दो सालों में बदल गए चुनावी मुद्दे, ये होगा चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा

दो सालों में बदल गए चुनावी मुद्दे, ये होगा चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा
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sandeep tomar | Publish: Dec, 22 2016 08:46:00 PM (IST) Noida, Uttar Pradesh, India

राजनीतिक दलों ने विकास को छोड़ अन्य मुद्दों पर फोकस करना शुरु कर दिया है

नोएडा: 2017 का चुनाव काफी नजदीक हैं। सभी पार्टियों की ओर से चुनाव प्रचार तेजी से बढ़ गया है। ताज्जुब की बात तो ये है कि 2012 के बाद और 2014 के चुनावों में जो चुनावी मुद्दे थे वो सब हवा हो गए हैं। आगामी चुनावों में चुनावी मुद्दे पूरी तरह से बदल गए हैं। ताजा मुद्दा तो नोटबंदी को लेकर है ही। वहीं दूसरी ओर बिसाहड़ा कांड को भी चुनावी मुद्दा बनाया जा रहा है। क्योंकि विपक्षी पार्टियों को बिहार चुनावों में इसका काफी फायदा भी हुआ था। वहीं कैराना पलायन मुद्दे को हम कैैसे छोड़ सकते हैं। ऐसे में इस बार ग्राफ रूट के मुद्दों से ज्यादा इन मुद्दों पर जोर रहने के आसार हैं।

पीछे छूट गए वो सभी मुद्दे

2012 के विधानसभा और 2014 के लोकसभा चुनावों की करें तो तब जो मुद्दे जनता के सामने लेकर राजनीतिक दल आए थे, उनमें से ज्यादातर के इस बार पीछे रहने की संभावना है। दोनों इलेक्शन में मनरेगा घोटाला, एनआरएचएम घोटाला, स्मारक निर्माण, सांप्रदायिक ध्रुवीकरण, सीबीआई जांच, अच्छे दिन, सबका साथ सबका विकास, लैपटॉप वितरण, कन्याधन वितरण को आगे रखा गया था। जानकारों की मानें तो वो बातें बीती हुई कहानी हो चुके हैं। मुजफ्फरनगर कांड को भी अब कोई याद करने के मूड में नहीं दिखाई दे रहा हैं। वैसे भी ये साल इतने सारे मुद्दे देकर जा रहा है कि पॉलिटिकल पार्टियों के पास मुद्दों की कोई कमी नहीं है। ताज्जुब की बात तो ये है कि इनकी वजह से आम पब्लिक काफी परेशान है और हाचे चुकी है।

विशेषतौर पर ये दिखाई देंगे मुद्दे

2017 के चुनाव में एक दूसरे को घेरते हुए मुद्दे विकास, खराब कानून व्यवस्था, नोटबंदी, वादाखिलाफी, दलित उत्पीड़न, युवाओं और महिलाओं का उत्थान जैसे तमाम मुद्दे रहेंगे। इसके साथ ही सबसे ज्यादा हॉट मुद्दे विकास, किसान और नोटबंदी रहने की उम्मीद है। इसको लेकर बीजेपी, एसपी, कांग्रेस, बीएसपी, आरएलडी आदि सभी दल एक दूसरे को घेरते दिखेंगे। बीजेपी के वेस्ट यूपी के प्रवक्ता आलोक सिसौदिया की मानें तो यूपी ही नहीं देश की जनता को पता है कि उन्हें मोदी की नीतियों उन्हें कितना फायदा हुआ है और कितना नुकसान। बात रही मुद्दों की तो हमारा हमेशा से विकास और कानून व्यवस्था को लेकर फोकस रहा है। हम उसी को लेकर आगे बढ़ रहे हैं।

वेस्ट यूपी के ये हैं खास मुद्दे

वहीं बात वेस्ट यूपी की करें तो में कैराना पलायन, दादरी कांड, दलित उत्पीड़न, गोकशी के नाम पर उत्पीड़न, गन्ने का बकाया भुगतान के साथ हरित प्रदेश और हाई कोर्ट बेंच बनाने के मुद्दे ज्यादा उठने की संभावना है। जानकारों की मानें तो बुलंदशहर रेप केस के अलावा हाल ही में बागपत में बीजेपी सांसद प्रवेश वर्मा का दिया बयान भी मुद्दों में शामिल होने की पूरी संभावना है। गौरतलब है कि कोई भी पार्टी इस बार किसी तरह का रिस्क उठाने को तैयार नहीं है। ऐसे में हर पार्टी ऐसे मुद्दों को सामने लाने की कोशिश में जुटी है जिसका सीधा कनेक्शन पब्लिक की भावनाओं के साथ जुड़ा हुआ है।
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