भाजपा के लिए बुरी खबर: 2014 में जिन सीटों पर भाजपा ने किया था क्लीन स्वीप, अबकी बार है क्लीन बोल्ड के आसार

भाजपा के लिए बुरी खबर: 2014 में जिन सीटों पर भाजपा ने किया था क्लीन स्वीप, अबकी बार है क्लीन बोल्ड के आसार

Iftekhar Ahmed | Publish: May, 22 2019 12:59:04 PM (IST) Noida, Gautam Budh Nagar, Uttar Pradesh, India

  • वेस्ट यूपी में 2014 में भाजपा ने सभी 14 सीटों पर हासिल की थी जीत
  • इस बार 14 में से मात्र दो से तीन सीटें ही भाजपा को मिलने के हैं आसार
  • गठबंधन की वजह से भाजपा को देखना पड़ सकता है हार का मुंह

नोएडा. 2019 लोकसभा चुनाव संपन्न होने के बाद एग्जिट पोल के आंकड़े सामने आचुके हैं। इस बार खास बात ये है कि विपक्ष की तमाम तरह की एकजुटता के बावजूद लगभग सभी एक्जिट पोल में एनडीए यानी भाजपा के गठबंधन को बड़ी जीत मिलती दिख रही है। लेकिन, 2013 के मुजफ्फरनगर दंगे के बाद जिस पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा क्लीन स्वीपकर यहां की सभी 14 में से 14 सीटों पर कमल का परचम फहराया था। वहां इस बार भाजपा क्लीन बोल्ड होती नजर आ रही है। यानी इस बार सपा-बसपा और एएलडी के गठबंधन ने पश्चिमी उत्तर प्र्देश की तस्वीर पूरी तरह से बदल कर रख दी है। ऐसी संभावना है कि भाजपा इन सीटों पर मुश्किल से ही खाता खोल पाएगी। जमीनी हालात को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि बहुत मुश्किल से 14 में से दो से तीन सीटें ही भाजपा जीत सकती है।

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1. गौतमबुद्धनगर से वर्मतान में भाजपा के सांसद और केन्द्रीय मंत्री डॉ. महेश शर्मा, गठबंधन की ओर से बसपा के टिकट पर सतवीर नागर और कांग्रेस से अरविंद चौहान मैदान में है। इस बार भाजपा के महेश सर्मा की जीत भी आसान नजर नहीं आ रही है। यहां गठबंधन की ओर से बसपा के उम्मीदवार सतवीर नागर कड़ी टक्कर दे रहे हैं। वहीं, कांग्रेस के टिकट पर अरविंद चौहान भी सवर्ण वोट काट सकते हैं। लिहाजा, कई एग्जिट पोल में तो शर्मा की हार को दर्शाया गया है। हालांकि, डॉ. शर्मा के लिए अच्छी खबर यह है कि यहां भाजपा का शहरी वोटों पर मजबूत पकड़ है। इसके अलावा ग्रामीण वोटों के ध्रुवीकरण के भा फायदा मिल सकता है। लेकिन, जीत पक्की नहीं है।

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2. गाजियाबाद से भाजपा वर्तमान सांसद और केन्द्रीय मंत्री वीके सिंह, गठबंधन की ओर से सपा के टिकट पर सुरेश बंसल और कांग्रेस से डॉली शर्मा मैदान में हैं। इस बार गाजियाबाद से वीके सिंह की जीत भी तय नहीं है। दरअसल, उनका बाहरी होना भी एक मुद्दा बना हुआ है। इसके अलावा गठबंधन की ओर से सपा के टिकट पर सुरेश बंसल की मजबूत दावेदारी है। इसके साथ ही कांग्रेस डॉली शर्मा के रूप में सवर्ण उम्मीदवार उतारकर भाजपा के वोटबैंक में सेंध लगाने का काम किया है। लिहाजा, वीके सिंह की जीत इस बार आसान नजर नहीं आ रही है। कुछ एग्जिट पोल में उन्हें भी हारता हुआ दिखाया गया है। हालांकि, शहरी और सवर्ण वोटों पर भाजपा की पकड़ और गठबंधन का प्रत्याशी बदलने की वजह से अंदरूनी कलह गटबंधन को नुकसान पहुंचा सकता है।

