकबर पूरे घर में अकेला कमाने वाला था। अकबर के जाने के बाद घर में बूढ़ी सास, पत्नी और दो मासूम बच्चे रह गए हैं।
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