मेक इन इंडिया को लगाया पलीता, चीन से मंगाए मेट्रो कोच

मेक इन इंडिया को लगाया पलीता, चीन से मंगाए मेट्रो कोच
Delhi metro

इन टे्रनों का निर्माण चाइना की सीआरआरसी कंपनी के माध्यम से किया गया है

नोएडा: सर्जिकल स्ट्राइक के बाद जब चाइना ने पाकिस्तान की तारीफ की थी तो लोगों ने चाइनीज सामान का बहिष्कार करने की बात कही थी। लेकिन आज भी वो बंद नहीं हुआ है। आम लोगों की बात तो छोड़ दीजिए केंद्र और प्रदेश की सरकारों का अब भी चीन की टेक्नोलॉजी पर निर्भरता बनी हुई है। हाल ही नोएडा-ग्रेनो मेट्रो कॉरीडोर में चलने वाली ट्रेनों की तस्वीरें सार्वजनिक की गई। साथ उनके बारे में बताया गया। इन टे्रनों का निर्माण चाइना की सीआरआरसी कंपनी के माध्यम से किया गया है। जबकि इंडिया में इसी ऑस्ट्रेलिया को मेड इन इंडिया मेट्रो कोच भेजे हैं। ताज्जुब की बात तो ये है जब इंडिया में मेट्रो कोच और ट्रेनों का निर्माण हो रहा है, तो बाहर खासकर चाइना जैसे देशों से कोच क्यों मंगाए जा रहे हैं?

देश में बन रहे हैं कोच तो चाइना से क्यों?

28 जनवरी को देश के मुंबई पोर्ट से ऑस्ट्रेलिया में मेट्रो के लिए मेट्रो कोच भेजे गए। बताया गया था कि ये सभी कोच बड़ोदरा में तैयार किए गए थे। अगले ढाई सालों में इंडिया से ऑस्ट्रेलिया के लिए मेट्रो कोच भेजे जाएंगे। जानकारों की मानें तो देश में मेट्रो कोच की मैन्यूफेक्चरिंग हो रही है। जो बड़ोदरा के सावली के प्लांट में काम चल रहा है। ये काम बंबारडियार और एबीबी नाम की कंपनी ने शुरूआत की है। जानकारों के अनुसार देश में इस तरह की तीन मैन्युफेक्चरिंग प्लांट लग चुके हैं। अगले कुछ ही महीनों में इंडिया में बनने वाले मोनो रेल कोच ब्राजिल में भेजे जाएंगे। वहीं डीएमआरसी के लिए भी देश की ये मैन्यूफेक्चरिंग यूनिट्स काम कर रही हैैं। अगले पांच सालों में देश को 2000 मेट्रो कोचों की जरुरत होगी। ऐसे में ये मैन्यूफेक्चरिंग यूनिट्स काफी कारगर साबित होंगी।

मेक इंडिया कैंपेन को झटका

ऐसे में एनएमआरसी का चाइना की कंपनी से मेट्रो कोच मंगवाना बड़ा सवाल खड़े कर रहा है। इससे देश की मेक इन इंडिया योजना को बड़ा झटका लग सकता है। जानकारों के अनुसार देश में जब इस तरह की योजना पर काम चल रहा है तो देश के इस तरह सर्विस प्रोवाइडर को भी ध्यान दिया जाना चाहिए। आपको बता दें देश में मेक इंडिया नाम की योजना शुरू की गई थी जिसमें स्वदेशी सामान को प्रमोट करने की बात की कही गई थी। जिसमें सरकार द्वारा मदद करने की बात भी कही गई थी। अगर आने वाले समय में भी इसी तरह की बातें होती रहेंगी तो मेक इंडिया योजना हाशिए पर चली जाएगी।

कुछ ऐसा कह रहे हैं एनएमआरसी के अधिकारी


जब इस बारे में एनएमआरसी के जीएम पीडी उपाध्याय से बात की गई तो उन्होंने कहा कि हमारी ओर से मेट्रो कोच की ग्लोबल टेंडरिंग की गई थी। टेंडर में जिन्होंने अपनी कॉस्ट कम रखी थी उसी को लिया गया है। उन्होंने इंडिया में मैन्युफेक्चरिंग पर बात करते हुए कहा कि यहां पर कोई मैन्युफेक्चरिंग यूनिट नहीं है। यहां पर कुछ पार्ट बनते हैं। उसके बाद बाहर से आने वाली सामान को असेंबल किया जाता है।
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