बड़ा सवाल : बजट राशि खर्च करने में हर बार पिछड़ क्यों जाते हैं अधिकारी

Highlights

- शहर के विकास के लिए वित्तीय वर्ष 2019-20 में निर्धारित बजट राशि नहीं हो सकी खर्च

- सरकार ने करीब 4610 करोड़ का बजट तय किया, अधिकारी सिर्फ 33 प्रतिशत खर्च पाए

- विकास कार्यों में तो पीछे हुए ही, जनता सुविधाओं से भी वंचित, रोजगार के अवसर भी घटे

आशुतोष पाठक

नोएडा। वित्तीय वर्ष 2019-20 खत्म होने में अब ज्यादा दिन नहीं बचे हैं। प्रदेश सरकार ने नोएडा के विकास के लिए करीब 4610 करोड़ रुपये का बजट दिया था, लेकिन अधिकारी अब तक सिर्फ करीब 1452 करोड़ रुपये ही खर्च कर पाए हैं। यानी नोएडा प्राधिकरण के अधिकारी कुल बजट का लगभग 33 प्रतिशत राशि ही बीते करीब 11 महीने में खर्च कर पाए हैं। अब एक महीने का समय और बचा है, लेकिन ऐसी कोई उम्मीद नहीं दिखती है कि अधिकारी इस बजट राशि का बचा हुआ 67 प्रतिशत हिस्सा खत्म कर पाएंगे।

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यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार ने शहर के विकास के लिए इतनी बड़ी जो राशि भेजी, अफसर उस हिसाब से काम नहीं करा पाए। इससे नोएडा का तो नुकसान हुआ ही, स्थानीय जनता भी विकास की तमाम सुविधाओं से वंचित हो गई। अधिकारी अगर विकास कार्यों में यह राशि खर्च कर देते तो आज नोएडा की तस्वीर कुछ अलग ही होती। साथ ही हजारों युवाओं को रोजगार भी मिलता। अब जबकि यह राशि खर्च नहीं हो पाई है तो सोचिए कि नोएडा विकास की दौड़ में कितना पीछे हो गया। हर रोज बढ़ती चुनौतियों से निपटने के लिए इस शहर को जहां दिन दूनी और रात चौगुनी तरक्की करनी चाहिए, वहीं अब यह उतना ही पीछे हो गया है। वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, बजट राशि में सबसे महत्वपूर्ण निर्माण कार्यों से लेकर गांवों के विकास तक पर खर्च होना था। यह राशि करीब 1462 करोड़ रुपये की थी। इसमें सिर्फ 507 करोड़ रुपये ही खर्च हो पाए यानी कुल आवंटित राशि का आधा भी इस्तेमाल नहीं हो सका।

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बता दें कि नोएडा का कुल अधिसूचित क्षेत्र 20316 हेक्टेअर भूमि पर है। यहां 168 नियोजित सेक्टर हैं। विकास के लिए 15280 हेक्टेअर का क्षेत्रफल अधिसूचित हुआ, जिसमें मास्टर प्लान 2031 के अनुसार कुल अधिसूचित क्षेत्र का 37.45 प्रतिशत हिस्सा आवासीय, 18.7 प्रतिशत औद्योगिक, 12.71 प्रतिशत यातायात, 15.92 प्रतिशत मनोरंजन और 15.55 प्रतिशत हरित क्षेत्र के लिए चिन्हित है। इन क्षेत्रों में विकास के लिए प्रतिवर्ष वित्तीय बजट निर्धारित होता है, जिससे बजट राशि खर्च कर शहर की तस्वीर बदली जाए और लोगों को ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं दी जा सकें।

ऐसा पहली बार नहीं है कि सरकार की ओर से शहर के विकास के लिए दिए गए बजट को अधिकारी खर्च नहीं कर पाए हैं। यह पहले भी होता रहा है कि आधी-अधूरी राशि खर्च कर विकास कार्यों में रोड़ा अटकाया जाता है। बेहतर होगा कि अधिकारी आगे के लिए सबक लें और अगले वित्तीय वर्ष के लिए खाका पहले से तैयार कर लें कि कब, कैसे, कहां और किस मद में कितना पैसा खर्च करना है, जिससे शहर की बदहाल सूरत तो बदले ही, लोगों को सुविधाओं और तकनीक का लाभ भी मिले। इससे रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे, जिससे तमाम घरों में खुशहाली आएगी।

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Ashutosh Pathak
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