Delhi Fire: मौत से ठीक पहले मुशर्रफ ने दोस्त को किया आखिरी फोन, बोला- 'खत्म होने वाला हूं, घर का ध्यान रखना'

Highlights:

-रविवार को चार मंजिला इमारत में चल रही फैक्ट्री में लगी भीषण आग में 44 लोगों को दर्दनाक मौत हो गई

-मुशर्रफ ने तड़के करीब 5 बजे जिंदगी के अंतिम क्षणों में अपने दोस्त मोनू को कॉल किया

-इस दौरान दोनों के बीच फोन पर करीब साढ़े तीन मिनट तक बातचीत हुई

नोएडा। दिल्ली के अनाज मंडी (Delhi Anaj Mandi Fire Case) इलाके में रविवार को चार मंजिला इमारत में चल रही फैक्ट्री में लगी भीषण आग (Delhi Fire Case) में 44 लोगों को दर्दनाक मौत हो गई। वहीं इस हादसे में दर्जन भर से अधिक लोग घायल हो गए। जिन्हें गंभीर हालत में इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस फिलहाल मामले की छानबीन में जुट गई है।

इस सबके बीच आग में जलकर जिंदगी गवाने वाले बिजनौर के रायपुर सादात के टांडा माईदास निवासी मुशर्रफ पुत्र अब्दुल वाहिद और उसके दोस्त मोनू के बीच हुई आखिरी बातचीत का ऑडियो सामने आया है। दरअसल, मुशर्रफ ने रविवार तड़के करीब 5 बजे जिंदगी के अंतिम क्षणों में अपने दोस्त मोनू को कॉल किया। इस दौरान दोनों के बीच फोन पर करीब साढ़े तीन मिनट तक बातचीत हुई। जिसमें मृतक ने इमारत के अंदर का भयानक मंजर बताया और दोस्त से उसके परिवार का ध्यान रखने की बात कही।

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साढ़े तीन मिनट तक दोनों के बीच हुई ये बातचीत

मृतक मुशर्रफ ने कॉल किया- हैलो मोनू, भैया आज खत्म होने वाला है। आग लग गई है। आ जाइयो करोलबाग। टाइम कम है और भागने का कोई रास्ता नहीं है। खत्म हुआ भैया मैं तो, घर का ध्यान रखना। अब तो सांस भी नहीं ली जा रही।

दोस्त- आग कैसे लग गई?

मुशर्रफ- पता नहीं कैसे। कई सारे लोग दहाड़ रहे हैं। अब कुछ नहीं हो सकता। घर का ध्यान रखना।

दोस्त- फायर ब्रिगेड को फोन करो।

मुशर्रफ- कुछ नहीं हो रहा अब।

दोस्त- पानी वाले को कॉल कर दो।

मुशर्रफ- कुछ नहीं हो सकता है। मेरे घर का ध्यान रखना। किसी को एक दम से मत बताना। पहले बड़ों को बताना (कराहते हुए बोला- या अल्लाह)। मेरे परिवार को लेने पहुंच जाना। तुझे छोड़कर और किसी पर भरोसा नहीं है।

मुशर्रफ- अब सांस भी नहीं ली जा रही है।

दोस्त- हैलो, हैलो (दूसरी ओर से भी उल्टी करने और कराहने की आवाज आई)। वो गाड़ी नहीं आई पानी वाली?

मुशर्रफ- पूरी बिल्डिंग में आग लगी दिख रही है भैया। ऊपर वाला जैसे करे। आखिरी टाइम है ये।

दोस्त- तू मत जाना मेरे भाई, निकलने या कूदने का कोई रास्ता नहीं है क्या?

मुशर्रफ- नहीं कोई रास्ता नहीं है।

दोस्त- भाई बचने की कोशिश कर, किसी तरह निकल वहां से (मृतक मुशर्रफ के कराहने की आवाज आती है)।

मुशर्रफ- अब तो गए भैया। तीसरे, चौथे माले तक आग लगी है। किसी से जिक्र मत करना ज्यादा।

दोस्त- आग पहुंच गई है या धुआं आ रहा है। बाहर छज्जे की ओर आ जा।

मुशर्रफ- भाई, जैसे चलाना है वैसे मेरा घर चलाना। बच्चों और सब घर वालों को संभालकर रखना। एक दम से घर मत बताना। भैया तैयारी कर ले अभी आने की।

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2010 में हुई थी मृतक की शादी

बता दें कि मृतक मुशर्रफ की शादी 2010 में बढ़ापुर थाने के ग्राम गोपीवाला में हुई थी। उसकी तीन पुत्री और एक पुत्र है। वहीं मौत की खबर सुनकर मुशर्रफ की पत्नी इमराना, मां रहमत और बच्चों का रो रोकर बुरा हाल है। मृतक के परिजन प्रधानपति फुरकान सलीम के साथ दिल्ली पहुंच गए हैं।

Rahul Chauhan
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