जो काम इंदिरा नहीं कर सकीं, अखिलेश ने कर दिखाया

जो काम इंदिरा नहीं कर सकीं, अखिलेश ने कर दिखाया
akhilesh and indira

दशकों पहले इंदिरा गांधी नहीं कर पाई थीं जो काम, उसे सीएम ने कर दिखाया

संजय श्रीवास्तव, नोएडा। जो काम दशकों पहले इंदिरा गांधी नहीं कर पाईं थीं। वो काम अखिलेश नेे कर दिखाया। इंदिरा को अपनी सियासी सफर में दो बार चुनाव चिन्ह गंवाने पड़े थे। अखिलेश इस मामले में मजबूत निकले कि उन्होंने खुद को समाजवादी पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित करने के बाद पार्टी का आधिकारिक चुनाव चिन्ह भी हासिल किया, जिस पर उनके पिता मुलायम सिंह यादव लगातार दावा कर रहे थे।

समाजवादी पार्टी का गठन 24 साल पहले 10 अप्रैल 1992 को मुलायम ने किया था। उसके बाद से वह लगातार इस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे, लेकिन उनके बेटे अखिलेश ने एक जनवरी 2017 में राष्ट्रीय कार्यकारिणी का अधिवेशन बुलाकर ये सुनिश्चित कर लिया कि पार्टी उन्हें नया राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन ले। इसके बाद समाजवादी पार्टी दो गुटों में बंट गई। दोनों ही गुटों ने चुनाव आयोग में जाकर साइकिल को अपना चुनाव चिन्ह बताया। आमतौर पर ऐसे मामलों में चुनाव आयोग फैसले सुनाने में समय ले लेता है। इस दौरान पार्टी का आधिकारिक चुनाव चिन्ह फ्रीज कर दिया जाता है।

इंदिरा तब हार गईं थीं चुनाव चिन्ह

1969 में जब इंदिरा गांधी को राष्ट्रीय कांग्रेस से निकाला गया तो उन्होंने कांग्रेस (आर) के नाम से अलग पार्टी बनाते हुए उसके असली कांग्रेस होने का दावा किया। उन्होंने चुनाव आयोग से कांग्रेस का आधिकारिक दो बैलों की जोड़ी का चुनाव चिन्ह उन्हें दिए जाने का दावा किया, जो आजादी से पहले से कांग्रेस के साथ था। वह दावा हार गईं। उन्हें दो बैलों के चुनाव चिन्ह से हाथ धोना पड़ा। ये मामला सुप्रीम कोर्ट में भी गया। इंदिरा गांधी की पार्टी को गाय-बछड़े का निशान मिला।

आधार, जिससे अखिलेश को मिला सिंबल

1971 में इंदिरा गांधी के मामले में चुनाव आयोग ने जिस बात को आधार बनाया था, वहींं आधार उन्होंने अखिलेश के दावे के मामले में लागू किया। आधार बना निर्वाचित प्रतिनिधियों की संख्या में कौन मजबूत है, यानि किसके पास लोकसभा, विधानसभा, राज्यसभा और विधान परिषद में अधिक चुने हुए प्रतिनिधि हैं। इस मामले में अखिलेश ने जो दस्तावेज चुनाव आयोग के सामने पेश किए, उसमें पास बहुमत का दावा था। इसके अलावा मुलायम ने खुद भी चुनाव आयोग के सामने ऐसा दावा नहीं किया था कि पार्टी का बंटवारा हो रहा है और साइकिल को उन्हें दिया जाए।

साइकिल निशान तब इंदिरा को भी मिल सकता था

आपातकाल के बाद वर्ष 1977 के चुनावों में कांग्रेस बुरी तरह हारी। उसे 153 संसदीय सीटों पर जीत हासिल हुई। एक साल बाद ही कांग्रेस का फिर विभाजन हो गया, जब 153 में 76 कांग्रेसी सांसदों का समर्थन उन्होंने गंवा दिया। इंदिरा ने कांग्रेस (आई) के नाम से नई पार्टी बनायी। अबकी बार उन्होंने खुद ही गाय-बछड़े पर दावा नहीं किया। उसे लेकर देशभर में मजाक किए जाने लगे थे। गाय के रूप में इंदिरा और बछड़े के रूप में संजय गांधी को देखा जाने लगा था। चुनाव आयोग ने उन्हें अब तीन निशान दिए और एक चुनने को कहा, उनमें हाथी, साइकिल और हाथ थे। इंदिरा ने हाथ चुन लिया। बाद में साइकिल और हाथी चुनाव चिन्ह समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी को मिला।

कानूनी स्थिति

कानूनी तौर पर समाजवादी पार्टी का बंटवारा नहीं हुआ है। मुलायम सिंह ने चुनाव आयोग में साइकिल पर कोई दावा भी नहीं किया। समाजवादी पार्टी की आधिकारिक वेबसाइट पर अब भी मुख्य चेहरे के रूप में मुलायम सिंह का चेहरा दिखता है लेकिन इस साइट पर तमाम जगह अपडेट करके अखिलेश को राष्ट्रीय  अध्यक्ष लिखा जा रहा है। पार्टी की वेबसाइट पर दिखने वाला शिवपाल सिंह यादव का चेहरा गायब है लेकिन उस पर आजम खान जरूर मुख्य पेज के एक चित्र में अखिलेश के साथ बैठे दिखाए गए हैं।  
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