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3. मेरठ-हापुड़ से भाजपा के राजेन्द्र अग्रवाल, गठबंधन की ओर से बसपा के टिकट पर हाजी याकूब कुरैसी और कांग्रेस के टिकट पर हरेन्द्र अग्रवाल मैदान में है। राजेन्द्र अग्रवाल आभी सांसद हैं, लेकिन इस बहार करारी हार का सामना करना पड़ सकता है। इसकी वजह है यहां बसपा के टिकट पर हाजी याकूब कुरैशी का उम्मीदवार होना है। इसके साथ ही कांग्रेस ने यहां बाबू बनारसी दास के पुत्र हरेन्द्र अग्रवाल को अपना उम्मीदवार बनाया है। बसपा प्रत्याशी को यहां मुस्लिम-दलित गठजोड़ का फायदा मिलता दिख रहा है। यहां भाजपा की हार तय मानी जा रही है।

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4 . बुलंदशहर से भी भाजपा प्रत्याशी डॉ. भोला सिंह, गठबंधन की ओर से बसपा के टिकट पर योगेश वर्मा और कांग्रेस से बंशीलाल पहाड़िया मैदान में है। इस बार डॉ. भोला भी कड़ी टक्कर में फंसे दिखाई दे रहे हैं। यहां गठबंधन के योगेश अग्रवाल भी बाजी मार सकते हैं। दलित-मुस्लिम और जाटों के गठजोड़ से गठबंधन प्रत्याशी को फायदा मिलता हुआ दिख रहा है। हालांकि, कांग्रेस के बंशीलाल पहाड़िया गठबंधन को कुछ नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसके अलावा मोदी फैक्टर से भी भाजपा को फायदा हो सकता है। वहीं, भाजपा के प्रत्याशी का स्थानीय होना फायदा पहुंचा सकता है।

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5. नगीना सीट से भाजपा वर्तमान सांसद डॉ. यशवंत सिंह, गठबंधन की ओर से बसपा के गिरीश चंद और गांग्रेस की ओमवती जाटव मैदान में है। यहां भी भाजपा को हार का मुंह देखना पड़ सकता है। यहां से बसपा के गिरीश चंद के भारी मतों जीत दर्ज करने की संभावना जताई जा रही है। वहीं, कांग्रेस के टिकट पर ओमवती जाटव का कमजोर उम्मीदवार होना भी गठबंधन को फायदा पहुंचा सकता है। माना जा रहा है कि यहां तत्कालीन सांसद का विरोध और मुस्लिम-दलित गठजोड़ का गठबंधन प्रत्याशी को फायदा होगा और भाजपा प्रत्याशी अपनी सीट गंवा सकते हैं।

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6. बिजनौर सीट से वर्तमान भाजपा सांसद कुंवर भारतेन्द्र, गठबंधन से मलूक नागर और कांग्रेस से नसीमुद्दीन सिद्दीकी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। ऐसी संभावना है कि भाजपा के भारतेन्द्र अपनी सीट गंवाते नजर आ रहे हैं। यहां से बसपा के मलूक नागर के जीतने के प्रबल आसार हैं। यहां से तत्कालीन कुंवर भारतेद्र का विरोध और दलित, मुस्लिम और गुर्जर वोट बैंक के गठजोड़ का फायदा गठबंधन को मिल सकता है।

7. संभल से गठबंधन की ओर से सपा के डॉ. शफिकुर्रहमान बर्क, कांग्रेस से मेजर जेपी सिंह और भजपा से प्रमेश्वर लाल सैनी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। यहां से भाजपा भी भाजपा के प्रमेस्वर लाल सैनी अपनी सीट गंवाते नगर आ रहे हैं। दरअसल, कांग्रेस के कमजोर उम्मीदवार उतारने से गठबंधन को फायदा होता नजर आ रहा है। वहीं, सपा को मुस्लिम-दलित गठजोड़ का फायदा मिलने के आसार हैं। गौर तलब है कि इस सीट पर 51 प्रतिशत से भी ज्यादा मुस्लिम वोट है।

