यूपी का वो इलाका, जहां से पिछले चुनावों में जीते थे सबसे ज्यादा मुस्लिम

यूपी का वो इलाका, जहां से पिछले चुनावों में जीते थे सबसे ज्यादा मुस्लिम
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इस इलाके से वर्ष 2012 के चुनावों 26 मुस्लिम उम्मीदवारों ने विधानसभा में पहुचने का रिकार्ड बनाया था

संजय श्रीवास्तव, नोएडा। उत्तर प्रदेशमें इन विधानसभा चुनावों में सियासी पार्टियां मुस्लिमों को पिछली बार से कहीं ज्यादा टिकट दे रही हैं। कुछ वजह तो होगी ही। क्या आपको मालूम है कि राज्य के किस इलाके से सबसे ज्यादा मुस्लिम उम्मीदवार जीतकर विधायक बने थे।  

पश्चिमी उत्तर प्रदेश ने बनाया था रिकार्ड

वर्ष 2012 के चुनावों में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कुल 26 मुस्लिम उम्मीदवारों ने जीत हासिल कर लखनऊ की विधानसभा में पहुचने का रिकार्ड बनाया था। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में मुस्लिम विधायक बने थे। इसमें भी समाजवादी पार्टी के टिकट पर जीतने वाले प्रत्याशी सबसे ज्यादा थे। दूसरे नंंबर पर बहुजन समाज पार्टी थी। अजित सिंह के लोकदल ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कई मुस्लिम उम्मीदवार खड़े जरूर किए लेकिन उनमें से जीत किसी को नसीब नही हो पाई। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 14 जिलों में करीब 77 विधानसभा सीटें हैं।

क्यों जीते मुस्लिम प्रत्याशी

पश्चिम उत्तर प्रदेश की जनसंख्या वर्ष 2012 के सर्वे के मुताबिक 55,717, 132 है। इसमें हिन्दुओं का प्रतिशत 72.65 है, जिसमें सवर्ण, पिछड़ा, दलित सभी आते हैं जबकि मुस्लिम का प्रतिशत 25.89 है। उत्तर प्रदेश के किसी और इलाके में मुस्लिमों की आबादी इतनी ज्यादा नहीं है, जितनी राज्य के इस हिस्से में। पिछले विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी का अगर मुसलमान और यादव वोटों का समीकरण हिट रहा तो मायावती के शासन से तंग बहुत स्वर्ण वोट भी उनके पास गए। वहीं बहुजन समाज पार्टी ने सोशल इंजीनियरिंग के साथ जहां मुस्लिम उम्मीदवारों को खड़ा कर नया समीकरण बनाने की कोशिश की, उसमें उन्हें सफलता भी मिली। यही वजह है कि समाजवादी पार्टी और मायावती की बसपा दोनों पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मुस्लिम उम्मीदवारों को ज्यादा टिकट देकर ये कार्ड खेलने की कोशिश में हैं। एक वजह ये भी थी कि पिछली बार वोट देनेेे वालों का प्रतिशत काफी बढ़ गया था और बड़े पैमानों पर मुस्लिम मतदाताओं ने भी वोट डाले थे।

कई समुदाय दोनों धर्मों में

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कई समुदाय ऐसे हैं जो हिन्दूओं में भी हैं और मुस्लिमों में भी। मसलन इस इलाके में त्यागी अगर हिन्दू हैं तो मुसलमानों में भी त्यागी होते हैं। इसी तरह मुस्लिम भी अपने जातिनाम की जगह चौधरी लगाते हैं। ऐसे कई और समुदाय भी हैं।

भाजपा के बारे में क्या है कहना

सीनियर पत्रकार शाहिद चौधरी कहते हैं कि भारतीय जनता पार्टी को लेकर मुस्लिमों का दृष्टिकोण काफी हद तक बदला है लेकिन दिक्कत ये है कि ये पार्टी मुस्लिमों को टिकट ही नहीं देती। जिसके चलते मुस्लिम आमतौर पर मानते हैं कि जो पार्टी हमें टिकट नहीं दे सकती, वो हमारा ख्याल क्या रखेगी। अगर भाजपा अपनी रणनीति बदले तो निश्चित रूप से मुस्लिम वोट उनकी ओर जा सकते हैं।

पिछली विधानसभा में मुस्लिम

वर्ष 2012 के चुनाव इसलिए भी अलग कहे जा सकते हैं कि उसमें पहली बार सबसे ज्यादा मुस्लिम विधानसभा में पहुंचे थे। उनकी संख्या 64 थी। इसमें समाजवादी पार्टी के 42, बसपा के 16, कांग्रेस के चार विधायक थे। पीस पार्टी ने पहली बार चार विधायकों के साथ खाता खोला था तो कौमी एकता दल के दो और इत्तिहाद मिल्लत काउंसिल का एक मुस्लिम उम्मीदवार चुनाव जीतने में सफल रहा था।

पिछले पांच चुनावों में मुस्लिम विधायक

वर्ष 1993 - 25 मुस्लिम विधायक
(वर्ष 1993 तक उत्तर प्रदेश विधानसभा में 425 सीटें थीं, इसके बाद उत्तराखंड के अलग होने से सीटें कम हो गईं)
वर्ष 1996 - 33
वर्ष 2002 - 47
वर्ष 2007 - 56
वर्ष 2012 - 64
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