जानिये उस इकलौती फिल्म के बारे में, जिसे चौधरी चरण सिंह ने देखा

जानिये उस इकलौती फिल्म के बारे में, जिसे चौधरी चरण सिंह ने देखा
chaudhary charan singh

चौधरी चरण सिंह के जन्मदिन पर विशेषः चरण सिंह के पीछे चलने वालों के पास हैं उनके बारे में कई कहानियां

सौरभ शर्मा, नोएडा: चौधरी चरण सिंह वैसे तो किसानों के मुद्दों को सुलझाने में व्यस्त रहते थे। खाली समय में वो लिखना भी पसंद करते थे। उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी में सिनेमा हॉल में एक ही फिल्म देखी। जिसे देखकर उनकी आंखों में आंसू निकल आए थे। 23 दिसंबर को उनकी जयंति के मौके पर हम आपके सामने ऐसे कुछ रोचक तथ्य लेकर आएं। जिनके बारे में उनके फॉलोअर्स भी नहीं जानते होंगे।

सींचपालों का बढ़ा दिया था वेतन

वर्ष 1934 में जन्में और यूपी में पेशगार पद से रिटायर्ड हुए ओमप्रकाश धीमान आज भी छपरौली गांव में रह रहे हैं। वो याद करते हुए बताते हैं कि बात 1957 की है। मैं सिंचाई विभाग में सींचपाल था। हमारी सैलरी बहुत कम थी। इसलिए हम सभी सिंचाई विभाग के बंगले पर गए, जहां चौधरी साहब पहले से ही मौजूद थे। उन्होंने हमें देखा तो हाथ जोड़े हुए बाहर आ गए। हमने अपनी समस्या के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि हमारा इंजीनियर कमरे में बैठा रहता है। कुछ नहीं करता और सींचपाल जंगलों में दौड़ता रहता है। ऐसा है कि इंजीनियर की सैलरी कम और सींचपालों की बढ़ा देता हूं। उस वक्त प्रदेश के सभी सींचपालों की सैलरी में इजाफा कर दिया था।

जिंदगी में देखी इकलौती फिल्म

छपरौली गांव में चौधरी चरण सिंह के बेहद करीबी रहे जगत सिंह बताते हैं कि एक उन्होंने चौधरी साहब से पूछा क्या आपने कोई फिल्म देखी है। तब उन्होंने बेहद चौंकाने वाली बात बताई थी। उन्होंने कहा था कि उन्होंने अपनी जिंदगी में सिर्फ एक ही फिल्म देखी है। मेरठ में एक कार्यक्रम के खत्म होने के बाद सिनेमाहॉल में मदर इंडिया लगी हुई थी। जिसे देखकर उनकी आंखों में आंसू आ गए थे। उनके मुताबिक किसानों की दशा पर इससे बेहतर कभी नहीं बनी। वहीं उन्हें ताश खेलने का भी शौक था। वो अपनी पत्नी गायत्री और बच्चों के साथ कभी-कभी ताश भी खेला करते थे।

पीएम रहते हुए कर दी थी ये बात

चौधरी चरण सिंह डिग्री कॉलेज के असिसटेंट प्रोफेसर प्रतीत कुमार बताते हैं। बात 1980 की है। जब वह देहरादून में चुनावी सभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने आम जनता से कहा था कि हमारी पार्टी ने सभी उम्मीदवारों को देख परखकर चुना है। अगर आप जनता में से किसी को ऐसा लगता है कि उनका कोई उम्मीदवार हाथ और लंगोट का कच्चा है तो उसे कभी वोट नहीं करना। ऐसा कभी किसी प्रधानमंत्री ने अपने उम्मीदवारों के लिए के लिए आज तक नहीं कहा। ये दम चौधरी चरण सिंह में ही था।

जब अध्यापकों की ठिकाने लगा दी थी अक्ल

डॉ. प्रतीत कुमार बताते हैं कि बात उस समय की है जब वो गृह मंत्री थे। बड़ौत में सभा को संबोधित करने के बाद उनके पास शिक्षकों का एक दल पहुंचा। उन्होंने अपने-अपने ग्रेड के हिसाब से सैलरी बढ़ाने की बात कही। तब चौधरी जी ने पूछा कि आप कितने घंटे स्कूल में पढ़ाते हैं। शिक्षकों का जवाब था कि 6 घंटे। तब उन्होंने शिक्षकों से कहा था देश का जवान आपसे कम सैलरी पर 24 घंटे ड्यूटी करता है। इसलिए 24 घंटे के हिसाब से आपकी सैलरी में कटौती कर देता हूं। उसके बाद सभी शिक्षक माफी मांगते हुए वहां से लौट आए थे।

किसानों के चंदे से लड़ते थे चुनाव

चौधरी जगत सिंह बताते हैं कि अपने पहले चुनाव से लेकर सांसद के चुनाव तक उन्होंने कभी भी अपनी जेब से चुनाव नहीं लड़ा। उसका कारण था कि उन्होंने कभी रुपया नहीं कमाया। वो हमेशा किसानों और मजदूरों से चंदा एकत्र कर चुनाव लड़ते थे। मैं खुद छपरौली और आसपास के गांव जाकर चंदा एकत्र करता था। उन्होंने कभी भी चंदे का रुपया जमींदारों और उद्योगपतियों से नहीं लिया। इसलिए एक आम किसान उनके हृदय से जुड़ा हुआ था। आज के समय में तो चुनाव में रुपया खर्च होने का कोई हिसाब ही नहीं है।
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