एक दूसरे के सामने ही चुनाव लड़ सकते हैं सपा नेता

मौजूदा हालात में आसार ऐसे बन रहे हैं की सपा नेता एक दूसरे के विरोध में ही खड़े हो सकते हैं

By: sandeep tomar

Published: 03 Jan 2017, 06:44 PM IST

नोएडा। समाजवादी पार्टी के मौजूदा हालात में बाप-बेटे में सुलह के आसार शून्य हो चुके हैं। सपा में चल रही तकरार के बीच अखिलेश आैर शिवपाल की पंसद का खुलासा हो चुका है। शिवपाल अपनी पंसद के पार्टी नेताआें को विधानसभा चुनाव का प्रत्याशी बना चुके हैं। वहीं अखिलेश की लिस्ट में गौतमबुद्घनगर की तीनों विधानसभा में खड़े हुए प्रत्याशियों का नाम ही नहीं है। वे तीनों विधानसभाआें से अपनी पसंद के अलग प्रत्याशियों को लड़ाना चाहते हैं। इसका खुलासा कुछ समय पहले ही उनकी जारी की हुर्इ प्रत्याशियों की सूची से हुआ। एेसे में यह कहना गलत नहीं कि अखिलेश ने अलग पार्टी बना ली, तो तीन विधानसभाआें से सपा नेता एक दूसरे के विपक्ष में खड़े होगे।

एेसे एक दूसरे के खिलाफ खड़े हो सकते है सपा नेता

कुछ समय पहले ही सीएम अखिलेश ने सपा के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल को उनके पद से हटा दिया। इससे पहले वह अपनी पसंद के उम्मीदवारों को टिकट दे चुके थे। वहीं अखिलेश यादव ने भी विधानसभा चुनाव को लेकर अपने पसंद के उम्मीदवारों के नामों की सूची जारी। इस सूची में गौतमबुद्घनगर में विधानसभा सीट के तीनों प्रत्याशी अलग मिलें। इनमें सबसे पहले नोएडा से सुनील चौधरी, दादरी विधानसभा सीट से राजकुमार भाटी आैर जेवर विधानसभा सीट से नरेंद्र नागर के नाम शामिल थे। वहीं, शिवपाल नोएडा से अशोक चौहान, दादरी विधानसभा से रविंद्र नागर आैर जेवर से बेवन नागर को टिकट दे चुके हैं। एेसे में साफ है कि अगर पार्टियां अलग होती है। तो सपा पार्टी के नेता एक दूसरे के सामने लड़ेंगे।

पार्टी कार्यकर्ता भी बटेंगे

अखिलेश आैर मुलायम के अलग होते ही पार्टी नेताआें के साथ ही कार्यकर्ता बट जाएंगे। एेसे में कौन किसको सपोर्ट करेगा। यह देखने वाली बात होगी। वहीं सपा के कुछ मंत्री आैर नेताआें ने मुलायम आैर अखिलेश का साथ देने के लिए खुला फैसला कर दिया है। जबकि कुछ कार्यकर्ता और नेता असमंजस में फंसे हैं।
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