इस्कॉन मंदिर में बलराम जयंती पर दिखा ऐसा नजारा कि झूम उठे भक्त, आप भी देखें तस्वीरेंं

इस्कॉन मंदिर में बलराम जयंती पर दिखा ऐसा नजारा कि झूम उठे भक्त, आप भी देखें तस्वीरेंं

Iftekhar Ahmed | Publish: Aug, 26 2018 07:50:44 PM (IST) Noida, Uttar Pradesh, India

इस्कॉन नोएडा में जन्माष्टमी महोत्सव के तहत रविवार 26 अगस्त को मनाई गई बलराम जयंती

नोएडा. इस्कॉन नोएडा में जन्माष्टमी उत्सव जारी है। इसी कड़ी में रविवार 26 अगस्त को बलराम जयन्ती (भगवान् बलराम का आविर्भाव दिवस) बड़े धूमधाम से मनाया गया । मुख्य उत्सव सुबह 10 बजे कीर्तन से प्रारंभ हुआ। साथ ही भगवान का विभिन्न प्रकार के फलों के रस, दूध, दही इत्यादि से अभिषेक किया गया । इसके बाद भगवान की महाआरती की गई। एक विशेष पेय वारुणि जो भगवान् बलराम जी को अत्यन्त प्रिय है, का भोग लगाया गया एवं भक्तों में वितरित किया गया । कार्यक्रम के अंत में सभी को लंच प्रसादम दिया गया। इस उत्सव में 1000 से ज्यादा लोगों ने भाग लिया। गर्मी और उमस के मौसम में भगवान को शीतलता प्रदान करने के लिए झूलन उत्सव मनाया गया जिसमे सभी भक्तों ने भगवान को झूला झुलाया। शास्त्रों में भगवान् बलराम को श्री कृष्ण के अवतार के रूप में स्वीकार किया गया है । कृष्णलीला में बलराम भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई के रूप में प्रकट होते हैं।

Balram Jayanti

गौरतलब है कि इस साल श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 3 सितंबर 2018 को पड़ रही है। हालांकि कुछ जगहों पर जन्माष्टमी मनाने की तारीख को लेकर असमंजस की स्थिति है, कियोंकि कुछ स्थानों पर कहा जा रहा है कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2 सितंबर को मनाई जाएगी़। दरअसल, इस संशय के पीछे मूल कारण है अष्टमी तिथि का दो दिन रहना। इस बार अष्टमी तिथि 2 एवं 3 सितंबर को रहेगी। इसीके चलते श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के मनाए जाने को लेकर पंडितों में मतभेद है। कुछ पंडित रात्रिकालीन अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र को मान्यता दे रहे हैं। वहीं, कुछ पंडित सूर्योदयकालीन अष्टमी तिथि को मान्यता दे रहे हैं। पंडितों के मतों में इस भिन्नता की वजह से आम श्रद्धालुगण असमंजस में हैं कि आखिर वे श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव किस दिन मनाएं? इस असमंजस को देखते हुए हम अपने पाठकों के लिए इसके समाधान हेतु कुछ तथ्य सामने रहे हैं। इसके आधार पर आप स्वयं यह फैसला ले पाएंगे कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी कब मनाई जाए।

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शास्त्रानुसार श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को बुधवार के दिन रोहिणी नक्षत्र में रात्रि के 12 बजे हुआ था। प्रतिवर्ष भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को ही श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाता है। इसलिए श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के दिन रात्रि में अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का होना अनिवार्य है।

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इस वर्ष अष्टमी तिथि दो दिन है। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष में अष्टमी तिथि 2 एवं 3 सितंबर दोनों ही दिन रहेगी। इस वर्ष 2 सितंबर को रात्रि 8 बजकर 46 मिनट से अष्टमी तारीख की शुरुआत हो जाएगी और 3 सितंबर को अष्टमी तिथि 7 बजकर 19 मिनट पर समाप्त होगी। वहीं, रोहिणी नक्षत्र का प्रारंभ 2 सितंबर को रात्रि 8 बजकर 48 मिनट से होगा और 3 सितंबर को रात्रि 8 बजकर 8 मिनट पर रोहिणी नक्षत्र समाप्त होगा। इसलिए रात् के 12 बजे केवल 2 सितंबर को ही अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र रहेगा। पंचांगों में भी स्मार्त (गृहस्थ) के लिए कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत 2 सितंबर को एवं वैष्णवों के लिए 3 सितंबर को निर्धारित किया गया है। इस प्रकार शास्त्रोक्त तथ्य यह है कि जन्माष्टमी का पर्व चूंकि वैष्णव परंपरा के अनुसार ही मनाया जाता है, इसलिए देश में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 3 सितंबर को ही मनाई जाएगी।

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