जानिए, मुलायम ने चुनाव आयोग में क्‍या सफाई दी 

मुलायम ने भी नहीं सोचा होगा कि अखिलेश की ये मजबूती खुद उन्हीं के ऊपर भारी पड़ेगी 

नई दिल्ली/नोएडा। कोई व्यक्ति अपनी ज़िन्दगी के इस पड़ाव पर अपनी सफलता इसी बात में देखता है कि अंततः उसने अपने बच्चों को कितने सही ढंग से स्थापित कर दिया, लेकिन अगर मुलायम सिंह के बारे में बात करें तो यही बात उनके खिलाफ जाती हुई दिख रही है। मुलायम सिंह ने 2012  के चुनाव के बाद जब अखिलेश यादव को सीएम बनाया था, तब वे उन्हें एक मजबूत मुख्यमंत्री के रूप में ही देखना चाहते थे, लेकिन अब जब कि वे एक मजबूत नेता की तरह उभर रहे हैं तो उन्हीं पिता मुलायम सिंह को ये बात पसन्द नहीं आ रही है। खुद मुलायम सिंह ने भी ये कहा सोचा होगा कि अखिलेश की ये मजबूती खुद उन्हीं के ऊपर भारी पड़ेगी।

कल सोमवार जब मुलायम सिंह लखनऊ से दिल्ली पहुंचे तो उनकी भाव भंगिमा में कोई जोश नहीं दिखाई दे रहा था। उनके चेहरे को देखकर उनके मन में चल रहे तूफ़ान को समझा जा सकता था। शांत मुद्रा में नीचे की तरफ देखते हुए मुलायम जिस तरह से अपने दिल्ली स्थित आवास में प्रवेश कर रहे थे। ऐसा लग रहा था मानो अखाड़े के इस पहलवान को इस बात की बेहद तकलीफ है कि उसे कुश्ती लड़े बिना ही हारा हुआ करार दिया जा चुका है, लेकिन एक अच्छे खिलाड़ी की तरह वे रेफरी (चुनाव आयोग) से यही कहना चाहते हैं कि उनके साथ गलत हुआ है और जीत के असली हकदार वही हैं। 

अमर अौर शिवपाल भी थे साथ

चुनाव आयोग पहुंचने वालों में उनके साथ अमर सिंह, जयाप्रदा और उनके ख़ास सिपाही शिवपाल भी शामिल थे। चुनाव आयोग को मुलायम सिंह यादव ने पार्टी में हुए ताजा राजनीतिक घटनाक्रम की जानकार दी और उसे यह समझाने की कोशिश की कि लखनऊ में बुलाई गई राष्ट्रीय अधिवेशन संविधान सम्मत नहीं थी और इसलिए उसमें पास किये गए प्रस्ताव भी सही नहीं हैं। अतः वही पार्टी के मुखिया हैं और साइकिल चलाने का असली हक भी उन्हीं को है।

बैठक में हुआ विचार 

जानकारी के मुताबिक उन्होंने आयोग को बताया कि रामगोपाल को पहले ही पार्टी से निकाला जा चुका था। ऐसे में उन्हें पार्टी के राष्ट्रीय अधिवेशन को बुलाने का कोई अधिकार ही नहीं था। चुनाव आयोग जाने से पूर्व सोमवार दोपहर मुलायम सिंह के दिल्ली आवास पर करीब दो घंटे तक अखिलेश विरोधी गुट के वरिष्ठ नेताओं की बैठक चली, जिसमें खुद मुलायम सिंह , शिवपाल यादव, अमर सिंह, जयाप्रदा और अंबिका चौधरी शामिल हुए। इस बैठक में भी इस बात पर विचार किया गया कि मौजूदा परिस्थिति में क्या कदम उठाना सही होगा।

अब भी सुलह की कोशिश में

दोनों पक्षों के चुनाव आयोग तक पहुंच जाने के बीच इस बात की भी खबरें आ रही हैं कि पार्टी के कुछ वफादार अभी भी दोनों धड़ों को साथ लाने की कोशिश में लगे हैं। इसकी अगुवाई पार्टी के वरिष्ठ नेता आज़म खान कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार आजम के पास नया फॉर्मूला है कि मुलायम कुछ अपनी पसंद छोड़ें और कुछ अखिलेश छोड़ेंं। बाद में मिल बांटकर टिकट का फैसला कर लें, लेकिन जिद्दी पहलवान और महत्त्वाकांक्षी टीपू में क्या कोई पीछे हटने को तैयार होगा, यह देखने वाली बात होगी।
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sharad asthana
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