8. अमरोहा सीट से गठबंधन की ओर से बसपा के दानिश अली, भाजपा के कंवर सिंह तंवर और कांग्रेस से सचिन चौधरी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। यहां भी भाजपा प्रत्याशी के जीतने के आसार कम ही है। मुस्लिम-दलित और जाट गठजोड़ से गठबंधन को फायदा मिलने के आसार हैं।

9. सहारनपुर सीट से बसपा के हाजी फजुलर्रहमान, भाजपा से राघवलखन पाल शर्मा और कांग्रेस से इनरान मसूद किस्मत आजमा रहे हैं। यहां भी मुस्लिम दिलत गठजोड़ की वजह से भाजपा के राघव लखनपाल शर्मा करारी शिकस्त पाते दिख रहे हैं। यहां बसपा को मुस्लिम-दलित-जाट गठजोड़ का फायदा मिलने के आसार हैं।

10. मुरादाबाद से सपा से एसटी हसन, भाजपा के टिकट पर सर्वेस सिंह और कांग्रेस से इमरान प्रतापगढ़ी मैदान में है। लेकिन, दलित-मुस्लिम गठजोड़ और कांग्रेस की ओर से बाहरी उम्मीदवार देने से गठबंधन प्रत्याशी के जीतने के आसार है। यहां भी मुस्लिम-दलित गठजोड़ से गठबंधन को बढ़त मिलने के आसार हैं।

11. रामपुर से सपा के दिग्गज नेता आजम खान, भाजपा नेत्री जया प्रदा और कांग्रेस से संजय कपूर मौदान में है। यहां भी गठबंधन उम्मीदवार आजम खान की जीत तय मानी जा रही है। इसकी वजह है, जया प्रदा का बाहरी होना साथ ही मुस्लिम-दलित गठजोड़ और आजम खान का स्थानीय मतदाताओं पर अच्छी पकड़ का फायदा मिल सकता है।

12. कैराना से सपा की तब्बसुम हसन, भाजपा से प्रदीप चौधरी और कांग्रेस से हरेन्द्र मलिक मैदान में है। यहां भी भाजपा का जीतना मुश्किल है। इसकी वजह है कांग्रेस से हरेन्द्र मलिक का चुनाव मैदान में होना। इससे भाजपा के जाट वोट बंटने के आसार है। इसके अलावा हुकुम सिंह की पुत्री मृंगाका सिंह का टिकट कटने से भाजपा की आपसी कलह और मुस्लिम-दलित-जाट गुर्जर गठजोड़ से गठबंधन को फायदा हो सकता है।

13. बागपत से भाजपा के वर्तमान सांसद सत्यपाल सिंह और रालोद से जयंत चौधरी और मैदान में है। यहां कांग्रेस ने अपना प्रत्याशी नहीं उतारा है। लिहाजा, विरोधी वोट बंटने के यहां कोई आसार नहीं है। इसिलए भाजपा के सत्यपाल सिंह को भी कड़ी टक्कर मिलने के आसार है। वहीं, मोदी लहर और सत्यापाल सिंह का विकासवादी चरित्र और स्वच्छ छवि से कुछ फायदा मिलने के आसार हैं, लेकिन जीत पक्की नहीं मानी जा रही है।

14. मुजफ्फरनगर से रालोद मुखिया अजित सिंह, भाजपा के संजीव बालियान के बीच मुकाबला है। यहां भी कांग्रेस ने अपना प्रत्याशी नहीं उतारा है, लिहाजा विरोध मतो का बिल्कुल भी बिखराव नहीं होगा। जिससे अजीत सिंह के जीतने की संभावना है। यहां गन्ना बकाया और संजीव बालयान का विरोध भाजपा की हार की मुख्य वजह बन सकती है। इसके अलावा मुस्लिम-जाट-दलित गठजोड़ से भी गठबंधन को मजबूती मिली है।

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