सपा व बसपा का कांग्रेस से नहीं हुआ गठबंधन तो भाजपा की होगी बल्ले-बल्ले, जानिए कैसे

लोकसभा चुनाव को करीब देखते हुए सभी राजनैतिक पार्टियों ने अपनी-अपनी रणनीति तैयार करनी शुरू कर दी है। भाजपा को रोकने के लिए विपक्षी पार्टी पूरा दमखम लगाए हुए है।

By: virendra sharma

Published: 07 Jan 2019, 02:48 PM IST

नोएडा. लोकसभा चुनाव को करीब देखते हुए सभी राजनैतिक पार्टियों ने अपनी-अपनी रणनीति तैयार करनी शुरू कर दी है। भाजपा को रोकने के लिए विपक्षी पार्टी पूरा दमखम लगाए हुए है। यहीं वजह है कि लोकसभा चुनाव के दौरान गठबंधन भी किया जा रहा है। यूपी में समाजवादी पार्टी(SP) व बसपा(BSP) के बीच लोकसभा चुनाव(Loksabha Elections 2019) के लिए गठबंधन हो चुका है। हालाकि अभी इसकी घोषणा नहीं की गई है। सुत्रो की माने तो सपा और बसपा के बीच में 37-37 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारने पर सहमित बनी है।

सपा और बसपा तीन राज्यों में हुए चुनाव के बाद में कांग्रेस से गठबंधन करते हुए नजर नहीं आ रही है। हालाकि दोनों ही पार्टियों ने मध्यप्रदेश में कांग्रेस को समर्थन देकर गठबंधन के लिए नरमी दिखाई थी। अगर सहमति नहीं बनी तो सपा-बसपा से नजदीकियों के बाद भी कांग्रेस लोकसभा चुनाव में अकेले लड़ेगी। आंकड़ो पर गौर करें तो चुनाव में कांग्रेस उम्दा प्रदर्शन दिखाने का दम रखती है। 2009 में हुए लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में अपना दम दिखाया था।

2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने अकेले ही 21 सीटें हासिल की थी। जबकि समाजवादी पार्टी ने 23 और बसपा ने 20 सीटें हासिल की थी। वहीं बीजेपी महज 10 सीट ही हासिल कर सकी थी। हालाकि 2014 लोकसभा चुनाव में सपा, बसपा व कांग्रेस मोदी लहर में खास सीट हासिल नहीं कर सकी। भाजपा ने इस दौरान 71 सीट का जादुई आंकड़ा छूआ था। सपा 5, कांग्रेस 2 और बसपा एक ही सीट हासिल कर सकी थी। मोदी लहर के बाद भी वोटिंग प्रतिशत के हिसाब से कांग्रेस ने 25 से अधिक सीटों पर अच्छा प्रदर्शन किया था। गाजियाबाद, कानपुर, लखनऊ, बाराबंकी, कुशीनगर, सहारनपुर आदि सीटों पर भाजपा को कड़ी टक्कर दी थी।

राजनीति जानकारों की माने तो अगर कांग्रेस अकेले उत्तर प्रदेश में चुनाव लड़ती है तो भाजपा को फायदा हो सकता है। भाजपा के मुरादाबाद जिला प्रभारी नवाब सिंह नागर ने बताया कि अगर कांग्रेस गठबंधन नहीं करता है तो भाजपा को फायदा होगा।

गठबंधन से दूर रह सकती है कांग्रेस

सपा और बसपा से सीटों पर सहमति न बनने की वजह से भी कांग्रेस गठबंधन से दूर रह सकती है। साथ ही कांग्रेस व शिवपाल यादव की नई पार्टी के बीच भी करीबी सपा के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती है।

 

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