अब मोदी के 'मन की बात' पर भी विपक्ष ने साधा निशाना

अब मोदी के 'मन की बात' पर भी विपक्ष ने साधा निशाना
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sandeep tomar | Publish: Dec, 25 2016 08:05:00 PM (IST) Noida, Uttar Pradesh, India

विपक्ष का कहना है कि मोदी की तरह उन्हें भी रोडियो पर बराबरी का समय दिया जाए

नई दिल्ली/नोएडा। प्रधानमंत्री का 'मन की बात' कार्यक्रम भी अब विपक्ष के निशाने पर है। कांग्रेस ने पीएम पर प्रसार भारती एक्ट के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्हें इस तरह से दुरुपयोग नहीं करना चाहिए। कांग्रेस ने कहा है कि अगर आकाशवाणी पर केंद्र सरकार को इस तरह समय दिया जाता है तो विपक्ष को भी उतना ही समय दिया जाना चाहिए।

यूपीए सरकार में केंद्रीय मंत्री रह चुके मनीष तिवारी ने पीएम की मन की बात कार्यक्रम पर सवाल उठाते हुए कहा कि पीएम को यह समझना चाहिए कि दूरदर्शन या आकाशवाणी सरकार के अंग नहीं हैं, बल्कि ये पब्लिक ब्रॉडकास्टर है। इसलिए केंद्र सरकार इसे अपने एक टूल की तरह इस्तेमाल नहीं कर सकती। यह सीधा प्रसार भारती कानूनों का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि ऐन चुनाव के दौरान यह किसी एक पक्ष को गलत ढंग से ज्यादा महत्त्व मिलता है। अगर एक पार्टी को अपना पक्ष रखने के लिए इस तरह से समय दिया जाता है तो विपक्ष को भी उतना ही महत्त्व और समय दिया जाना चाहिए।

प्रेस कांफ्रेंस क्यों नहीं करते पीएम

कांग्रेस नेता ने पीएम के लोगों से रूबरू होने के इस अंदाज को लोकतंत्र के खिलाफ बताया है। पार्टी के अनुसार लोकतंत्र सिर्फ कहने का नाम नहीं है, बल्कि इसमें विपक्ष को सुनने का भी उतना ही महत्त्व दिया जाता है। लेकिन प्रधानमंत्री मन की बात के जरिए केवल अपनी बात कहते हैं जबकि उन्हें जनता की आवाज भी सुननी चाहिए। तिवारी ने कहा कि अपनी गलत नीतियों पर जनता से जुड़े तीखे सवालों से बचने के लिए ही वे हमेशा एक तरफा बात करते हैं। अगर वे लोकतंत्र के सच्चे हिमायती हैं तो उन्हें लोक के सवालों का भी सामना करना चाहिए।

इसलिए किया कड़ा हमला


पीएम के मन की बात कार्यक्रम पर विपक्ष के इस हमले के पीछे सबसे बड़ा कारण है कि जल्दी ही पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री अपनी बात 'मन की बात' कार्यक्रम के जरिये ज्यादा बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचा सकते हैं जबकि विपक्ष के पास इस तरह की कोई सुविधा नहीं है। अगर विपक्ष इस तरह के कार्यक्रम अपने स्तर पर कराने की कोशिश करेगा तो उसका कार्यक्रम व्यावसायिक कार्यक्रम के तहत आ जाएगा जिसके कारण उसे भारी रकम चुकानी पड़ेगी।

विपक्ष ने पूर्व के चुनाव में भी मन की बात के खिलाफ इसी तरह की शिकायत की थी। तब चुनाव आयोग ने यह कहकर मामला शांत कर दिया था कि वह इस बात की निगरानी करेगा कि पीएम इस कार्यक्रम में चुनाव से जुड़ा कोई मुद्दा न उठा सकें।
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