स्कूल ने पांचवी की छात्रा पर लगाया चोरी का आरोप, बच्ची ने उठाया खौफनाक कदम

मासूम कहती रही कि उसने चोरी नहीं की है लेकिन किसी ने उसकी बात नहीं मानी

By: sandeep tomar

Published: 07 Dec 2016, 08:10 PM IST

नोएडा। अाज तक सभी ने ग्रथाें में पढ़ा आैर सुना है माता पिता से पहले गुरू का आदर किया जाता है। गुरू पचास गलती होने पर भी अपने शिष्य को माफ कर सही रास्ता दिखाता है। लेकिन इस मामले में एेसा नहीं हुआ। यहां गुनाह साबित न होने पर ही चोरी के आरोप में पांचवी कक्षा की किशोरी को अध्यापक आैर प्रधानचार्य ने स्कूल से निकाल दिया। इसके बाद अपने ऊपर लगे आरोप आैर निकाले जाने से डिप्रेशन में आर्इ किशोरी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। कोतवाली सेक्टर-२० पुलिस ने मृतक बच्ची के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

चोरी हुआ था मोबाइल

मूलरूप से झारखंड निवासी आरती कुमारी (13) सेक्टर-15 स्थित नयाबांस में अपने पिता कामेश्वर नायक व एक बड़े भाई के साथ रहती थी। कुछ समय पहले ही पिता ने अपनी बेटी को पढ़ाने के लिए न्यू अशोक नगर स्थित दिल्ली के राजकीय कॉलेज में दाखिला करा दिया। वह यहां पाचवीं कक्षा में पढ़ती थी। कुछ दिन पहले ही किशोरी की कक्षा में पढ़ाने वाली अध्यापिका का मोबाइल फोन चोरी हो गया। अध्यापिका ने चोरी का आरोप किशोरी पर लगाया। आरोप है किशोरी के बार-बार मना करने पर भी अध्यापिका ने उसकी एक न सुनी आैर इसकी शिकायत स्कूल प्रधानाचार्य से कर दी।

प्रधानाचार्य ने नहीं मानी बात

बेटी के घर बताने पर पिता कामेश्वर प्रधानाचार्य से मिलने स्कूल पहुंचे। वहां उन्होंने बताया कि उनकी बेटी ने मोबाइल चोरी नहीं किया है। आरोप है कि इसके बावजूद स्कूल प्रधानचार्य ने परिजनों की भी एक न मानी। साथ ही चार दिन पहले किशोरी को स्कूल से निकाल दिया।

डिप्रेशन में आर्इ किशाेरी ने पंखे से लटकर की आत्महत्या


किशोरी के पिता ने कहा कि उनकी बेटी ने मोबाइल चोरी नहीं किया था। वह तभी से चोरी के आरोप को नहीं झेल पा रही थी। कर्इ बार स्कूल अध्यापिका आैर प्रधानचार्य को समझाने पर भी उन्होंने उसे चोर ठहरा दिया। इसी के चलते स्कूल से निकाले जाने के बाद से बेटी ने चार दिन से सब कुछ खाना बंद कर दिया। वह चुप चाप रही। झूठे आरोप लगने पर उसने बुधवार दोपहर घर में किसी के न होने पर पंखे से लटकर फांसी लगा ली। भार्इ ने उसे फंदे पर लटका देख उतार कर पास के अस्पताल पहुंचाया। वहां कुछ देर उपचार के बाद ही उसकी मौत हो गर्इ।
sandeep tomar
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