यहां के फर्जी काॅलसेंटरों से आते हैं आपके पास सबसे ज्यादा ठगी वाले फोन

यहां के फर्जी काॅलसेंटरों से आते हैं आपके पास सबसे ज्यादा ठगी वाले फोन
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sandeep tomar | Publish: Jan, 05 2017 04:51:00 PM (IST) Noida, Uttar Pradesh, India

रहें सावधान, यही मांगते हैं बैंक अधिकारी बनकर आपकी बैंक डिटेल

नोएडा। अगर आपके पास खुद को बैंक अधिकारी बताने वाले शख्स का काॅल आया है, तो सावधान हो जाएं। कहीं वह आप से साॅफ्टवेयर अपडेट या कार्ड ब्लॉक होने की बात कहकर बैंक डिटेल न मांग ले या ले ले आपके डेबिट या क्रेडिट कार्ड की जानकारी। ये जानकारी देते ही आप साइब ठगी के शिकार हो जाएंगे। ऐसी ज्यादातर फर्जी कॉल ऐसी जगह से आती हैं, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते होंगे। ये छोटा सा गांव है, जहां घर घर में फर्जी कॉलसेंटर चल रहे हैं।

झारखंड में ये जगह है जामताड़ा

आप सोच नहीं सकते कि आपके पास आने वाली ये कॉल कोई एक हजार किलोमीटर दूरी पर स्थित झारखंड़ के जामताड़ा से हो सकती है। यह एेसी जगह है। जहां पर घर घर में फर्जी काॅलसेंटर चल रहे हैं। यहां के ८० प्रतिशत युवा साइबर ठगी के धंधे में शामिल हैं। हालांकि पुलिस का कहना है कि झारखंड में और कई जगहों पर ऐसे फर्जी कॉल सेंटर चल रहे हैं। उत्तर प्रदेश में कानपुर से भी ऐसी गतिविधियों के संचालन की सूचना है।

काॅल कर एेसे बनाते हैं शिकार

यहां के लोग आपको कॉल करेंगे। काॅल पर बहुत ही सलीके से बात करेंगे। आप को ऐसा लगेगा कि वाकई बैंक का कोई अधिकारी या कर्मचारी ही आपसे बात कर रहा है। वो आपसे आपका कार्ड ब्लाक होने या साॅफटवेयर अपडेट की बात कहकर बैंक से जुड़ी जानकारी मांगते हैं। फिर मिनटों में आपके खाते से बड़ी रकम उडनछू हो जाती है।

इस तरह काम करता है ये गिरोह

पिछले ढाई वर्षों से झारखंड़ के जामताड़ा आैर आसपास के गांवों में साइबर ठगों की संख्या बढ़ी है। सबसे पहले दो लड़के दिल्ली से साइबर ठगी की ट्रेनिंग लेकर आए। फिर उन्होंने यहां के युवाआें को ट्रेनिंग दी। अब ये कर्इ टीमों में काम करते हैं। ठग सभी को अलग अलग जिम्मेदारी देकर काम कराते है। इनमें डाटा कलेक्टर्स को 30%, काॅल कर एटीएम आैर खाते की जानकारी लेने वालो को 50% और पैसा निकालने वाली टीम को 20% कमीशन मिलता है। इन गांवों के साइबर ठग युवा रात में अपने घराें में नहीं सोते। आसपास के जिलों या राज्यों में चले जाते हैं। ठगी में उपयोग में लाई जाने वाली सिम गलत नाम और पते पर ली जाती है।

इसलिए नहीं पकड़ पाती पुलिस

पुलिस अधिकारियों की मानें तो झारखंड़ में जामताड़ा नोएडा से करीब १००० किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां जिस बड़े पैमाने पर ये काम हो रहा है, उससे ये पता लगा पाना बहुत मुश्किल है कि ठगी का काम किसने किया। इन ठगों का कोई स्थायी ठिकाना नहीं होता। ये अपने लैपटॉप या स्मार्टफोन से काम करते हैं। आमतौर पर ऐसे ब्राउजर का इस्तेमाल करते हैं, जिनका आईपी एड्रेस छिपा होता है, इसका आसानी से पता नहीं लगाया जा सकता।
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